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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Merenaaye bhor pyaarebaaken sub niss jaage .. | मेरेंआये भोर प्यारेबाकें सब निस जागे ॥
सांची कहो तुम वाही त्रिया कीसों पाये प्रेम रसचोर ॥ १॥।
कहुं अंजन कहुं पीक लागरही काहेकोंदुराबत नंदकिशोर ॥
सूरदासप्रभु तुम बहु नायक रंगरंगे चहुंओर ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-048 | Lalit |
Aaje niss jaage anuraage konke rangarangeho laal .. aroon | आजे निस जागे अनुरागे कोनके रंगरंगेहो लाल ॥ अरूण
नयन अरु माल मरगजी देखियत शिधिल गतिचाल ॥ १॥ कहाकहों छबि कहत
न आवे अंगअंग बोलत आल ।॥ कुम्भनदासप्रभु गिरिधर पिये भलें कहा कीये
हाल ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-048 | Lalit |
Aalas uneede nayana aavat ghoomat jhuk kaise neeken laagat | आलस उनीदे नयना आवत घूमत झुक कैसे नीकें लागत
अरूणवरन ॥ जानतहों सुंदरस्थाम रजनीके चारों याम नेक न पाये पलक
परन ॥।१॥ अधरन रंग रेख उरही चित्र विशेष-शिथिल अंग डगमगात चरण ॥।
चतुर्भुजप्रभु कहां बसन पलटआये सांची कहो गिरिराजधरण ।।२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-049 | Lalit |
Tumason bolweki naahin.. gharghar gaman karat sundarpiya chita | तुमसों बोलवेकी नाहीं।। घरघर गमन करत सुंदरपिय चित
नाहीं एक ठाहीं ॥१॥ कहा कहों सामलघन तुमसों समझ देख मन माहीं ॥
कृष् णदासप्रभु प्यारीके वचन सुन हृदय माझ मुसकाहीं ॥॥२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-049 | Lalit |
Aaj sagari nisha kahaan jaage laal kaho kinn saanchi subhag sambre | आज सगरी निशा कहां जागे लाल कहो किन सांची सुभग सांबरे
माधो।। घोख मथनशब्द प्राणपति गहगह्मो रहोरहो मोहन सूर प्रकट भयो आधो ॥१॥
कमल विकसत भये चक्रवाकी हसि सुमुखि पुलकित मुदित निज पति आराध्यो ॥
विश्व मोहन बदन निरख नभ चंद्रमा सगुण लज्जित भयो प्रेम गुण बाध्यो ॥२॥
ललित सुंदर राग चरचरी ताल धर मधुप गावत सुयशपिकन स्वर साध्यो ॥ कहे
कृष्णदास गोवर्धनधारी प्रिया धीर ब्रजसुंदरी कृपण धन लाध्यो॥।३॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-049 | Lalit |
Arrie tere nayan lalone jinn mohe sthaam salonen. | अरी तेरे नयन ललोने जिन मोहे स्थाम सलोनें।
अतिही दीरघ विमलअवलोकत कटाक्षन कोररी भारे पिय रस रीझेरी कोने ।!१॥|
वदनजोतिचंद्रहुते निरपल कुच कठोर भुजमृणाल बंकटटाबक टोनें।।
जनगोविंदप्रभु चलत ललित गति कसोटी लीक परी सोने ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-049 | Lalit |
Unidi aankhen rangbhari durat naheen patot... khanjanmeen mrigchheen | उनीदी आंखें रंगभरी दुरत नहीं पटओट॥। खंजनमीन मृगछीन
भयेहें वार डारों लख कोट ॥। १॥ ढुरनमुरन झमकन अनियारे चंचल करतहै चोट ॥।
चतुरविहारी प्यारीकी छबि निरखत बांधत रसकी पोट ॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-049 | Lalit |
Aisein sambre raine bihani.. bhor bhaye bandham chaley douu manman | ऐसेंई सांबरे रेन बिहानी॥ भोर भये बनधाम चले दोऊ मनमन
नार सयानी ॥१॥ प्यारी गई वृषभान पुरातन स्थाम जात नंदधाम ॥ प्रमदा
महलद्टवार व्है ठाढी बिनदेखी वेवाम ॥।२॥ प्रातभयो बनते ब्रज आबत मनमन
करत विचार ॥ सुनहो सूर सकुचत ठठकत गृहगये नंदकुमार ।। ३॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-049 | Lalit |
Bhalein bhor aaye nayana laal | apano putt peet chhaand nilambar | भलें भोर आये नयना लाल | अपनो पट पीत छांड नीलांबर
लै बिलसे उरलाई लई रसिक रसीली बाल ॥|१॥| रति जयपत्र लिखत दीने ऊर
स्थामघन विनगुण माल ॥ नंददासप्रभु सांची कहिये फिरफिर प्यारे हमारे
नंदलाल ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-050 | Lalit |
Laal tum aaye raine gamaay.. rasbiti aur tamchar boley gwalan | लाल तुम आये रेन गमाय॥ रसबीती और तमचर बोले ग्वालन
छ ोरी माय ॥ १॥ चंद मलीन भयो दिनमणितें कुमुदरही कुमलाय॥ अरूण किरण
कंजन पर परसत मधुप लिये मधु जाय ॥२।।| आज रेन जागत भई सगरी तातें कछू
न सुहाय ॥ सूरदासप्रभु परे प्रीतिवश मिलके बिछुरुयो न जाय ॥३॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-050 | Lalit |
Sakal nish jaage kese mayan .. jaantahon kahaan kiye nandsut | सकल निश जागे केसे मयन ।। जानतहों कहां किये नंदसुत
आनरमनि सुखचैन ॥॥१९॥ लटपटीपाग चालगति उलटी रसन अटपटे बेन ॥
लगत पलक उधरत न उघारे मानों खंडित रस ऐन ॥। २॥ आज रेन जागत भई सारी
अबहोनी दुख देन ॥ जानी प्रीति सूरप्रभु अब हम सुरत भई गति गेन ॥ ३॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-050 | Lalit |
Aaj tou uneede hojulal .. tum podho houn charan palotam naan | आज तो उनीदे होजुलाल ॥ तुम पोढो हों चरण पलोटं नां
जानों जिय ख्याल ।॥।१॥। नख्तक्षतपिय उर पीर हमारे देरियत हो बेहाल ॥ सुनहिं
सूर अब कठिन वचन त्रिय भरलीने अंकवाल ॥।२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-050 | Lalit |
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