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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Tooto merey prananhunte pyaari ..| neck chitey hans boliye moson houn
तूतो मेरे प्राणनहूंते प्यारी ॥| नेक चिते हँस बोलिये मोसों हों तो शरणतुम्हारी ॥|१॥ अंतर दूर करो अचराको खोलदे घूंघटपट सारी ।। कृष्णदासप्रभु गिरिधरनागर भरलीने अंकवारी ॥२॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-046
Lalit
Kaba dekho merrie or naagar nandkishore binati karat bhayo
कब देखो मेरी ओर नागर नंदकिशोर बिनती करत भयो भोर॥ हम चितव तुम चितवत नाहीं मेरे करम कठोर ॥।१॥ जन्मजन्मकी दासि तिहारी तापर इतनो जोर ॥ सूरदासप्रभु तुम्हारे रोमपर वारों कंचनखोर ॥२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-046
Lalit
Que‍yon abb durtaho prakat bhaye .. kaahooke nayan uneede nikse
क्‍यों अब दुरतहो प्रकट भये ॥ काहूके नयन उनीदे निकसे मानों शरसजे अरूण नये ॥१॥ यावक्भाल रागरस लोचन मशी रेखा जिहि अधर दये ॥ वलयपीठ नितंब चरणमणि बिनगुण हारज़ु कंठ चये ॥२॥। भुजतार्टंक ग्रीव वदनचिन्ह कपोलद्शन धसये ॥ आलिंगन चुंबन कुच चरचत मानों दोऊ शशि उर उदये ॥ ३॥ चरण शिथिल अरू चाल डगमगी घूमत घायलसे समर जये ॥| शोभितहै सब अंग अरूण अति स्यामा नख सायुज्य दये ॥।४॥ राजत बसन नील अरू राते आतुर मानों पलट लये ॥ सूरदास प्रभुको मन मान्यों सुंदरस्याम जु कुटिल भये ॥५॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-046
Lalit
Ramiri tuun praan piyaake sanga.. moso kahaa durawat pyaari prakat
रमीरी तूं प्राण पियाके संग॥ मोसो कहा दुरावत प्यारी प्रकट जनावत अंग ॥१९॥ अधर दशन लागे निज पियाके पीक कपोल सुरंग ॥ शिथिलित बसन मरगजी अंगिया नखक्षत उरज उतंग ॥२॥ कृष्णदासप्रभु गिरिधर पियको रूप पियो दृग भृंग ॥| डगमगात पग धरत धरणीपर करत मदन मानभंग ॥३॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-047
Lalit
Kahaante aaye hoe uthh praat angang alsaat .. nayana douu
कहांते आये हो उठ प्रात अंगअंग अलसात ॥ नयना दोऊ अरूण रगमगे घूमत आवत सुधि न कछू तन चिन्ह बने सब गात ॥॥९॥ लटपटी पाग मरगजीमाला पीतांबर ऊपर जो विराजत मंदमंद मुसकात ।। यह छबि निरख निरखकें ब्रजपति हँसत परस्पर लेत बलैया फूले अंग न समात ॥२॥
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NityaPad-047
Lalit
Kahaante laaye hoe insath aalas bharey hoe joombhaat .. jeali
कहांते लाये हो इनसाथ आलस भरे हो जूंभात ॥ जेअलि निपुण बसे तुम्हारे संग मधुपगुंज और न भाखत गाबत गुणन गाथ ॥१९॥ हों तुमतेसूधेंन्है बूझत तुम उलटेही तरजत हम पर हमने कहा भरलीने बाथ ॥। व्रजपति रसिक रसिक तुम दोऊ बेहूं रसिक जिन किये हैं चतुर्भुज सुन पिय गोकुलनाथ ॥। २॥
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NityaPad-047
Lalit
Aaye aaye hoe tum preetam praatahi raine anat basey .. rajnimukh
आये आये हो तुम प्रीतम प्रातही रेन अनत बसे ॥ रजनीमुख अवधि वबदी हमसो बोल तिहारे नशे ॥ ९॥| अंजन अधर भाल यावक रंग प्यारी पगपर सीस घसे ॥ अटपटेभूषण मरगजी माला आधे सिर पाग धसे ॥२॥ आलसयुत डगमगत चरणगति जिततित परत खसे || ब्रजपति पिय ललनाको बचन सुन नागर नगधर नेक हँसे ॥।३।।
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NityaPad-047
Lalit
Aaye aaye hoe tum sthaam kahaante bhorahi bhawan hamaare .. kahi
आये आये हो तुम स्थाम कहांते भोरही भवन हमारे ॥ कहि गये हमसो वसे औरनके सांचे बोल तिहारे ॥ १॥ सगरीरेन मोहि मग जोवतभई बिरहव्यथा भई भारे ॥ ब्रजपति देहदिसा बिथकित भई तोऊ मेरे नयनके तारे ॥ २॥
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NityaPad-047
Lalit
Merey aaye bhor piyaare raine kahaan gamai .. cone triya sanga vaspare
मेरे आये भोर पियारे रेन कहां गमाई ॥ कोन त्रिया संग वसपरे मोहन जानपरी चतुराई ॥।१॥। बिना हारबिनडोर बिराजत नखक्षत देत दिखाई ।। छीतस्वामी-गिरिधर वाही पे यावक पाग रंगाई ॥
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NityaPad-048
Lalit
Kahanju basey saaree raat nandsut .. charpahar mohi chaar yug beete
कहांजु बसे सारी रात नंदसुत ॥ चारपहर मोहि चार युग बीते तुमजो आये परभात ॥१॥ लटपटीपाग नींदभरि अखियां काजर लाग्यो तेरे गात ॥ चोलीके बंद चुभ रहे तनमें कसन भयो सब गात ॥।२॥ रहो रहो बवृषभाननंदिनी सुनहै यशोदा मात ॥ सूरदासप्रभु तिहारे मिलनकों रजनी कल्प सम जात ॥३॥
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NityaPad-048
Lalit
Kamalasi akhiyaan laal tihari .. tinason taktak teer
कमलसी अखियां लाल तिहारी ॥ तिनसों तकतक तीर चलावत वेधत छतियां हमारी ॥।१॥ इन्हें कहा कोऊ दोष लगावत ये अजहूं न संभारी ॥ श्रीविद्डल गिरिधारी कृपानिधि सुरतहीते सुखकारी ॥।२॥
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NityaPad-048
Lalit
Aisehi aise raine bihani .. chandra maleen chiraiyan bollie shoonya
ऐसेही ऐसे रेन बिहानी ॥ चंद्र मलीन चिरैयां बोली शून्य कोककी वानी ॥१॥ बे रसलुब्ध मानत नहीं काहू ममकी आस भुलानी ॥ कोकिल स्थाम स्यांम अलि देख्यो एयाम रंगहे पानी ॥ २॥| स्थाम जलद अरू स्थाम कहावत सूरस्थामकी वानी ॥ स्थामास्थाम रंगरस क्रीडत स्यामहेतकीजानी ।।३॥
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NityaPad-048
Lalit

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