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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Atitap karat ghokhkumari ..
अतितप करत घोखकुमारी ।। कृष्णपति हम तुरत पावे कामआतुरनारी ॥१॥ नयनमुदितदरसकारण श्रवणशब्दविचार भुजाजोरतअंकभरहरिध्यानधर अंकवार ॥२॥ सरदग्रीष्मनाहिदेखत करत तपतनुगार ॥ सूरप्रभु सर्वज्ञस्वामी देखरीझेनार ।। ३॥।
Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar))
NityaPad-036
Ramkali
Vraj ghargai sub gopkumar ..
ब्रज घरगई सब गोपकुमार ॥ नेकहूकहूं नहींमनलागत कामधामबिसार ॥१॥ मातपिताको डर नमानत बदतनाहिनगार ॥ हठकरत बिरझाततबजिय जननीजानतबार ॥१३॥ प्रातही सब चली उठ मिल यमुनातटसुकुमार ॥ सूरप्रभुव्रत करन पूरन आये इनकी संभार ॥। ३॥
Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar))
NityaPad-036
Ramkali
Dridhabt keeno merehet ..
दृढब़्त कीनो मेरेहेत ॥ धन्यकहें नंदनंदन जाऊसबनहीकेत ।।१॥ करो पूरन काम तुमारो सरदरास रमाय ॥| हरख भई यहे सुनत गोपी रहीसीस नवाय ।२॥ सबनको अंगपरसकीनो ब्रतकीनोतनगार ॥। सुरप्रभु सुख दियोमिलके ब्रजचली सुकुमार ॥ ३॥।
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NityaPad-036
Ramkali
Neeke tapa kiyotnagar ..
नीके तप कीयोतनगार ॥ आपदेखत कदंबपें चढ मानलईमुरार ॥१॥ बरषभरकितनेमसंयम इनकियो मोहिकाज ॥। कैसेंहु मोको भजेकोऊमोहि बिरदकीलाज ॥२।॥ ध्यानब्रत इन कियो पूरणसीततपतनवारि ॥। कामआतुरभजें मोको नबतरुणी ब्रजनारी ॥३॥ कृपानाथकृपालभयेतबजान जनकी भीर ॥ सूर प्रभू अनुमानकीनो हरूंइनकीपीर ॥।४॥
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NityaPad-036
Ramkali
Banat naheen yamuna jee koo nahivo ..
बनत नहीं यमुना जी को नहिवो ॥ सुंदरश्याम घाटपर ठाढे कहो कोनविधि जयवो ॥|१॥ केसे बसन उतारधरें हम कैसेंजलहीसमयवो ॥ नंदनंदन हमको देखेंगे केसेंकरकेन्हहेवो ।॥२॥। चोलीचीरहार ले भाजत सो केंसे करपयवो ॥| अंकन भरभरलेत सूरप्रभु काल्हनयहिमगयैबो ।।३॥।
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NityaPad-037
Ramkali
Hasat syathaam vrajgharko bhaage.. logan yahakahikahi sunawat
हसत स्यथाम ब्रजघरको भागे।। लोगन यहकहिकहि सुनावत मोहनकरनलंगराईलागे ॥|९॥ हम स्नानकरत जलभीतर आपुनमीडतपीठ कन्हाई।। कहाभयो जोनंदमहरसुत हमसों करतअधिकहिं ढिठाई ॥२॥ लारिकाई तबही लोनीकी चारबरषकोपाच ॥ सूरस्यामजाय कहेयशुमतिसो स्यथामकरतहे नांच ।॥। ३॥।
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NityaPad-037
Ramkali
Hamaro deho manohar cheer ..
हमारो देहो मनोहर चीर ॥ कांपत दशनसीततन व्यापत हिमअतियमुनानीर ॥ १॥ मानेंगी उपकार रावरो करहु कृपाबलबीर।। अतिदुखत वपुपरसत मोहनप्रचंड समीर ॥२॥॥ हमदासी तुम नाथहमारे विनतीकरत जलभीतर ठाढी ॥ मानो विकसिकुमुदिनी शशिसोअधिक प्रीतिबाढी ।।३॥ जोतुमहमहीनाथकर मानोयहमागेंहमदेहु ॥ जलतेनिकसिआयबाहिरव्हेबवसन आपुनेलेहु ॥४॥ करधर सीसगई सन्मुखहरि मनमें करआनंद ॥ होय कृपालसुरप्रभु सबविधअंबर दीने नंदनंद ॥॥५॥॥
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NityaPad-037
Ramkali
Jey atitap dekh kripa harikino ..|
जे अतितप देख कृपा हरिकीनो ॥| तनकी जरनदूरभई सबकीमिल तरुणीसुख दीनो ॥१॥ नवलकिशोरध्यानयुवती मनमीडत पीठजनायो ।। विवश भईकछु सुधिनसंभारत भयोसबन मन भायो ॥|२॥ मनमनकहत भयोतप पूरण आनंद उर न समाई ॥ सूरदासप्रभु लाज न आवत युवतिनमांझकन्हाई ॥॥३॥
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NityaPad-037
Ramkali
Seet tunn laagat haye atibhari ..
सीत तन लागत हे अतिभारी ॥ देहों बसन सांबरे प्रीतम देह कंपत है सारी ॥१॥ नेक दया नहीं आवत नंदनंदन अतिदुःख्तरित ब्रजनारी ॥ गोविंदप्रभु करो मनोरथ पूरन हम तो दासी तिहारी ॥२॥।
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NityaPad-038
Ramkali
Haari maani naath ! umber deejen.
हारि मानी नाथ ! अंबर दीजें। नंदनंदन कुंवर रसिकवर मन- हरन, सुनहु गिरिवरधरन ! नीति कीजैं॥। सकल ब्रज-नागरि दासी तुम्हरी सदा, तन-मांझ सीत अति होत भीजें ॥। छीत-स्वामी' अमित गुन-गननि आगरे ! बिनती करतिं सबैं मानि लीजैं ॥
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NityaPad-038
Bhairav
Please see page 038 to 044 of kirtan pustika - nitya pad
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Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar))
NityaPad-038-044
Ramkali
Kese baney jamuna asnan .. nandako suta teer bethyon bado
केसे बने जमुना असनान ॥ नंदको सुत तीर बेठ्यों बड़ो चतुर सुजान ॥१॥ हारतोरे चीर फारे नेन चले चुराय ॥ काल धोकें कान मेरी पीठ मिड़ी आय ॥२॥ कहेत जुबती बात सुन बस थकीत भई ब्रजनार ॥ सूर प्रभुको ध्यान धर मन रही बाम पसार ॥ ३॥।
Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar))
NityaPad-044
Ramkali

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