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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Chaley anat dhoke aaye merenso tou sankuch rahehi banegi.. | चले अनत धोके आये मेरेंसो तो संकुच रहेही बनेगी।।
ति हारे मिलेकी फूलपीर आबे बाकी मोहि अवधि आस तारे भोरलों गनेगी ॥१॥
तुम बहुनायक सबसुखदायक दोऊधा को सोचकिये प्रीततो तनेगी ॥
जाही को सुहाग भाग ताहीको लहनो जगन्नाथप्रभु प्यारे रसमें सनेगी ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-313 | Iman |
Lalke vadanpar aarti vaaruun.. | लालके वदनपर आरती वारूँ॥
चारु चितवन करों साज नीकी युक््ति वाती अगणित घृत कपूरकी बारूं ॥।१॥
संखधुनी भेरी मृदंग झालर झांझताल घंटावाजे बहुत विस्तारूं ॥
गाऊं गुन स्थामस्थामा रसनको स्वाद रसपरम हरखत चमर करडारूँ ॥ २॥।
कोटि उद्योत रविकांति अंगअंग छबि सकल भूलोकको तिमिर टारूँ॥|
दासकुंभन पिय लालगिरिधरनको रूपदेख नयन भर भर निहारू ँ ॥।३॥ | Shayan Darshan | NityaPad-313 | Iman |
Aaj baney sakhee nandkumar .. | आज बने सखी नंदकुमार ॥
वामभाग वृषभान नंदिनी ललितादिक गाजे सिंहद्वार ।।१॥
कंचनथार लियेजु कमलकर मुक्ताफल फूलनके हार ॥
रोरीको सिर तिलक विराजत करत आरती हरख अपार ॥२॥
यह जोरी अविचल श्रीवृंदावन देत असीस सकल ब्रजनार ॥
कुंजमहल में राजत दोऊ परमानंददास बलहार ।। ३॥ | Shayan Darshan | NityaPad-313 | Iman |
Mileki phool nayanahi kahey deit tere..| | मिलेकी फूल नयनाही कहे देत तेरे॥|
श्याम सुंदर मुखचुंबनपरसे नाचत मुदित अनेरे ॥ १॥
नंदनंदनपै गयो चाहतहै मारग श्रवणनघेरे कुंभनदास
गिरिधरन मिलनकूं करत चिन्ह दशफेरे ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-313 | Iman |
Tere suhag kii mahima mopein barni naan jaaee ...| | तेरे सुहाग की महिमा मोपें बरनी न जाई ॥।|
मदनमोहन पिय वे बहुनायक जाको मन लियो है रिझ्ाई ॥॥१॥
कवरी कुसुम गुहत अपने कर लिखत तिलक भाल रसभरे रसिक राई ॥
गोविंदप्रभु रीझ हृदय सॉलगाय लई लाडलेकुंवर मनभाई ।२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-313 | Iman |
Thaadhe kunj bhawan .. | ठाढे कुंज भवन ॥
लटपटी पाग छुटी अलकावली घूमत नयन सोहें अरुणबरन ॥।१॥
कहा कहूं अंग अंग की शोभा निरखत मन मुरझन ॥
गोविंदप्रभु या छबि निरखत रतिपति भये है शरन ॥॥२॥। | Shayan Darshan | NityaPad-313 | Iman |
Kunj mahal mein rasbharen khelat piyapyari .. | कुंज महल में रसभरें खेलत पियप्यारी ॥
तैसोई तरनि तनया तीर तैसोई सीतलसुगंध मंद वहत पवन तैसीय सघन फूली जुईनिवारी ।।१॥
प्रफुल्लित वनराजीव तैसोंई अलि गुंज श्रवणनको अतिसुखकारी ॥
गोविंद बलबल जोरी सदाई विर ाज़ो ग्रावत तान तरंग सुघर भारी ॥२॥ | Kunj Shayan Darshan | NityaPad-314 | Kanharo |
Pyaaro naval nagri sangri sanga null nagarrai .. | प्यारो नवल नागरी संगरी संग नल नागरराई ॥
नवलकुंज विहारी मनमथ मनहारी सुरतकेलि अंगअंग सुखदाई ।।१॥
नवल राग कान्हरोजु करत सुघर नवल नवल तान लेत मनभाई ॥
नवराग दंपतिके देखत गोविंद बलबल जाई ॥ | Kunj Shayan Darshan | NityaPad-314 | Kanharo |
Kunjamahalmein lalana rasbhare baithe sanga pyaari .. | कुं जमहलमें ललना रसभरे बैठे संग प्यारी ॥
रुचित रुचित बनमाल बदनपर मृगमद तिलक संवारी ॥ १॥
घनचय चिकुर कुसुम नानाविध ग्रथित मुदुलकर चंपक बकुल गुलाब निवारी ॥
गोविंदप्रभु रसवशकीनें वृषभाननंदिनीते मदनमोहन गिरिधारी ॥। २॥। | Kunj Shayan Darshan | NityaPad-314 | Adano |
Dolein douu banhjoti kunj mahalke aangan .. | डोलें दोऊ बांहजोटी कुंज महलके आंगन ॥
कबहुं चंदकबहुं प्यारीन चितै रहत पुन डगधरत छोटी छोटी ॥१॥
कबहुंक कुसुम करबीनत है कलियां मोटीमोटी ।।
हरिदास के स्वामी स्थामा कुंजविहारी गुहिगुहिबांधत चोटी ॥२॥ | Kunj Shayan Darshan | NityaPad-314 | Adano |
Kunj suhavano bhawan banathan baithe sriradha raman .. baran varan drumveli prafullit shashiki kiran jagamagaat taisoi | कुंज सुहावनो भवन बनठन बैठे श्रीराधा रमन ॥ बरण वरण द्रुमवेली प्रफुल्लित शशीकी किरण जगमगात तैसोई
सुगंध बहत पवन ॥१॥ आलिंगत पिक मंगलगावत नृत्यत अति आनंद
मगनमन ।। हरिनारायण स्यामदास के प्रभु देखें रतिपति लागे नमन ॥२॥ | Kunj Shayan Darshan | NityaPad-314 | Adano |
Chalo queyon naan dekheri kharey douu kunjanki parchhaanhi .. | चलो क्यों न देखेरी खरे दोऊ कुंजनकी परछांही ॥
एक भुजा गहि डार कदंबकी दू जीभुजा गलबांही ॥१॥
छबिसों छबीली लपट लटक रही कनकवेली तरुतमाल अरुझाई ॥
हरिदासके स्वामी स्थामा कुंजविहारी रंगेहैं प्रेमरंग माँही ॥॥२॥॥ | Kunj Shayan Darshan | NityaPad-314 | Adano |
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