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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Haa haa karat ghokh kumari .. | हा हा करत घोख कुमारी ॥
सित तें तन कंपत थर धर बसन देहो मुरारी ॥१॥
मनही मन अति ही भयो सुख देख के गिरधारी ॥
पुरस ईसबरी अंग देखे कहेते दोसन भारी ॥ २॥
नेक नही तुमैं छोह आवत गई हा सब मारी ॥।
सूर प्रभु अतही निठुर हौ नंदसुत बनबारी ॥।३॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-044 | Ramkali |
Abb kahaa curry haye suni merrie sajani laalan khel anokho paayo.. | अब कहा करि हे सुनि मेरी सजनी लालन खेल अनोखो पायो॥
रूप भर्यो ईत रात चपल अति अंग अंग मनमधथ निरस्त्रि लजायो ।॥। १॥।
दीजे वसन प्रान पति सबके अवतो प्रात हों न आयो ॥
श्री विट्ठलगिरिधरननिरखि त्रिय तन मन मेघन तुम हाथ विकायो ॥। २॥।
| Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-044 | Ramkali |
Hamaare busson deho girdhari eetani | हमारे बसन देहो गिरधारी ईतनि
दया तुमे नही आवत हम जल माझ ऊघारी ॥१॥
तुम ब्रजराज कुमार को डर कांपत हे अति भारी ॥
सुरदास प्रभु यहे बीनती तुम सबके दुख हारी ॥२॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-044 | Ramkali |
Tihaare busson leho sukumari tum jall maanjh | तिहारे बसन लेहो सुकुमारी तुम जल मांझ
ऊधारी नहाँई दोस लग्यो हे भारी ॥१॥
जलतें न्यारी होओ सबें तुम दोंऊ कर करो जुहारी ।
जब निहपाप होओगी तुम सब ब्रत फल होय कुमारी ॥।२॥
ईतनि सुनत सबेमील निकसी कर प्रणाम जब हारी ॥
सूरदास प्रभु सर्वस लेके बसन दीये गिरधारी ॥।३॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-044 | Ramkali |
Bhalee hoe keaney lalgiridhar bhor aaye boll saanche .. | भली हो कीनी लालगिरिधर भोर आये बोल सांचे ।।
युवतिवलल्लभ विरद कहियत याते तुम भलेहो बांचे ॥१॥
यहां आये कोन पठाये मानों मंत्रीकांचे ॥ तहीहें सिधारो लालन जा त्रिया संग रंगराचे ॥२॥।
अधर सुकत स्वास धिर नहीं नवत्रिया संग बंदवाचे ॥
सुन कृष्णदास नागरीकहत ज्योंही नचाये त्योंही नाचे ॥३॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-045 | Lalit |
Kaho tum saanchi kahaante aaye bhorbhaye nandlal.. | कहो तुम सांचि कहांते आये भोरभये नंदलाल।।
पीक कपोलन लाग रही है घूमत नयन विशाल ॥१॥
लटपटी पाग अटपटे बंदसो उर सोहे मरगजी माल॥
कृष्णदासप्रभु रसवश करलीने धन्यधन्य ब्रजकी बाल ॥।२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-045 | Lalit |
Vrajalalnar visonkar jorein .. | ब्रजललनार विसोंकर जोरें ॥
सीततन ही करत छेहोरितु त्रिविध काल जमुना जल खोरें ॥ १॥
गोरी पति पूजन तप साधत करतर हेंत नित नेम मागि रहे तजि सजागि चतुरदस जसुमति सुत के प्रेम । २॥
हमको देहों कृष्ण पति ईश्वर ओर कछू नहीं मन आन ॥
मन वचनहिं हमारे सूरस्थाम को ध्यान ।। ३॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-045 | Ramkali |
Aalee tere aanan drig alasyut raajat rasamseri | | आली तेरे आनन दृग आलसयुत राजत रसमसेरी |
नवकिशोर अंग अंग रंगरेन रसेरी ।१॥
शिथिल बसन अधर दशन नखक्षत लसेरी ॥
पीकछाप युगकपोल पिय मुख लाग हसेरी ॥ २॥।
में जानें पहचाने वचन प्रीतम गुणग्रसेरी ॥।
पियविहारी लाल ललित उरोजन बीच वसेरी ॥३॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-045 | Lalit |
Mein janiju jahaan rati maani tum aayeho laalan jaba chiraiyan | में जानीजु जहां रति मानी तुम आयेहो लालन जब चिरैयां
चुहचुहानी ॥ मुखकी बात कहा कहिये ठानी बात नहीं पहचानी ।।१॥
एते पर अखियां रसमसानी और पगिया शिधिलानी ॥
भाल यावक दृग अधरनअंजन देखियत प्रकट निसानी ॥२॥
डगमगीचाल मरगजीमाल अंगचिन्ह उबटानी ॥
सूरदासप्रभु गुणनिधानहो अंतरगतकी में जानी ॥३॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-045 | Lalit |
Gori pati poojat vrajnari .. | गोरी पति पूजत ब्रजनारि ॥
नेमधरम सो रहेंत क्रिया जुत बहुत करत मनुहारी ॥१॥
यह कहेंत पति उमापति गिरिधर नंददुलार सरण
राखिलीजेशिवसंकर तनही त्रखावत मार ।। २॥
कमल पत्र मातुलप व्होत्र फल नाना सुमन सुवास ||
महादेव पूजन मनवचकर सूर स्थाम की आस ।।३॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-045 | Ramkali |
Bhorbhaye mukhdekh lajaane .. ratiki kellie bellirus sochat | भोरभये मुखदेख लजाने ॥ रतिकी केली बेलिरस सोचत
शोभित अरूनयन अलसाने ॥१॥ काजर रेख बनी अधरनपर ललितकपोल
पीक लपटाने॥ मानों मधुप कंजपर बैठे उडनसकत मकरंद लुभाने ॥ २॥ हीयेहार
अलंकृत बिनगुण आये सुरत रणजीत सयाने ॥ सूरदासप्रभु पांउ धारिये जानतहीं
परहाथ बिकाने ॥।३॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-046 | Lalit |
Kyon mohan darpan nahin dekho || kyon dharani pup nakhan khanawat | क्यों मोहन दरपन नहिं देखो || क्यों धराणि पप नखन खनावत
क्यों मोतन नहिं पेखो ॥।१॥ क्यों ठाडे क्यों बैठत नाहीं कहा परी हम चूक ॥।
पीतांबर गहि कह्यो बैठिये कहाजु रहे हो मूक ।। २॥ उधरगयो उरते उपरेना देखियत
अंगबिभाग ॥ सूरस्याम लटपटी पाग पर यावककी छवि लाग ॥३॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-046 | Lalit |
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