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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Dhanya dhanya bridaranya kurangani..! srimukhakamal
धन्य धन्य बृदारण्य कुरंगनि॥! श्रीमुखकमल पीवत सखी सादर कृष्णसार पतिसंगनि ॥। १॥ चरणकमल कुंकुमरुषिततृण कुच अवलेप करत त्यजत आधि मनसजित पुलिंदनि ॥ गोविंदप्रभुको अमृतनाद सुन थकित प्रवाह तरंगनि ॥२॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-316
Adano
Kriparas nayan kamaldal phoole... bhru vilas dekhein kotik manmath rahey bhoole .. 9..
कृपारस नयन कमलदल फूले॥। भ्रू विलास देखें कोटिक मनमथ रहे भूले ॥ ९॥ वदनकमलपर कुटिल अलक छबि मोतिन हार अवतंस झूले ॥ गोविंदप्रभु प्यारी संग बैठे जहां कालिंदी कूले | २॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-316
Adano
Sunder yamunatirari manmohan thaade .. jabate drishtipari yaa mukhpe tabate dharat naan
सुंदर यमुनातीररी मनमोहन ठाड़े ॥ जबते दृष्टिपरी या मुखपे तबते धरत न धीररी ॥ १॥ मृगमद तिलक अलकघुँघरारी नासामुक्ता कीररी ॥ सूरदासप्रभु वेणु बजावत थाक्यो सरिता नीररी ॥ २॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-316
Adano
Tere chikur maano jaldhar uneede aaye dassan jyot-damini
तेरे चिकुर मानो जलधर उनीदे आये दसन ज्योत-दामिनी दरसानी। तापर भ्रोंह धनुष बूंदे सुरत श्रमरी बरखत पानी ॥। १॥ रोमावली केंधो हरित भूमिपर सुमन बनी तेसीय बोलत पिक बानी ॥ तापर रीझ तानसेन के प्रभु अंग अंग सरसानी |२॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-317
Kedaro
Shree vrindaavan saghan kunj phoole
श्री वृन्दावन सघन कुंज फूले नवदल पहोप पुंज त्रिविध समीर सीरी मंद मंद आवे ।। उसीर महल मध्य राबटी रची बनाय बैठी संग प्यारी सों तो पिय मन भावे ॥९॥ अदभुत गुन रूप रास राजत चहूं ओर सुबास बेन बिलास मध्य केदारो राग गावे | मनमथ कोटि कला जे सहचरी सकल समाज प्रेम प्रीत दर्शन आसकरन पावे ॥२॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-317
Adano
Baithe vrajrajkunwar pyaari
बैठे ब्रजराजकुंवर प्यारी संग यमुनातीर सीतल बियार सखी मंद मंद आवे। अति उदार बैजयंती स्याम अंग शोभा देत भुज परस्पर कंठ मेलि विहँसि गावे ॥१॥ झीने पट दीपत देह प्रीतमसों अति स्नेह गौर स्थाम अभिराम कोटिक काम लजावे ॥ सूरदास मदनमोहन मोहनी से बने दोऊ रहसि रहसि अंग अरगजा लगावे ॥श॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-317
Bihaag
Kunj mahal mein russ bharey khelat piya pyaari ..
कुंज महल में रस भरे खेलत पिय प्यारी ॥ तेसोई तरनितनयातीर तेसोई शीतल सुगंध मद बहत पवन तेसीये सघन फूली जुई निवारी ॥१॥ प्रफुल्लित वनराजीव तेसेई अलिगुंज श्रवणनको अति सुखकारी ॥ गोविंद” बल बल जोरी सदाई विराजो गावत तान तरंग सुघर भारी ॥२॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-317
Bihaag
Taruvar chhaanh teer jamuna key kiir padhawat
तरुवर छांह तीर जमुना के कीर पढावत डोलै ॥ रूपरास कोऊ नवल किशोरी मोहन कहि कहि बोले ॥१॥| झुकत झुकावत डार कदम्ब की वेणी शीश पै भ्रमर कलोले ।। नागरिदास नेह रसमाती बाम पूंदि मूंदि दूण खोले ॥२॥।
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-317
Kedaro
Pulin pavitra subhag jamuna-tata, sthamasyam birajat aaj.
पुलिन पवित्र सुभग जमुना-तट, स्थामास्याम बिराजत आज। फूले फूल सेत पीत राते, मधुप-जूथ आए मधु-काज ॥ तैसिय छिटकि रही उजियारी, झलमलात झाई उडु - राज । 'छीत-स्वामी' गिरिधर कौ यह सुख निरखि हँसे विद्ल महाराज ॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-317
Bihagaro
Adbhut baag banyo nava nikunj madhya vividh pakshi tahaan
अदभुत बाग बन्यो नव निकुंज मध्य विविध पक्षी तहां गुंजार करतरी ॥ उसीर महल रचे बैठे प्रिया प्रीतम चहुँ ओर सहचरी होदन भरतरी ॥१॥| छूटत फुहारे फुही घन मेघ बरसत उमगी घटा नीको मदन अनुसरतरी॥| कदली खंभ लपट्यो स्थाम तमाल सो नंददास प्रभु कोटि मेन परहरतरी ॥२॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-317
Kedaro
Baso merey nenan mein douchand.
बसो मेरे नेनन में दोउचंद। गौर वरन वृषभाननंदनी श्याम बरन नंद नंद ॥ बसोमेरे ॥ कुंज निकुंजमें बिहरत दोऊ अति सुख आनंद कंद ॥। रसिक प्रीतम पिया रसमें माते परो प्रेमके फंद।। बसो मेरे ।॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-318
Bihaag
Baithon kunj-bhawan mein douu giridhar radha pyaari .
बैठों कुंज-भवन में दोऊ गिरिधर राधा प्यारी । अरस-परस बिलसत मुख परसत, दरसत घन में छटा री ॥ अतिरस मत्त भरे मिलि गावत रीझि रिझ्ञावत ताननि प्यारी। छीत-स्वामी' गिरिधारी मोहन रसबस भए पुलकि भरत अँकवारि |
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-318
Bihagaro

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