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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Kahaanlo verno sundartai .. khelat kunwar kanak aangan mein
कहांलो वरनो सुंदरताई ॥ खेलत कुंवर कनक आंगन में नयन निरख सुखदाई ।। १॥। श्वेत कुलहि शिर स्थामसुंदर के बहुविध रंग बनाई ॥। मानों नवघन ऊपर राजत मघवा धनुष चढाई ॥२॥ श्वेत पीत अरू असितलालमणि लटकन भाल रुराई ॥ मानों असुरदेवगुरु सनि मिल भूमि सुत समुदाई ॥३॥ अतिसुदेश मनहरत कुटिलकच लोचन मुख सकुचाई ॥ मानोंमंजुल कंजकोशपर अलि अवली फिर आई ॥४॥ दूधदंत अधरन छबि अद्भुत अलपतलपजलझाई ॥ किलकत हसत दुरतप्रकटत मानो घनमे विद्युलताई ॥५।। खंडित वचन देतपूरणसुख अद्भुत यह उपमाई ॥ घुटुरुवन चलत उठत प्रमुदित मन सूरदास बलजाई ॥।६॥
Kulhe
NityaPad-057
Ramkali
Manjjan curry chitra chauki vegi pyaari juu sahchari chitra vichitra
मंज्जन करि चित्र चौकी वेगि प्यारी जू सहचरी चित्र विचित्र शुंगार करावत रतन जठित मनिन के आभूषन सोहत तापर सुहा सारी चुनिपहरावत ॥१॥ सोडस विधि अलंकार रूप जीवन गुन अपार अपनी उपमां कोआपु अंत न पावत ॥ मुरारीदास प्रभु जाल रंध्र अवबलोकत अति आतुर आतुलित छबि रई नेतिनेति निगम वनरानी को गावत ॥२॥।
Abhyang Aur Shringaar Darshan ( Shringaaar Se Shyan Sudhi)
NityaPad-057
Todi
Preetam pyaari adhar russ ghuntat ..
प्रीतम प्यारी अधर रस घुंटत ॥ रति धन संचित करी कमाई मदन फोज गढ लुंटत ॥ १॥ आलिंगन परिरंभन चुंबन नेन सेन गोला तहां छूटत ॥ चतुर बिहारी गिरधारी स्थाम नाम के बचन भेद सब खूटत ॥ २।।
Sheetkaal Khandita ( Mangal Shrungaar) - Maagshar Vad 14 Se Poosh Vad 14
NityaPad-057
Malkos
Kreedat manimraya anganrang...
क्रीडत मणिम्रय आंगनरंग॥। पीत ताफस्ताकी झगुली बनीहे कुलही लालसुरंग।॥। १॥ कटिकिंकिणी घोषविस्मित सखीधाय चलत बलसंग।॥। गोसुत पूंछ भ्रमावत करगहिं पंकरागसोहे अंग ॥२॥ गजमोतिन लरलटकन शोभित सुंदर लहरत रंग | गोविंदप्रभुके जु अंगअंगपर वारों कोटि अनंग ॥३॥
Kulhe
NityaPad-058
Dhanshree
Shobhit sthaamatan peet jhaguliya ..
शोभित स्थामतन पीत झगुलिया ॥ कुलही लाल लटकन छविबघना चलन सिखावत मैया ॥ १॥ डगमगात पग धरत मनोहर अतिराजत पेंजनियां।। यशुमतिमन प्रफुल्लित अति आनंदसों लेत बलैयां पुन पुनियां ॥२॥। किलक किलक करलेत ख्रिलोना प्रेममग्न हुलसैयां | अडबराय देखत फिरपाछे चलत घुटुरुवन धैया । ३॥। गोपवधू मुखकमलनिहारत लालन सबसुख दैया ॥। ब्रजलीला ब्रह्मादिक दुर्लभ गावत दाससदैया ॥४।॥।
Kulhe
NityaPad-058
Dhanshree
Khelat laal apane rasmagana ..
खेलत लाल अपने रसमगना ॥ गिरगिर उठत घुटुरुबन टेकत किलककिलक जननी उरलगना ॥|१॥ पायपैजनी ओर पनसूरा कटिकिंकिणी पहुंची जरीकंकना ॥। हारहमेल हसली ओर दुलरी कंठ सिरी लटकन छब्िबघना ॥२॥। कुलही लाल ओर पीत झगुलिया रिंगन करत नंदजू के अंगना॥ निरखत दासजायबलहारी चिरजीयो यशोदाको छगना ॥ ३॥।
Kulhe
NityaPad-058
Dhanshree
Aaj baney vrajraj kunwar baithe singhdwar nicus anga anga nava nava
आज बने ब्रजराज कुंवर बैठे सिंघद्वार निकस अंग अंग नव नव छबि वरणि नजाई ॥ अलक तिलक नासिकाजो कपोल लोलकुंडल छबि देखत लजावत कोटिकोटि रबि अरुण अधर दशननमें झाई ॥॥९॥ लटपटी विच पाग लालके पीतकुल्हे भर गुलाल लटकत सिर सेहरो बन्यो शोभा अधिकाई ॥। गोविंदप्रभुकी बानिक देखत विधकित सब ब्रजजन मन रूपरास गिरिवरधर सुंदर मणिराई ।।२॥
Kulhe
NityaPad-059
Nat
Mohan tilak gorochan mohan mohan lalaat atee raajai. mohan
मोहन तिलक गोरोचन मोहन मोहन ललाट अति राजै। मोहन सिर पर मोहन कुलही मोहन सुरंग अति भ्राजै ॥ ९॥ मोहन ख्रवन कुसुम जु मोहन कपोल अवतंस विराजै। मोहन अधर पुट पै मोहन मुरलि मोहन कल बाज ॥। २॥। मोहन मुखारबिंदपै झूमत मोहन अलक- अलि मधुकाजै। गोविन्द प्रभुनखसिख जू मोहन मोहन घोख सिरताजै ॥। ३॥।
Kulhe
NityaPad-059
Gori
Aaj baneri laalan girdhari yaa baanak parr balhari ..| champakbhari
आज बनेरी लालन गिरधारी या बानक पर बलहारी ॥| चंपकभरी कुल्हे सिर लटकत कुसुंबी पाग छबभारी | १॥ वरूहा पीत स्याम अंग पर अरगजा मोजे मोहे मनमथ मनुहारी ॥ योविंदप्रभु रीझी वृषभान नंदनी सोह कंचुकी छोरत भरत अंकवारी ॥२॥।
Kulhe
NityaPad-059
Nat
Mohan mohani sir paag.. bahot bhaant savaarat ruchikar sridama
मोहन मोहनी सिर पाग।। बहोत भांत सवारत रुचिकर श्रीदामा अनुराग॥१॥ स्याम एवेत सुदेश कुल्हे बनी विचविच फुलनलाग |। निरखत नेन सुहात सुभगता कृष्ण दास बड़ भाग ॥२॥
Kulhe
NityaPad-059
Kanharo
Aaj manmohan piya thaade singhdwar mohat vrajajan munn |. tesiya
आज मनमोहन पिय ठाडे सिंघद्वार मोहत व्रजजन मन |। तेसिय मोहन सिर पाग बनी तेसी कुल्हेसुरंग तेसिय बनी मालवन ॥। १॥| तेसीये कंठमणी तेसोई मोतिनहार तेसीये पीतवरणी ख़ुलीहें स्थामतन ॥ गोविंदप्रभुके जु अंग अंग पर वारफेर डारो कोटि मदन ॥।२॥
Kulhe
NityaPad-059
Nat
Shyam subhag tanjhaani ..
श्याम सुभग तनझांई ।। उमग चली प्रीत वरनी ते ताहु में अतिअंगराग शोभा कहियन जाई ॥१॥| लालपाग चौकरी बिराजत कुल्हे सुरंगढरकाई ॥ स्निग्ध अलक बीचबीच राखी चंपकली अरुझाई ॥।२॥ देखत्त रूपठगोरी सी लागत नेनन रहे अरुझाई ॥ गोविंद प्रभु सब अंग अंग प्रति सुंदरमणिराई ॥। ३।
Kulhe
NityaPad-059
Kanharo

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