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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Naachat gawat vanate aavat laal tiparo sees rahmo fabi .. | नाचत गावत वनते आवत लाल टिपारो सीस रह्मो फबि ॥
घनतन व सन दामिनी मानों कुंडल किरण निरख मोहे रवि ॥१॥
हित हरिबंस और शोभानिधि गौरज मंडित अलकनकी छबि ॥
श्याम धाम सरस्वती सकुच रही या बानिक वरणत को कवि ॥।२॥ | Tiparo | NityaPad-062 | Poorvi |
Chhabilo laal duhat thenu dhori .. | छबीलो लाल दुहत थेनु धोरी ॥
माथे कमलवरणको टिपारो ओढे पीतपिछोरी ॥१॥।
कहारी कहूं कछु कहत न आवे डारी कठिन ठगोरी ॥
कुमनदासप्रभु सुख गिरिधरको जब भेटूं भरकोरी ॥।२॥ | Tiparo | NityaPad-062 | Saarang |
Houn balihari aajki baanik parr. | हों बलिहारी आजकी बानिक पर।
एवेत काछ काछे नंदनंदन शवेत टिपारो सोहत सिर पर ॥१॥
नख सीख लौं सिंगार कहा कहौं जमुना पुलिन ठाड़े कदमतर।
सुधरराय' प्रभु बेनु बजावत मोहि लिये सब व्रजनार ॥२॥ | Tiparo | NityaPad-062 | Saarang |
Gayanke paachhepaachen nutber kaachhenkaachen banyohe tiparo aachho lalgiridharike.. | गायनके पाछेपाछें नटबर काछेंकाछें बन्योहे टिपारो आछो लालगिरिधारिके॥
धातुको तिलक किये बनी गुंजमाल हिये वनके शृंगार सब विपिन विहारीके ॥१॥|
नटवरवेष किये ग्वालमंडली संगलिये गावतबजावत देत कर तारीके ॥
गोविंदप्रभु बनते ब्रज आवतदोरदोर ब्रजनारी झांकत मध्य जारीके ॥२॥ | Tiparo | NityaPad-062 | Poorvi |
Aaj laltipare chhabi adhik bunny .! | आज लालटिपारे छबि अधिक बनी ।!
बिचबिच चारुसी खंड बिचबिच मंजूरीन्यू त बिराजनी ॥१॥
धेनुरेणु रंजित अलकावलि सगमगात सोथे सनी ॥|
मधुप यूथ उडकें बैठत सखी पारिजात अवतंसनी ॥२॥
अंगद वलय करमुद्रा खच्चित नग कटितटपीत काछें काछनी ।॥। ३॥|
श्रीवत्सलछाउरहा विशद सखी कंठलसत कौस्तुभमणी ॥४॥
त्रिभंगभवरी लेत सूखग्रग्रताधिमिधिमिकटि धुंग्धुंगनि ग्वाल ताल गत उघटनी ॥
गोविंदप्रभु त्रैलोक विमोहत नृत्यत रसिक शिरोमनी ॥।५॥॥ | Tiparo | NityaPad-062 | Gori |
Gopbundsang nrityat rung .. | गोपबुंदसंग नृत्यत रंग ।।
सारीगमपधनी अलाप करत रसउपजत तान तरंग ॥।१॥|
सीसटिपारो कटिलालकाछनी वनजु धातुचित्रित सुभग अंग॥।
गोविंदप्रभु त्रैलोक विमोहत वारफेर डारू कोटि अनंग ॥२॥ | Tiparo | NityaPad-063 | Gori |
Nirtate mohan rasik sakhan sahit grugg tata thei-thei tata thei | निर्तते मोहन रसिक सखन सहित ग्रग तत थेई-थेई तत थेई
तता। मृदंग धुम-ध्रुम ताल उपंग मिलि स्रुति देत मधुपगन मधुमता ॥। १॥
टिपारो सिर पीत लाल काछिनी बनी किंकिनी झुनझुनात गावत सुरसता ।
गोविन्द प्रभु गोप बालक संग जै जै जै करत प्रेम अनुरता ॥ २॥। | Tiparo | NityaPad-063 | Gori |
Giridhar aabat bunn tein ree ! sohein . | गिरिधर आबत बन तें री ! सोहें ।
पीत टिपारों सीस बिराजित, मनसिज कौ मन मोहेैं ॥१॥
गाँड़नि के पाछें- पाछें आवत हैं चलि री ! दिखाऊं
तोहैं).। छीतस्वामी' सब कौ चित चोरत मंद मुस॒कि जब जोहैं ।॥२॥॥ | Tiparo | NityaPad-063 | Nat |
Agra taktak dhumdhum shrandhram bhrandanan nirtyat rasikabar aavat godhan sanga . | अग्र तकतक धुमधुम श्रंध्र॑ं भ्रंदनन निर्त्यत रसिकबर आवत गोधन संग ।
लालकाछिनी कटिकिंकिणी पगनूपुर झझ झंझनन पीत टिपारो सिरखरोई सुरंग ॥।॥१।॥॥
उरपतिरपचंद चाल मुरलिका मृदंग ताल संग मुदित
गोपग्वाल गावत तान तरंग ||
ब्रजजन सबहरख निरख जयजय कहि कुसुम
वरषत गोविंदप्रभु पर बारू कोटि अनंग ॥२॥। | Tiparo | NityaPad-063 | Gori |
Banaten aavat mohanlal. sees virajit jatit tipaaraun, nutber-bheshu gopal..1.. | बनतें आवत मोहनलाल। सीस विराजित जटित टिपारौं, नटबर-भेषु गोपाल॥१॥
ग्वाल-मंडली-मध्य विराजित कूजत बेनू रसाल। सूनत स्वन
गृह-गृह के द्वारें आई सब ब्रजबाल ।।२॥
निरखि सरूप स्याम सुंदर कौ मिटी बिरह की ज्वाल ।
छीत-स्वामी' गिरिधरन रसिकवर मुसकि चले तिहि काल ॥३॥ | Tiparo | NityaPad-063 | Nat |
Sakal kalaa guna praveen arrie aeye vrindavan rung .| | सकल कला गुन प्रवीण एरी ए वृंदावन रंग ।|
सारीगमपधनी अलाप करत सरस ऊपजत अवधर तान तरंग ॥१॥
सीस टिपारो कटि लाल काछनी वनजी धात विचित्र सोहे सुभंग अंग ॥
गोविंद प्रभु के अंग अंग पर वारों कोटि अनंग ॥१॥ | Tiparo | NityaPad-063 | Saarang |
Banate baney maaee aavat nandanandan sheesh pagka | orey peet pichhoi | बनते बने माई आवत नंदनंदन शीश पगका | ओरे पीत पिछोई
रूप रात जदुपति जगवंदन संध्या समें खिरकके द्वारे अपने अपने भाव विरारत।
नंददास प्रभुको मुख निरखत त्रिविध ताप तनतें सब टारत ॥ २॥। | Paag | NityaPad-064 | Gori |
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