top of page
Kirtan Title
Kirtan
Category
Book-Page#
Raag
Laal tum kinn sotan birmaaye ..
लाल तुम किन सोतन बिरमाये ॥ कोन त्रिया ऐसी तुम पाई रति धन बहुत कमाये ॥१॥ श्याम सुंदर तुव मुख उपर चुंबन चिन्ह जमाये ।। रसिक प्रीतम पिय जाओ जहां तहां आनंद उर न समाये ।२॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Malkos
Chadhchadhi akhiyaan tinn madhi pootari dekhayat cock padhisi |.
चढचढी अखियां तिन मधि पूतरी देखयत कोक पढीसी |। श्याम अरुन डोरे अछरसी पाटी मदन गढीसी ॥। १॥ मृग जे सबे लजाय निहारो मानो मीन पढीसी ॥ द्रजाधीस हम कछु कहेगी देखियत प्रेम बढीसी ।।२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Malkos
Buddy buddy ankhiyaan neendbhari ..
बडी बडी अँखियां नींदभरी ॥ लाल लाल डोरे कजरारी कोरे पियहिय माँझ गडी ॥।१॥ सोचत रेन चेनकी बातें पीक लीक छबि छाप गडी ॥२॥ गोविंदप्रभु पिय बचन कहतहें बहुबिध लाड लडी ॥३॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Malkos
Sono seetal lagyo sakhee ree mohi.. millerus sadaa prem atur
सोनो सीतल लाग्यो सखी री मोहि॥ मिलरस सदा प्रेम आतुर व्है चार जाम पिया जाग्यो ॥१॥ करि मनुहार बहोरि हों पठई अधर सुधारस माग्यों रसिक प्रीतम पिय वे बहुनायक तेरे प्रेम रस पाग्यो ॥२॥।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Pancham
Kanchuki key bund tarkar tute jaat dekhat madan mohan ghansyaamen ..
कंचुकी के बन्द तरकर टुटे जात देखत मदन मोहन घनस्यामें ॥ काहेकों दुराव करत हेरी मोसो ऊमगत ऊरज दुरत क्यों यामें | १॥ बदन कमलपर अलकाकल मानो खंजन मधुप लेत विस्त्रामें ॥। कृष्ण दास प्रभु गिरिधर नागर याही भांत लजावत कामें ॥२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Malkos
Raine basey hoe laal jaake taahike phir jaao ..
रेन बसे हो लाल जाके ताहीके फिर जाओ ।। सियरे हाथ जिन मोय लगावो पाय परो किन ताके ॥ १॥ खानपान भोजन सुध बिसरी चढ़यो रहत चित चाके॥ प्रभु कल्यान गिरिधर एते पर मोय करत कित नाके ॥२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Malkos
Syaam chaley lalach mein lapataane ..
स्याम चले लालच में लपटाने ॥ कोन त्रिया ऐसी तुम पाई नेना लख ललचाने ॥१॥ लंपट लोभी उड़त भंवर ज्यों मदन जाल अरुझाने ॥। जगन्नाथ कवि राय के प्रभु के लच्छन हम सब जाने ॥ २॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Malkos
Shyam achaanak aaye sajani phir paachhe kahoon bhaage.
श्याम अचानक आये सजनी फिर पाछे कहूं भागे। चोंक परी सपने में देखे बिमलवसन तन त्यागे ॥॥१॥ जरो यह नेना खुल गये मेरे पाये न ढिंय कहुं पागे ।। नंददास बिरहिन केसे जीये पंचबान उर लागे ॥२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-056
Malkos
Sodhen nhaay bethi peheripar bhushan jahaan phoolwari tahaan sukbat alaken.
सोधें न्हाय बेठी पेहेरिपर भूषन जहां फूलवारी तहां सुकबत अलकें। सो मास कलकरनख केससंभारत मानो उडगन में उडपति झलके ॥। १ विविध शुंगार लिए गडी पिय सखी भरिआये आनंद रति पति दलके ॥ हरीदास के स्वामी स्थामा कुंज बिहारी छबि निरखत लागत नहीं पलकें ॥२॥
Abhyang Aur Shringaar Darshan ( Shringaaar Se Shyan Sudhi)
NityaPad-057
Todi
Marjan curr kanchan choki parr bethi baandhat keshan jharori ruchir
मर्जन कर कंचन चोकी पर बेठी बांधत केशन झरोरी रुचिर भुजन की उपमा अनोपम ललित करन विच झलकत चूरोरी ॥ १॥| लाल जटितबेदीमाल विराजत तेसो ही फबि रह्योमांग सेंदूरी चतुर बिहारी पिय प्यारी के मुख पर वारों कोटिसरद ससिपूरोरी ॥२॥
Abhyang Aur Shringaar Darshan ( Shringaaar Se Shyan Sudhi)
NityaPad-057
Todi
Syaam tum neck nihaaro motan ..
स्याम तुम नेक निहारो मोतन ॥ ऐसे निदुर तुम कबके भये हो को त्रियनसों सो लाग्यों मन ॥१॥ में जान्यो कोऊ नवल नारने तुम्हें गहाय दीनोहे रतिधन ।। चतुर बिहारी गिरधारी वश करके मनभर भुजदे चुंबन ॥।२॥
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-057
Malkos
Kulhe kesari sheesh bunny ..|
कुल्हे केसरी शीश बनी ॥| कटि केसरी पिछोरा सोहत अद्भुत बान बनी ॥। १॥| अंग अंग भूखन छबिराजत हीरा मानिकमनी ॥। हरिदास प्रभु शोभा निरखत श्रीगोवर्धननाथ धनी ॥॥२॥
Kulhe
NityaPad-057
Bilawal

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page