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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Praatasmein uthh srivallabhanandanke guna gaauun ..|
प्रातसमें उठ श्रीवल्लभनंदनके गुण गाऊं ॥| श्रीगिरिधर गोविंदको नाम ले श्रीबालकृष्णजीकों शीश्ञ नाऊं॥ १॥| श्रीगोकुलनाथजीको प्रणाम करत श्रीरघुनाथजीकों देख नयनन सुख पाऊं ॥ श्रीयदुनाथ संग खेलत घनश्यामजू इनकी प्रीति हों कहांलो सिराऊं॥।२॥ यह अवतार भक्तहितकारण जो परमपदारथ पाऊं ॥| विनती कर मागत ब्रजपतिपें निशदिन तिहारो दास कहाऊं ।।३॥
Shree Gusainji
NityaPad-006
Bhairav
Srivitthalnathjuke charansharan ..|
श्रीविद्डलनाथजूके चरणशरणं ॥| श्रीवल्लभनंदनं कलिदु:खखंडनं पूरणपुरुषोत्तमं त्रयतापहरणं ॥१॥ सकलदु:खदारणं भवसिंधु- तारणं जनहितलीलादेहधरणं ॥ कान्हरदासप्रभु॒ सबसुखसागरं भूतलदृढभक्तिप्रकटकरणं ॥।२॥
Shree Gusainji
NityaPad-006
Bhairav
Srivallabh prabhu atee dayal deeje darshan kripal, deen zaan
श्रीवललभ प्रभु अति दयाल दीजे दरशन कृपाल, दीन जान कीजे आपनो दोष जिन विचारी। होंतों अपराध भर्यो धर्म सबे परहयों कीयो न कुछ भलोकाज जाहिचित्त धारो ॥ १॥ दूरि परें पल पल दुख पावत हो प्राणनाथ,तुमही ते होड़ हे प्रभु रसिक को निवारो ॥ मेरो पकर्यो हे हाथ बांध्यो पद कमल साथ हाथ, हों अनाथ ताहि भूल जिन विसारो ॥२॥
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-006
Bilawal
Srivitthalesh vitthalesh vivalesh kahi ray .
श्रीविद्डलेश विद्उलेश वि्वलेश कहि रे । इनके संबंध विना दृश्यमान वस्तुमात्र ताको तू जियमें कलेश कहि चहि रे ॥ १॥ रसना गुणरूपको निशवासर कर यह सुख निरंतर अहार जेसे लहि रे॥ श्रीविद्डलिशके श्रीवल्लभके पदको पराग पावे जहां तिनके तू दासनको दास भयो रहि रे ॥।२॥
Shree Gusainji
NityaPad-006
Bhairav
Gaauun srivallabhanandan key guna laauun sadaa munn angsarojan |.
गाऊं श्रीवल्लभनंदन के गुण लाऊं सदा मन अंगसरोजन |। पाऊं प्रेम प्रसाद ततछिन गाऊं गोपाल गहे चितचोजन ॥।१॥ नवाऊं शीशरिझाऊं लाल आयो शरण यह जो प्रयोजन ॥ छीतस्वामी गिरिधरन श्रीविद्डल छबि पर बारूँ कोटि मनोजन ॥२॥।
Gokulnathji
NityaPad-007
Ramkali
Jaya jaya jaya srivallabhanand .. sakalkala bundavanchand ...1..
जय जय जय श्रीवल्लभनंद ॥ सकलकला बुंदावनचंद ॥।१॥ वाणी वेद न लहे पार ॥ सो ठाकुर श्रीअंकाजीद्वार ॥ २॥ शेष सहस्रमुख करत उच्चार ॥ ब्रजजन जीवन प्राण आधार ॥३॥ लीला ही गिरिधार्‌यो हाथ ॥ छीतस्वामी श्रीविद्डलनाथ ।।४॥।
Shree Gusainji
NityaPad-007
Bhairav
Shree vidvalesh vitthallesh rasna rutt merrie ..
श्री विद्वलेश विद्ललेश रसना रट मेरी ॥ ग्रंथन को यह सार याहिते होत पार वारबार तोसों कहूं तुव हितकेरी । १॥ चाहे जो भलो तेरो कह्यो वेग मान मेरो भजि लें श्रीघोषनाथ धन्य जीवन तेरी ॥ जगनाजनको सहाय प्रेमपुंज सुयश गाय असत वात दूर करो विषया अरुझेरी ॥२॥
Shree Gusainji
NityaPad-007
Bhairav
Praatahi shree gokulesh gokulesh naam .
प्रातहि श्री गोकुलेश गोकुलेश नाम । सकल सुख निधान मान करत त्रिबिध दुःख की हान यह जिय जान भजो अष्टयाम ।॥।१॥ इन विना योग यज्ञ करत वैराग्य त्याग विविध भाँत नेम धर्म करत सब निकाम ।। निश्चय गहि चरण कमल भक्ति भाव हिये अमल गावत मुख निरख दास वारूँ कोटि काम ॥२॥।
Gokulnathji
NityaPad-007
Bhairav
Praatahi srigokulesh gokulesh gaauun ..
प्रातहि श्रीगोकुलेश गोकुलेश गाऊँ ॥ पूरण पुरुषोत्तम वपु धरे बदत त्रैलोकनाथ श्री विट्ठलेश नंदन निरखनयन सिराऊं ॥ १॥ श्री वल्‍्लभजू के शरण आये कलियुग के जेते जीव उद्धेरे समूह तिनहीं कहालों गिनाऊँ।। जे कबहूँक नामलेत तिनहूं को अभयदेत मांगत रघुनाथ दास निकट रहन पाऊँ ॥२॥।
Gokulnathji
NityaPad-007
Bhairav
Srigokulgamko pendo hii naan‍yaaro ..|
श्रीगोकुलगामको पेंडो ही न्‍्यारो ॥| मंगलरूप सदा सुखदायक देखियत तीन लोक उजियारो ॥१॥ जहां वल्‍लभसुत निर्भय बिराजत भक्तजनके प्राणनप्यारो ॥ माधोदास बल बल प्रतापबल श्रीविट्ठल सर्वस्व हमारो ॥२॥
Gokulnathji
NityaPad-007
Bhairav
Jaya jaya jaya srivallabhanandan.
जय जय जय श्रीवल्लभनंदन। सुर नर मुनि जाकी पदरजवंदन ॥। १ मायावाद किये जू निकंदन।॥। नाम लिये काटत भवफंदन ॥२॥। प्रकट पुरुषोत्तम चरचत चंदन ॥ कृष्णदास गावत श्रुतिछंदन ॥।
Gokulnathji
NityaPad-007
Bhairav
Praat samein shree vallabh sutako punya pavitra vimal yash gaauun...
प्रात समें श्री वललभ सुतको पुण्य पवित्र विमल यश गाऊं॥। सुंदर सुभग बदन गिरिधर को निरख निरख दोऊ नैन शिराऊं ॥ १॥ मोहन बचन मधुर श्री मुख के श्रवण सुनि सुनि हृदय बसातुं ॥। तनमन प्राण निवेदन यह विधि अपने को सुफल कहाऊं ॥ २॥ रहो सदा चरण के आगे महाप्रसाद उच्छिष्ट हों पाऊं॥ नंददास प्रभु यह मांगत है श्रीवल्लभ कुल को दास कहाऊं ॥ ३॥
Gokulnathji
NityaPad-008
Bibhaas

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