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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Laalan nenk gaaiye praan
लालन नेंक गाइये प्राण पियारे | आनन कमल अधर सुंदर धर मोहन वेणु बजाइये ॥१॥ परम दुःसह विरहानल व्यापत तन सब जरत छुराइये ॥ अमृत हास मुसकान बलैया लेहो नयननकी तपत बुझाइये ॥२॥ उभय कर कमल हृदयसों परसके विरहनि मरत जिवाइये ॥ छोीतस्वामी गिरिधर तुमसे पति पूरन भाग्यतें पाइये ॥३॥
Shayan Darshan
NityaPad-311
Iman
Jiyaki najaanat hoe piya apani garaj key hoe gaahak .. mridu
जियकी नजानत हो पिय अपनी गरज के हो गाहक ॥ मृदु सुसकाय ललचाय आय ढिंग हरत परायो मन नाहक ॥| १॥ कपटी कुटिल नेह नहीं जानतहो छलसों फिरत घरघरके रस चाहक ॥। ये दई निर्दई स्थामघन परमानंद उर साहक ॥२॥
Shayan Darshan
NityaPad-311
Iman
Dampati rangbhareho baithe kunjamahalate
दंपति रंगभरेहो बैठे कुंजमहलते निकस ॥ राग कल्याण अलापत रस भरे लेत परस्पर रंगबितान तरे ॥१॥ लेत अतिजत भेदकर किन्नर एक सारीगम तीन सुढार ढरे॥ गोविंदप्रभु बलबल पिय प्यारी बांह धरें दोड अति सुघर खरे ॥ २॥॥
Shayan Darshan
NityaPad-311
Iman
Mahari poot tero
महरि पूत तेरो कैसेहुं बरज्यो न माने ॥| बलमोहनकी जोरी और बालक संग लिये मरकट घेर फेर पाछे पाछे ते लूटत घर मेरो ॥ १॥। दह्यो दूध घृत माखन तनक न उबरत कैसेक वास होय हमकेरो ॥ गोविंदप्रभुके बालविनोद सुनत नंदरानी मनहीमन मुसुकानी सांची कहत अनेरी ॥ २॥
Shayan Darshan
NityaPad-311
Iman
Myrie sithil mekhala baandhtahi katihaun hutee apane aangan thaadhi sthaam achaanak aaye..
माईरी सिथिल मेखला बांधतही कटिहौं हुती अपने आंगन ठाढी स्थाम अचानक आये।। ठगीसी रही मोपें बोलेहु न आवे छबि निरखत कछु और न भावे यह साध मेरे जियमें रही काहु सखि बतियन न लगाये ॥१॥ हाथहुते कंकण गयो गिर तब हरि आय उठाय बनाये दुखविसरासे ।। सूरदास मदनमोहनहौं मोहि नाजाने ताछिन भरभर अँखियन देखन न पाये ॥२॥
Shayan Darshan
NityaPad-312
Iman
Mero mukh chitechiten rahey oh saban mein laalan
मेरो मुख चितेचितें रहे ओ सबन में लालन भीजों ॥ ऐसों हठीलो नेक न टरही केतोहू सैनन खीजो ॥।१॥ बातेंतो औरनसों टगटगी मोतन ज्यों रिस में री तनमनछीजे | नेक हु को डर मोहि सूरप्रभु स्नेहहूको जक रही चित्र पुतरीजें ॥२॥
Shayan Darshan
NityaPad-312
Iman
Laalan teree chitwan chitahi churaave ..
लालन तेरी चितवन चितहि चुरावे ॥ नंदगाम वृषभानपुरा बिच मार॒ग चलन न पाबे ॥ होतो होंतो भरो डरों नहीं काहू ललिता दृगन चलावे ॥ कुंभनदास प्रभु गोवर्धनपर धर्‌यो सो क्यों न बतावे॥२॥
Shayan Darshan
NityaPad-312
Iman
Rahat mandaranori dwaar merey ... houn kaisen nikso merrie aliri baahar
रहत मंडरानोरी द्वार मेरे ॥। हों कैसें निकसो मेरी आलीरी बाहर ठाडोई देखों निशदिन रहत घेरें ॥ ९॥ कबहुंक वेणु बजावत गावत पिछवारे हवै बोल सुनावत टेरें॥ हों घती पल डरपतहों चतुर बिहारी जिन आवे घरमें दीये दरेरे॥२॥
Shayan Darshan
NityaPad-312
Iman
Jabjab dekho aaya hariko vadan taba nayathana merey mope naan aavahi ..
जबजब देखो आय हरिको वदन तब नयथना मेरे मोपे न आवही ॥ ऐसेरूप लालची ललचाय रहे मानों ज्यों बिछुरे जलचर जलपावहीं ॥१॥ रूपके रिझोने नयनारसमें मिल मग्न भये अब सखी हमसों न बतरावहीं।। मुरारीदास प्रभु एते पर निहुर भये अपनी ओट दुरावहीं ॥२॥
Shayan Darshan
NityaPad-312
Iman
Mereri vagar mein aavat chhabiso kamal
मेरेरी वगर में आवत छबिसो कमल फिरावत ॥ औरनसो बतरावत मोतन चितवत चतुर परोसन देखदेख मुसकावत ।।९॥ नयनन मनुहार करत बैनन समझावत नेह जनावत भ्रोंह चढावत ॥ नंददासप्रभुसों स्नेह लोक लाज बाढी कैसेंके धीरज आवत ॥२॥
Shayan Darshan
NityaPad-312
Iman
Ariho yaa mug niksi aaya achaanak kanhkunwar thaadhe aapani pore ..
अरीहो या मग निकसी आय अचानक कान्हकुंवर ठाढे आपनी पोर ॥ दृष्टिसों दृष्टिमिली रोमरोम सीतल भई तनमें उठीहे कींथो कामरोर ॥१॥ लालपाग झुक रही भ्रोहनपर स्थाम गातकिये चंदनकी खोर ॥। सूरदासप्रभु सर्वस्व हरके चलें मनमें आवत कैंधो मिलोरी दौरी ॥१॥
Shayan Darshan
NityaPad-313
Iman
Aliri curr shungar sayankal chully brazabaal piya darshaveko matt dwirad gain ..|
आलीरी कर शुंगार सायंकाल चली ब्रज़बाल पिय दरशवेको मत्त द्विरद गैन ॥| मानों शिशुमार चक्र उदय होत गगन मध्य ध्रुव नक्षत्र की परिक्रमा दैन ।१॥ मानों ऋतुवसंत आई अंग अंग छबिछाई दंपति समाज मोपें कही नपरत बैन ॥ मुरारीदास प्रभु प्यारी चित्रविचित्र गति सेवक निरख पिया छबि अद्भुत ऐसी को कर रची मैन |
Shayan Darshan
NityaPad-313
Iman

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