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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Chhin chhan baanik aurahi aur || jaba dekho taba nootan
छिन छन बानिक औरही और || जब देखो तब नूतन सखीरी दृष्टि न रहै एकठौर॥ १॥| कहा कहूं कछु कहत नआवे बहुत करी चितदौर॥ कुंभनदासप्रभु गोवरधनधर रसिकराय सिरमौर।। २॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-314
Adano
Kadamb vanvidhin karat vihaar ..
कदंब वनवीधिन करत विहार ॥ अतिरसभरे मदन मोहनपिय तोरयो प्रिया उर हार ।। १।॥। कनक भूमि विथुरे गजमोती कुंजकुटीके द्वार ॥ गोविंदप्रभु श्रीहत्त कर पोवत सुंदर ब्रजराजकुमार ॥३॥
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NityaPad-314
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Dugger
डगर चल गोवर्धनकी वाट ॥ खेलत बीचमिलेगें मोहन जहां गोधनके ठाट ॥॥१॥ चलरी सखी तोहि जाय मिलाऊं सुंदरवदन सरोज ॥ कमलनयन के एक रोमपर वारों कोटिमनोज ॥|२॥ पाहुनी एक अनुपम आई आनगामकी ग्वार ॥। परमानंदस्वामी के ऊपर सर्वस्व डारों वार।।३॥
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NityaPad-315
Adano
Syama tere dahahadahe nathan kamal phoole vimal sarovar antar...
स्यामा तेरे डहहडडहे नथन कमल फूले विमल सरोवर अंतर॥। शोभित तारे करकजरारे मानों बीच परेरी मधुकर ।। १॥ डुरनमुरन चितवन हसोईं लजोईं चपलोर्ड अंखियन मनहर ॥। वरुनिनकी छबि आय वसी रीझवश कीये नंदकुंवरबर ॥। २॥ मुरारीदास प्रभु तिहारे ऐसे दृगमृग सुभावहावकर ॥ कटाक्ष लोचन कामदुःखमोचन अरु जीते है समरशर ।। ३॥
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NityaPad-315
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Sajniri aaj giridharlal pagiyaan dharey pench banaay .. maan
सजनीरी आज गिरिधरलाल पगियां धरे पेंच बनाय ।। मान छांडि संभारि नागरि निहार पिय मुख आय ॥३१॥ निरखि शोभा कोटिमन्मथ रहे हैं सिरनाय ॥ दासकुंभन लालगिरिधर लीजिये उरलाय ॥१॥
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Abaheete
अबहीते मन्मथ चितचोरत कहा करेंगी जोबन विरियां॥| मनहर लेत तनक चितवन में फेरत है नपननकी तरियां ॥ १॥ तेरोतन गिरिधरनलाल हित सबगुण रास विधाता धरियां ॥ कृष्णदासप्रभु गिरिधरनागर रिझ्बत हंसत सहज फुलझरियां ॥२॥
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NityaPad-315
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Kahaari
कहारी कहों मोहन मुखशोभा ॥ कहा करूं सिरपरीहै ठगोरी रूपदेख मेरो मन भयो लोभा ॥१॥ अंग अंग लावण्यरूप छबि मानोंहो मदन द्रुम उपजी गोभा ॥ कृष्णदास गिरिधरन किये वश चपल कटाक्ष गढ़यो मनचोभा ॥२॥
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NityaPad-315
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Besar kaun kii atee neeki.. hodpari preetam arupyari
बेसर कौन की अति नीकी॥ होडपरी प्रीतम अरुप्यारी अपने अपने जीकी ॥। १॥ न्याय परच्यो ललिताके आगें कौन सरस कौन फीकी॥ नंददास विलग जिनमानों कछु एक सरस ललीकी ॥ २॥
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NityaPad-315
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Sundervadan sadanshobhako
सुंदरवदन सदनशोभाको निरख नयनम्नन थाक्यो ॥| हों ठाडी वीथनहवै निकस्यो उच्कलकि झरोखन झांक्यो ॥१॥ मोहन इक चतुराई कीनी गेंद उछारि गगन मिस ताक्यो ॥ वारोरी लाज वैरिन भईरी मोकों मैं गमार मुख ढॉक्यो ॥२९॥ चितवन में कछू करगयो मोतन मन न रहत क्‍यों राख्यो ॥ सूरदासप्रभु सर्वस्व ले गए हँसत हँसत रथ हांक्यो ॥ ३।।
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NityaPad-316
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Khanjan nayan
खंजन नयन रूपरसमाते । अतिशय चारू चपल अनियारे पलपिंजरा न समाते ॥ १॥| उडउड जात निकट श्रवणनके उलट फिरत ताटंक फंदाते॥ सूरदास अंजनगुण अटके न तरु अबहि उडजाते ॥२॥
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NityaPad-316
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Dekhori maaee sundartaki
देखोरी माई सुंदरताकी अटक। शोभासिंधु अगाधरूपनिधि निरख नयन छबि लटक ।। १ श्रवणतार्टंक नासिका जलसुत दशनदामिनी तटक ॥ अधरबिंब चिबुक वर राजत ग्रीवाधरत भुजमटक ॥२॥ कनक-कलश कंचुकी उर अंतर क्षुद्रघंटिका कटक ॥। भूषणभूषित अंग किशोरी बनी अधिक छबी पटक ॥। ३॥
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NityaPad-316
Adano
Arrie tteri sahej kii musakyan
अरी त्तेरी सहेज की मुसक्यान मोहन मोह लीनो | जाकी रटत सब जग सुन सजनी सो तेरे आधीनो ॥। १॥। तेरे ही द्वार घर की चितवनी में रहत हे अपनो घर तज दीनो ॥ नंददास बांकी चितबनी में टोना सों कछु कीनो ॥ २॥
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NityaPad-316
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