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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Pyaari teree pootari kaajar hootein kaaree maanon bhanwar douu oode | प्यारी तेरी पूतरी काजर हूतें कारी मानों भँवर दोऊ ऊडे
बराबर ॥ चंपेकी डार कुन्द अलि बेठे लागी जीय बराबर ॥ १॥| मानो कामको
कटक सखीरी जब जिय होत डराडर ॥| हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
दोउ मिल लरत झराझर || २॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-054 | Malkos |
Aavan kaha gaye ajj huu naan aaye sub niss beeti mohe | आवन कह गये अज हू न आये सब निस बीति मोहे
गिनमिन तारे । दीपक ज्योत मलिन भई हे किन दुतियन विर्माये प्यारे ॥१॥
तमचर बोले बगर सब खोले फले मधुप गुँजारे ॥ धोधीके प्रभु तुम बहुनायक
आये निपट सबारे ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-054 | Malkos |
Pyaarehon baat kahat bilag jinn maanon tummoson durr jaay | प्यारेहों बात कहत बिलग जिन मानों तुममोसों दुर जाय
अनत रति मानी ॥ तुमह तोमेरें आये भलोजु मनावन सो तोही हम जानी ॥।१॥
नखक्षत चिन्ह देखियतहें यहबात मेरेमनहूं न मानी ।॥ तानसेनके प्रभु न्यारेव्हे रहे
क्यों याहीते सोतिनजानी ॥२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-054 | Malkos |
Kahaante adharanako rung khoyo .. mein jaani parirambhan chumban | कहांते अधरनको रंग खोयो ॥ में जानी परिरंभन चुम्बन
उरको चित्र सब धोये ॥१॥ तेरे संगम सुन व्र जसुन्दर लालन अनत न सोयो ॥
कृष्णदास पिय गिरिधर पियको करतल चिबुक परोयो ॥।२॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-054 | Malkos |
Samey bhayo mangal mangalanidh jagahu laal raine dhara aaee .. | समे भयो मंगल मंगलनिध जागहु लाल रेन ढर आई ॥
आरती वदनकमल देखनको अरु सुरंग लोचन अरुनाई ॥९१॥ नवरस केलि
बिलास किये छब प्रगटत जग सुन्दर ताई॥। बल्लभ सीलरूप गुन पूरन देहो सरस
भागिन सुखदाई ॥ २॥॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-054 | Malkos |
Unidi aankhen laagat pyaari kajrari korwari .. | उनीदी आंखें लागत प्यारी कजरारी कोरवारी ॥
समगरी रेन जागी सुखसों पियाके संग तातें भई रतनारी ॥१॥
घरी घरी पलछिन झपकत मानो करखत कंजपवारी ।।
नंददासप्रभुकी छबि निरखत मोहे कुंजबिहारी ॥ २॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-055 | Pancham |
Jageho raine tum sub nayana aroon hamaare || tum kiyo madhupan | जागेहो रेन तुम सब नयना अरूण हमारे || तुम कियो मधुपान
घूमत हमारो मन काहेते जु नंददुलारे ॥ ९॥ उर नखचिन्ह तुम्हारें पीर हमारे
कारण कोन पियारे ॥ नंददासप्रभु न्याय स्थामघन बरषे अनत जाय हम पर
झूमझुमारे ॥ २॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-055 | Pancham |
Tum kabate sikheri laalan yaa laganako jaanan ..| sobat naheen | तुम कबते सीखेरी लालन या लगनको जानन ॥| सोबत नहीं
रेन दिन लगी रहत ओसर कबहू हँस बोलत नहीं आनन ॥१॥ ध्यान धरत पुनि
अंक भरत हो गाय उठत वाके गुन गावत ॥ सांची कहत हों बदन बिलोक्यो
भामिनी भेद कटाच्छ जनायो मनंददास पायन परे त्रन ले पानन ॥२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-055 | Pancham |
Aaye aaye hoe munn bhaavan kahaante bhorahi bhawan hamaare .. tum | आये आये हो मन भावन कहांते भोरही भवन हमारे ॥ तुम
कियो रतिसुख हमदियो अति दुख सांचे बोल तिहारे ॥ १॥| तुम कियो मधुपान
घूमत हमारो मन ऐसे कैसे बने प्राणप्यारे | अबतो सिधारो जहां रेन बसे तहां
गोविंदप्रभु पिय हमारे ।।२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-055 | Pancham |
Sufal bhayori singar kiyo mein piyason rati maani .. dhanya | सुफल भयोरी सिंगार कियो में पियसों रति मानी ॥ धन्य
घरी धन्य धन्य यह मुहुर्त जात जामिनी ॥ १॥ धन्य सुहाग भाग आजको सजनी
कृपाकी दृष्टि चित मो कामनी ॥ परमानंदस्वामी अरसपरस रस सानी ॥२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-055 | Malkos |
Kaba huun way aihein tum bolo merey hoe munn maani . | कब हूं वे ऐहें तुम बोलो मेरे हो मन मानी ।
उनने छल यह कीनो मोसों। अनत जाय रति मानी ॥ १॥
रसिकदास प्रभु हैं बहु नायक।
महाकपट की खानी ॥ २॥ | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-055 | Pancham |
Teree gati agaadh niranjan niraakaar narayan .. saptadvip | तेरी गति अगाध निरंजन निराकार नारायन ।। सप्तद्विप
सप्तखंड पर्वत मेरु धा रच्यो नारायन ।।९॥ तुही च ंद तुही सूरज तुही उडगन
निसके तारे तुही जल थल पवन तेज तुही धरनि आसमान ॥। तानसेनके प्रभु
घटघटमें करत गान अगमनिगम सकल सिष्ट धरत ध्यान ॥२॥। | Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14 | NityaPad-055 | Malkos |
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