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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aho hari hamhari tumjite .. | अहो हरि हमहारी तुमजीते ।।
मागरनटपट देहो हमारे कांपतहै तनसीते ॥१॥
कानन कुंडल मुकुट बिराजत कान्हकुंवरकेहौंवारी ॥
हाहाखातपैयांपरतहो अबहौं चेरितुम्हारी ।|२॥|
तब तेरो अंबर देहों री सजनी जलतेंहोयसबन्यारी ॥
सूरदासप्रभु तिहारे मिलनकों तुम जीते हम हारी ॥॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-034 | Ramkali |
Hariyash gawat chalivraj sundari nadiyamunake teer .. | हरियश गावत चलीब्रज सुंदरि नदीयमुनाके तीर ।।
लोचनलोलबांह जोटीकरश्रवणनझलकतबीर ।। १॥
बेनीशिथिलचारुकांधैपर कटिपटअंबरलाल ।|
हाथनलियें फूलनकीडलियां उरमुक्तामणिमाल ॥२॥।
जलप्रवेश कर मज्जनलागी प्रथमहेमकेमास।
जेसें प्रीतम होय नंदसुत ब्रतठान्यो यह आस ॥३॥
तबते चीर हरेनंदनदंन चढेकदंबकी डारि ॥
परमानंदफप्रभु वरदेवेंकोउद्यमकियोहै मुरारि ॥४॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-034 | Ramkali |
Hamaro ambardeho murari .. | हमारो अंबरदेहो मुरारी ॥
लेकरचीरकदंब चढबैठे हम जलमांझ उघारी ॥१॥|
तटपर विनावसन क्यो आयें लाजलगतहैंभारी ॥।
चोलीहार तुमहींको दीनेचीरहमेदेहोडारी ॥२॥
तुमयहबातअचंभो भाखत नागीआवोनारी ॥
सूरस्याम कछु नेहकरो जू सीतगयो तनमारी ॥। ३॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-034 | Ramkali |
Aavabahu nikasghoshkumar ..| | आवबहु निकसघोषकुमार ॥|
कदंबपरतें दरसदीनों गिरिधरनवलकुमार ॥ १॥।
नयनभरभरफलही देखो फल्योहैद्रमडार ॥
ब्रततुह्यारो भयो पूरण कह्योनंदकुमार || २।
सलिलतें सबनिकस आवो वृथासहित तुषार ॥।
देतहूंकिन लेहो मोपेंचीरचोलीहार ॥। ३॥
बांह टेकमोहि विनयकरो कहेवारंबार ॥
सूरप्रभु कह्योमेरे आगें करोआनशुंगार ॥४॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-034 | Ramkali |
Aapakdamb chadhadekhatsyam vasanaabhushansab harleene vinavasan jalbhitar vaam ...1.. | आपकदंब चढदेखतस्याम वसनआभूषणसब हरलीने विनावसन जलभीतर वाम ॥।१॥
मुदितनयन ध्यानधरहरिकों अंतरयामि लीनीजान ।
बारबारसबतासों मांगत हम पावें पतिस्थाम सुजान ॥२॥
जलतें निकस आयतट देख्यो भूषणचीरतहां कछुनाहीं |
इतउतहेर चकित भईसुंदरि सकुचगई फिर जलहीमाहिं ॥३॥
नाभिपर्यत नीरमेठाढी थरथरअंगकंपत सुकुमारी ॥
को लेगयो बसन आभूषण सूरस्याम उरप्रीतिबिचारी ॥।४॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-035 | Ramkali |
Laaj oat yeh doorkaro .. joimein kahon karo tum soiskuch uhanrahikahakaron ..1.. | लाज ओट यह दूरकरो ॥ जोईमें कहों करो तुम सोईसकुच उहांरहिकहाकरों ॥१॥
जलतेतीर-आयकर जोरोमें देखो तुमविनयकरो ।।
पूरणब्रत अब भयोतुहारो गुरुजनशंकादूरकरो ।|२॥
अब अंतरमोसोजिनराखो वारवार हठवृथाकरो ॥
सूरस्थ ामकह्यों चीरदेतहों मोआगें शुंगारकरो ॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-035 | Ramkali |
Jalate nicus teer sub aavahu .. jese sabitaso karjore tesengh jordikhavahu..1.. | जलते निकस तीर सब आवहु ॥ जेसे सबितासो करजोरे तेसेंह जोरदिखावहु॥१॥
नवबालहम तरुणकान्हतुमकैसे अंगदिखावहु।।
जलते सबबाहटेककें देखहूँ स्थामरिझावहु_ ॥२॥
ऐसे नहींरीझोमें तुमकूंऊंचेबांहठठावहु ॥
सूरदासप्रभुकहतहरि चोलीवस्तर तब पावहु ॥ ३॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-035 | Ramkali |
Mohanavasan hamaare deeje... | मोहनवसन हमारे दीजे।॥
बारणेजाऊं सुनो नंदनंदन सीतलगत तनभीजे ॥१॥
कोनस्वभाववृथा अनअवसर इनबातनकैसेजीजे ॥
सुनदुखपावेमहरियशोमति जाय कहेंअबहीजे ॥२॥
सब अबला जलमाँझ उघारीदारुणदुख कैसे सहीजे ॥
प्रभुबलराम हम दासीतिहारीजोभावे सो कीजे ॥।३॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-035 | Ramkali |
Taruni nicus sarbetat aaee .. punpun kahatalehu patbhushan yuvatisthambulai .. 1.. | तरुनी निकस सर्बेतट आई ॥ पुनपुन कहतलेहु पटभूषण युवतीस्थामबुलाई ॥ १॥
जलतेनिकस भई सब ठाढी करअंग ऊपरदीनो ॥
वसन देहोआभूषणराखहु हाहापुनपुनकीनों ॥२॥
ऐसेंकहाबतावतहो मोहिबांहउठायनिहारों ॥
करसो कहाअंग उरमूंदे मेरे कहें उघारो ॥३॥।
सूरस्थामसोईसोईहम करहे जोई जोई
तुमसब केहो लेहोंदावकबहु तुमसों हम बहुरकहातुमजेहों ।।४॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-035 | Ramkali |
Pyarenarhin kariye yeh haansi .. | प्यारेनर्हिं करिये यह हांसी ॥
दीजेचीर जायग्रहकों सब हमतोतुझ्ारीदासी ॥।१॥
तुम ब्रजराजकुमार कहावत सबहिनके सुखरासी ॥
श्रीविद्ठनगिरिधरनलाल तुमरहत सदा वनवासी ॥। २॥॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-036 | Ramkali |
Dehovrajanath hamariangi .. | देहोब्रजनाथ हमारीआंगी ॥
नातर रंगबिरंग होय गोकेइबेरियाहममांगी ॥।१॥
बृजके लोगकहा कहेंगे देखपरस्पर-नागी ।।
खरेचतुरहरिहो अंतरगत रेनपरी कबजागी ॥१॥
सकलसूतकंचनकेलागे बीच रत्ननकी धागी |।
परमानंदप्रभु दीजिये नकाहेप्रेमसुरंगरंगपागी ।। ३।॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-036 | Ramkali |
Yamunatat dekhenandanandan .. mormukutamakarakritkundal pitavasanatancharchitchandan ..1.... | यमुनातट देखेनंदनंदन ॥ मोरमुकुटमकराकृतकुंडल पीतवसनतनचर्चितचंदन ।।१॥॥
लोचन तृप्तभये दरशनते उरकीतपत बुझानी ।।
प्रेममग्न तब भई ग्वालिनीतनकी दशा भुलानी ॥ २॥
कमलनयन तटपर रहे ठाढे तहां सकुच मिली नारी ॥
सूरदासप्रभु अंतरयामी ब्रतपूरणवपुधारी ॥३॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-036 | Ramkali |
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