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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Syaam paag sirpech chandrika kalgi karanful chhabi bhaari . | स्याम पाग सिरपेच चन्द्रिका कलगी करनफूल छबि भारी ।
भाल तिलक लर॒ लटकन सोभित दुलरी दुगदुगी पोहोंची कर धरी ॥१॥ स्याम
हि सुन्दर स्थाम हि अलकें स्थाम बनी बेनी अति भारी । स्थाम ही भौंह सोहनी
बांकी स्थाम हि अंजन नेन रसारी ॥२॥ स्थाम कपोलन स्याम डिठोना स्थाम
वसन पर पीत किनारी। स्याम दूगनके तारे कारे स्थाम ही सुन्दर गिरिवरधारी ॥ ३॥॥
बाजुबंद मुद्रिका सोभित कटि किंकिनी नूपुर झनकारी | जुगल चरन अनबट
बिछुवा छबि पर कृष्णदास' बलिहारी ॥४॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-068 | Todi |
Kaare sthaam sujan manohar kaare baar kapol lagaaye .. karei | कारे स्थाम सुजान मनोहर कारे बार कपोल लगाये ॥ कारेई
नेंना कारोई अंजन कारी भोंह कमान चढाये ॥। १॥ कारी कामर कारी बंशी कारी
गईयन टेर सुनाये ॥ गोविन्द प्रभु की सोभा निरखत कालिन्दी तट कारी
छाये ।॥।२॥। | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-068 | Dhanshree |
Peere kundal peere nupur piro pitamber odhe thaadho .. peeri bunny | पीरे कुन्डल पीरे नूपुर पीरो पीताम्बर ओढे ठाढो ॥ पीरी बनी
कटि काछनी लाल की पीरोई छोर रच्यो पटि कारो ॥ १॥ पीरे मुकुट लकुट कर
सोहे पीरी खोर दीये छिन गारो ॥। गोविन्द प्रभु की सोभा निरखे पीरोई नन््दन
नन्द दुलारो ॥२॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-068 | Dhanshree |
Phool gulabi saaj atee sobhit taahi raajat balkrishna vihaari . | फूल गुलाबी साज अति सोभित ताहि राजत बालकृष्ण विहारी ।
फेंटा गुलाबी पिछोरा रहो फबि फूल गुलाबी रंग अति भारी ॥ १॥
बाम भाग वृषभान नंदिनी पहेरे गुलाबी कंचुकी सारी।
फूल गुलाबी हस्तकमल में छबि पर कुंभनदास बलिहारी ॥२॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-069 | Saarang |
Chamak aayo chandso mukh kunjate jaba niksi .. sunder saanvaro | चमक आयो चंदसो मुख कुंजते जब निकसी ॥ सुंदर सांवरो
किशोर ग्रोहन लाग रहे चकोर ललितादिक कुमुदावलि निरख नयन
विकसी ॥।१॥ पहिरें तन श्वेत सारी मानों शरद उजियारी मानों सुधासिंधु मध्य
दामिनी धसी।। कहत भगवानहित रामरायप्रभु प्यारी वशकीने कुंजविहारी छबि
निरख मंद हसी ॥२।। | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-069 | Bhairav |
Dhore mohan dhore sohan dhore sohan dhore chandan khor dusala. dhore | धोरे मोहन धोरे सोहन धोरे सोहन धोरे चंदन खोर दुसाला। धोरे
कडा कर हाथन सोहे धोरी सोहे गजमोतिन माला ॥ १॥ धोरो दधि बेचन जात
ग्वालनि जाय लुटाये नंदको लाला | गोविन्द प्रभुकी लीला बरनी धोरी सोहे
गल फूलन माला ॥।२॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-069 | Todi |
Chand badan parr chandani sohat ghoonghat koo putt maano swet saaree .. | चंद बदन पर चांदनी सोहत घूंघट को पट मानो स्वेत सारी ॥
पिय द्रग दोड चकोर पीवन को सोमानोविध सुहस्त संभारी ॥ ९।। प्रगट होत तब
हीते पिय हिय गई बिरह उजियारी ॥ अंचर दूरि करि गरे व्हे बाँहधर भेट रसिक
पिय प्यारी ॥२॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-069 | Lalit |
Nava nikunj key dwaare thaade karat shringar paraspar .. swet paag or | नव निकुंज के द्वारे ठाडे करत शृंगार परस्पर ॥ स्वेत पाग ओर
स्वेत पिछोरा मोतीनमाल विराजत उर पर ॥९॥ चंपक तन प्यारी पेहेरें स्वेत
सारी स्याम कंचुकी खुली हें अद्भुत तर | रसिक प्रीतम की वांनिक निरखत
लेत बलैया दोऊ करकर ॥२॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-069 | Lalit |
Baanke aasan baanke singhasana baanke takiyanaki | बांके आसन बांके सिंघासन बांके तकियनकी
छबि न्यारी ॥ बांके रासविलास बने अरु बांकी बनी राधा जू प्यारी ॥ १॥ बांके
मंदिर कंचनके अरु बांकी बनी ब्रजकी ब्रजनारी | गोविन्द देखत नेन ताकि रही
झुकि झरोखन बांके बिहारी ॥२॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-069 | Todi |
Balihari aajki baanik parr. shwet kaachh kaachhe nandanandan evet | बलिहारी आजकी बानिक पर। श्वेत काछ काछे नंदननंदन एवेत
टिपारो सोहत सीस पर ॥१॥ नख सीख लौं सिंगार कहा कहों जमुना पुलिन ठाड़े
हैं कदम तर।। सुघरराय' प्रभु बेनु बजावत मोहे सब ब्रज नारी नर ॥ २॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-069 | Saarang |
Bhalein paaudharen merey angana yashodake chhaganmagana ... | भलें पाउधारें मेरे अंगना यशोदाके छगनमगना ॥।
जो पगधरो मेरी अखियन पर हों बलबलजाऊ न्योछावरकरो हारचीर कंगना ॥। १॥|
कंठमाल सोहे नगन जटित मन मोहे पायन पेजनी सोहे खेलें दोऊ संगना ॥
कल्यानके प्रभु गिरिधरदेखें सुखभयो गयोदुःख दूरभयों मन लगना ॥२॥ | Sheetkaal ( Shringaar ke ) | NityaPad-070 | Todi |
Fenta amarasi dharey bhrukuti parr netra kamal nassa gajmoti. | फेंटा अमरसी धरे भ्रूकुटी पर नेत्र कमल नासा गजमोती।
भाल तिलक सिरपेच सीसफूल मोतिनमाल पहोची लर जोति ॥१॥
हँसत दसन जु दामिनी दमकत सुभग कपोल सोहे कंठपोती ।
कटितट छुद्रघंटिका नूपुर अरु नख छबि सोभित है जोति ॥ २॥
साज पिछोरा अमरसी सोभित श्वेत किनारी चमक ससि जोति |
जमुनाजल भर कंचनझारी पोहोपमाल सोई छबि बोहोति।।३॥
दरपन ले देखत दोऊ हँसमुख आरती वारत दीपक जोति ।
कुंभनदास प्रभुकी छबि निरखत रसना कहा कहैं छबि बोहोति ॥४॥ | Ghata ( Shringaar) | NityaPad-070 | Saarang |
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