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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aajato uneede hoe laal || laal lochan piyake alsaane
आजतो उनीदे हो लाल || लाल लोचन पियके अलसाने बिनगुण बनी उरमाल ॥|१॥| डगमगात चरणधरत धरणी पर मेंज़ु लखे तबहीं बेहाल ॥ अति तुतरावत बात बनावत लागोहो मोहि रसाल ॥। २॥ हमसो कपट औरनके वश भये हमारो मरणतुम्हारो ख्याल ॥ तुम बहुनायक सुखके गाहक सूर बाल बेहाल ॥ ३॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-050
Lalit
Jaheen jaao jahaan raine basey .. jaanatahunpiya rasik shiromani
जहीं जाओ जहां रेन बसे ॥ जानतहूंपिय रसिक शिरोमणि नागर जाघर रंगरसे ।। १॥ अंजन अधर प्रकट देखियतहें नागवेल रंग निपट खसे |। लटपटीपाग महावरके संग मानिनी पगपर सीस गसे ॥२॥ घूमतहो मानों प्रियाउरगिणी नवविलास रस सहज दसे ॥ शिधिलित बसन मरगजी माला पीठ वलयके चिन्ह कसे ।।३॥ स्याम उरस्थल पर नखशोभित गगन द्वीज शशि उदित जसे॥ सूरदासप्रभु प्यारीके बचन सुन नागर नगधर नेक हँसे ।।४॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-050
Lalit
Madanmohan piya jaage raine ..| aalas vash joombhaat shidhil anga
मदनमोहन पिय जागे रेन ॥| आलस वश जूंभात शिधिल अंग अरूण तिहारे नयन ॥॥१॥ उपटे उरहार प्रकट देखियत प्यारी कंठ लाग दियो सुख चेन ॥ ब्रजपति पियकी चाल चलन पर कोटिक बारो मेन ॥२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-051
Lalit
Sunderlal govardhanthari kahaan tum raine basey merey laal... aalas
सुंदरलाल गोवरधनथारी कहां तुम रेन बसे मेरे लाल॥। आलस नयन वेन चलबोल छूटे बंद डगमगात चाल ॥। १॥| सारंग अधर रुचिर वपु नखक्षत कुच प्रसंग उर विलुलित माल ॥ कररथ हीन मीन पति जीत्यो चढी धनुष मानो भ्रोंह विशाल ॥। २॥ नहीं सतभाय कहत प्रीतमसो फिरतहो पात पात अरूडाल दास पुरारी प्रीति औरनसों देखत प्रकट तुम्हारे हाल !।३॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-051
Lalit
Ekrang syaam sadaa tum aajbhaye pachrang.. chandan bandan adharan
एकरंग स्याम सदा तुम आजभये पचरंग।। चंदन बंदन अधरन अंजन पीककपोल सुरंग ॥।१॥ होंतो तिहारे हाथ बिकानी तुम औरनके संग ॥ श्रीविद्डल गिरिधर बहु नायक सीखे ऐसेढंग ।।२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-051
Lalit
Rajani raaj leo nikunj nagarki raani .. madan mahipati jeet
रजनी राज लियो निकुंज नगरकी रानी ॥ मदन महीपति जीत महारण भश्रमजल सहित जुंभानी ॥। ९॥ परम सूर सौंदर्य भूकुटी धनु अनियारे नयन बाणसन्धानी ॥ दास चतुर्भुजप्रभु गिरिधर रससंपतिविलसी ज्यों मन मानी ॥२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-051
Lalit
Nakh kahaan laage vann vanra lagaaye nakh chakh kyon raate praat
नख कहां लागे वन वानरा लगाये नख चख क्यों राते प्रात देख्यो ताते भानको ॥ चंदन लग्योहे कहां विध्नहरण पूजा कीनी बंदन लग्योहै कहां परस भयो थानको ॥।१॥ रेन रहे कहां नटनृत्य जहां अरबरे क्‍्योंबोलो मोसों डरभयो आनको ॥ गूजरीसों गुजरी अब आगे आय ठाडे सूर थेगरी कहांलों देत फाटे आसमानको ॥२॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-051
Lalit
Jareeke jaraayvekon tatetan taayvekun katelon laayvekoon dwaar
जरीके जरायवेकों तातेतन तायवेकूं कटेलोन लायवेकूं द्वार आय ठरेहो ॥ रेनबसे और ठोरअब आये मेरीओर वाहीपें पधारो कान्ह जाके बस परेहो ॥ १॥| बिनगुणमाल सोहे अधर अंजन रेख मेरीसों कान्ह अब जाओ तुम भरेहो ॥ चारयाम बीते मोहि घडी भर कल्प न्याई सूरस्याम हियेहूते नेकहु न टरेहो ॥२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-051
Lalit
Dhanya dhanya ritu dhanya tere joban janam karam guna lachchan ..
धन्य धन्य ऋतु धन्य तेरे जोबन जनम करम गुन लच्छन ॥ प्रेमरूप रसराज दुलारी उठ चल तुही विचिच्छन ॥१॥ पठई तोहि लेन साँवरे मान छांड हठ रच्छन ॥ तें बस कर लियो धोंधीको प्रभु साज भूखन पट दच्छन ।। २॥
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NityaPad-052
Lalit
Rangarsik nandanandan rangarsik bhamini mruganayani kamalanayan
रंगरसिक नंदननंदन रंगरसिक भामिनी मृुगनयनी कमलनयन नागरनागरी॥ गिरिधर कल हंसहंसनी मानों गोप तरणि दोऊ समतूल गुणनसागर सागरी ॥| १॥ करवकेली बनविहार निरख जोटि लजतमार गावत स्वर मिलवत चारू ललित रागरी | खगमृग पशुसुनत नाद पीवत अधरसुधा स्वाद कृष्णदास वबदत वाद सुफल भागरी ।। २॥
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NityaPad-052
Lalit
Aaye alsaane sarsani mein jaane joo laal.. darak paag ardhasis
आये अलसाने सरसानी में जाने जु लाल॥ दरक पाग अर्धसीस लटपटी महावर लाग्यो गाल ।।१॥ नेना अरुन भये रंगराते सुन सुन हो स्थाम तमाल॥ बेन बोलत कछु मुख नहीं आवत गोविंद हालबिहाल ।। २॥
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NityaPad-052
Lalit
Kahaante aaye joo chitchor | chalat chalat pug parat haye paachhe
कहांते आये जु चितचोर | चलत चलत पग परत हे पाछे मनो बध्े रस डोर ॥।१॥ मुखकी बात करत हो मोसों जियकी कछु और ॥। भूल पीताम्बर औढ नीलाम्बर अचरज उपज्यो जोर ॥२॥ दरसन दिखावन कह गये मोसों ललित गाबत आये भोर ॥ बहुनायक धोधीके प्रभु तुम नागरनंदकिशोर ।।३॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-052
Lalit

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