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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Merey ghar aao nandanandan chandan curr raakhon atee seetal ..
मेरे घर आओ नंदनंदन चंदन कर राखों अति सीतल ॥ अपने ही कर लगाऊं सब अंग झीनो बसन कर दीपत झांई कल ॥।१॥ मेवा मिठाई बहोत सामग्री कपूर सुवास मिश्री सों भल । करहु ब्यार मैं तोय बिंजना लै गले पहिराऊं माल तुलसीदल ॥२॥ कमल दलन की सेज बिछाऊं बाह धरों श्री राधा की गल। गिरिधर लाल लाडिलीछबि देखत श्रीवल्लभ सिर पर ॥३॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-318
Kedaro
Sakhee sugandh jall ghori key chandan hari anga lagaabat ..
सखी सुगंध जल घोरी के चंदन हरि अंग लगाबत ॥ बदनकमल अलके मधुपनसी बांकी पाग मनभावत॥१॥ कोऊ बिंजना कुसुमन के ढोरत कुसुमन भूखन करि उर पहेरावत ॥ तरू बेली सीयरी तर क्रीडत ब्रजाधीस गुन गावत (मन भावत) ॥
Useer Shayan
NityaPad-318
Adano
Nayananmein basarhiri laal key nagari nenk naan nisrat ...
नयननमें बसरहीरी लाल के नागरि नेंक न निसरत ॥। तेरे तनकी नवरंग बानिक रसिक कुंवर के चिततें न विसरत ॥ १॥ तेरोमन अरु गिरिधर प्रियको बहुविधान एको करि मिसरत ।। कृष्णदासगिरिधरन रसिकवर सुवशकरणकों सीखी हैं कसरत ॥। २॥।
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-318
Kedaro
Milbo nenanhiko neeko |
मिलबो नेननहीको नीको | नंदके लाल हमारे जीवन और जगत सब फीको ॥ वेद पुरान भागवत गीता गूढ ज्ञान पोथीको ॥ खाटी छाछ कहा रुचिमाने सूर खबैया घी को ॥।
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-318
Bihaag
Madanbhohan piya gawat raag kalyan ..
मदनभोहन पिय गावत राग कल्यान ॥ बाजत ताल मृदंग संख ध्वनि गावत शब्द रसाल | १॥। बीन बेनु मधुर सुर बाजत उपजत तान तरंग | “रसिक' प्रीतम पिय प्यारे की छबि ऊपर वारों कोटि अनंग ॥२॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-318
Kalyan
Chhoote bund sondhe soun lapatai teddy teddy pagiya munn mohe.
छूटे बंद सोंधे सों लपटै टेडी टेडी पगिया मन मोहे। कंचन चोलना यह छबि निरखत काम बापुरो को है ॥१॥ लाल इजार गरे बममाल गुंजमाल श्रुति कुंडल सोहै। रसिक रसाल गुपाल लाल गढ़यों कीमत कीमत जो है॥२॥
Kunj Shayan Darshan
NityaPad-318
Adano
Merey grih aavo nandanandan chandan curr rakhu atee sheetal.
मेरे गृह आवो नंदनंदन चंदन कर राखु अति शीतल। अपने कर लगाउ सब अंग झीनो बसन दीपत झांइकल ॥। १॥ मेवा मिठाई बहु सामग्री कपूर सुवास मिश्रीपना सु भल। करहुं बयार पहुप बिंजना ले गरे पहराउ माल तुलसी दल ॥ २॥ कमल दलनकी सेज़ विछाउं बाहं धरो श्रीराधाकी गल ॥ गिरिधरलाल लाडिले की छबिि देखत श्रीवल्लभ शिर पद पल ॥३॥
Useer Shayan
NityaPad-319
Kanharo
Shyam anga sakhee heim chandan kau neekau sohe bago ..|
श्याम अंग सखी हेम चंदन कौ नीकौ सोहे बागो ॥| चंदन इजार चंदन को पटुका बन्यौ शीश चंदन को पागौ ॥१॥ अति छबि देत चंदन उपरना बीच बन्यौ चंदन कौ तागौ ।। सब अंग छींट बनी चंदन की निरखत सूर सुभागौं ॥ २॥
Useer Shayan
NityaPad-319
Adano
Chandan argaja leey aaee baal laal key anga lagavan ..
चंदन अरगजा ले आई बाल लाल के अंग लगावन ॥ सुगन्ध गुलाब जल तामध्य कपूर डारि अंजुली भर भर लेपत गात लागत पवन चढ़ावन ।। नाना बहु भांतन के कुसुमन सो शैया रची मची सुवास बसी प्रीतम मन भावन ॥। मुरारीदास प्रभु ग्रीष्म ऋतु दाह तपत तैसेई लागि सारंग राग गावन ॥ २॥
Useer Shayan
NityaPad-319
Adano
Atee seey usirsane seenche khaase khaskhaane baithe priyapreetam munn harkhatahen |
अति से उसीरसाने सींचे खासे खसखाने बैठे प्रियाप्रीतम मन हरखतहें | फूलचकी बनमाला हिय मध्यराज रही फूलनके आभूखन मानों चंदन सरसत हें ॥१॥ औरनको सेनदेत प्यारी अंक भरि लेत प्रेम के समुद्र की लहर परसत हें ॥ ब्रजाधीशबलिहारी बिलसत प्रिय प्यारी नवल निवारी फूंही जल बरसत हें ॥२॥
Useer Shayan
NityaPad-319
Kanharo
Ruchir chitrasari saghan kunj mein madh kusum ravatiraje ..
रुचिर चित्रसारी सघन कुंज में मध कुसुम रावटीराजे ॥ चंदन के रुख चहुं ओर छबि छाय रही फूलन के आभूखन बसन फूलन सिंगार सब साजे ॥ १॥ सीयरे तै खाने में त्रिविध समीर सीरी चंदन के बाग मध चंदन महल छाजे। नंददास प्रिया प्रीतम नवल जोर बिधना रची बनाय श्रीव्रजराज बिराजे ॥। २॥
Useer Shayan
NityaPad-319
Bihaag
Merey ghar chandan atee komal leeje hoe sunder varr naayak ..
मेरे घर चंदन अति कोमल लीजे हो सुंदर वर नायक ।। हों अबला बहु जतन प्राणपत कनक पात्र लाई तुम लायक ॥। १॥। उत्तम घस गुलाब केसरसों विविध सुगंध बीच मिलायक ।। बहो जुबतिन मनहरण रसिक बर नंदकुमार सुरत सुखदायक ।॥। २।। सुन विनति नंदनंदन पिय बहोत भांत मधुर मृदु वायक ॥ कृष्णदास' प्रभु कृपा नेन जल छूटे लूटत मदनके सायक ।॥।३॥।
Useer Shayan
NityaPad-320
Kanharo

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