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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Kahaante aaye chalei jaaoge thaade raho neck sthaam ..| suno baat | कहांते आये चलेई जाओगे ठाडे रहो नेक स्थाम ॥| सुनो बात
चित लाय लाडीले हमे छांड घनस्याम ॥१॥
राखोगी मधुर प्याय प्याय रस बांधोगी कुच भुज दाम ॥।
तानसेनप्रभु छांडि अटपटी वसिये मेरेई धाम ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-052 | Lalit |
Piya binn jaagat raine gaee .. avadhivadi gaye ajahuun naan aaye | पिय बिन जागत रेन गई ॥ अवधिवदि गए अजहूं न आये
बडी वेर भई ॥ १॥ कछु कहत करत कछु कोने सीख दई ।। सांच नही एको अंग
कहां रीत लई ॥२॥ कैसे कीजे विश्वास भएहो बिषई ॥ रसिकप्रीतम रावरीहे
छिनछिन गति नई ।। ३॥॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-052 | Lalit |
Bhorahi aaye merey paachhjhe jogiya alakh kahee kahee jaage.. | भोरही आये मेरे पाछझे जोगिया अलख कही कही जागे॥
मोहनी मूरत एनमेनसे नेन भरे अनुरागे ॥ १॥॥
अंग भभूत भरे गरे सेली दरसतहीबेरागे ॥
तनमन वारोगी धोंधी के प्रभुको राखोंगी एक सुहागे ॥२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-052 | Lalit |
Sughar piya shyam ajahu naan aaye dhaam .. sagari raine mohi mug | सुघर पिय श्याम अजहु न आये धाम ॥ सगरी रेन मोही मग
जोवत भई बिसर गयो हरिनाम ॥। १॥। कोन सुघर जिन बस कर लीने राखे चारों
जाम ॥ रसिक प्रीतम रस वाही के भोगी ओरन सो नहिं काम ॥ २॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Lalit |
Sughar piya aine jaake rahey tumren . latpati paag subhag sheesh | सुघर पिय एन जाके रहे तुमरेन । लटपटी पाग सुभग शीश
डरक रहे कछुनेन ॥ १॥ कोन सुघर जिन रसबस कर लिने तनक नहिं चित्त चेन ॥
रसिक प्रितम पिय निशके उनीदे बोलत अटपटे बेन ।।२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Lalit |
Sughar piya aaye bhuj bharee kanth lagaaye nenan hiyo siraaye .. | सुघर पिय आये भुज भरी कंठ लगाये नेनन हियो सिराए ॥
खुले कपाट ठाड़ी मग जोबत सगरी रेन निवहाये ॥। १॥ को त्रिया के रति रंग राचे
चारों जाम आनन नहिं पाये॥ रसिक प्रीतम ऐसे कबहू न कीजे बसि ब्रजजन सु
पाये ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Lalit |
Sughar piyakon baaipen utaaro rylon .| naagar natwar | सुघर पियकोन बाईपें उतारो राइलोन ।| नागर नटवर
तनकचितवनमें वसेवाहीके भोन | १॥ जासुखकों सनकादिक तरसत मुनिजन
धरिहें मॉन ।। रसिक प्रितमचारी जामवसे अनहोनी भड़होन ।।२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Lalit |
Jaanan lageri laalan mill vichhuranaki bedan .. drig bhar | जानन लागेरी लालन मिल विछुरनकी बेदन ॥ दृग भर
आयेरी मे कहीरी कछुक तेरी प्रीतिकि रीति आनाकानी भई घुमराई में गये एते
दिन ॥१॥ नेहकनावडेकी रूप माधुरी अंगअंग लागी सरस हियो वेदन ॥
नंददासप्रभु रसिक मुकुट मणि कर पर धर कपोल रहेरी ध्यान धर ररकत ढरकतहैरी
तिलक मृगमेदन ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Malkos |
Boleri aalee kuhuk kuhuk koyaliya .. mein birhin kahaan | बोलेरी आली कुहुक कुहुक कोयलिया ॥ में बिरहिन कहां
करुं पिया बिन हुक उठत मेरे जिया ॥। १॥ तेसिय मंद हेमनत महाऋतु कांपत थिर
थिर सिया ॥ रसिक प्रीतम बिन कल न परत हे सुन आये घर पिया ।।२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Lalit |
Suno merrie vaat thaade raho lalana kaheko joo rusaat .. gharee gharee | सुनो मेरी वात ठाडे रहो ललना काहेको जु रुसात ॥ घरी घरी
पलपल देखे जुग बीते निस गई भयो प्रात ॥१॥। पैयां परत हों तुमसों कर जोरों
नेनन जल भर जात ॥ सूरदास तुम्हारे रूसे पर हों तो हाहा खात ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Lalit |
Bhairi aalee tamchar bunn khaga ror .. aavan kaha gaye ajahu naan | भईरी आली तमचर बन खग रोर ॥ आवन कह गये अजहू न
आये जागत भयो मोहि भोर ॥ १॥ किन सोतनके बस परे प्रीतम चितबत चन्द
चकोर || रसिक प्रीतम कुमुदिनी सकुचानी फूले कमल रवि भोर ॥२॥॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-053 | Lalit |
Maaee ree rung raheri laalan una hii trian sanga, nirakhat chhavi | माई री रंग रहेरी लालन उन ही त्रियन संग, निरखत छवि
ढंग परत ओरे ओरे ओरे ॥ ले दरपन मुख देखो जु प्यारे लाल, अधरनि अंजन
लाग्यो ठोर ठोर ॥ १॥ हमसों अवध बदी ओरनसों रत मानी, करत फिरत पीत
नई नई पोर पोर।। जाओ जी जाओ तुम उनही के सूर प्रभु काहे को आवत प्रात
मेरे दोर दोर ॥२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-054 | Malkos |
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