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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Dekhori gopal kahaanhe khelat ..
देखोरी गोपाल कहांहे खेलत ।। के गायन संग गये अगाऊके खिरक वछरू वन मेलत ॥| १॥ कहत यशोदा सखियन आगे परोस धरीहे थारी॥ भोजन आन करो दोऊभैया बालक सहेत मुरारी ।।२॥ ऐसी प्रीति पिता माताकी पलक ओट नहींकीजे ।। वारंवार दासपरमानं द हरिकी बलेया लीजे ।॥।३॥।
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-074
Dhanshree
Kahun akele paae preetam leey bethi way gopi god sikhwat chori miss aavogeh ..
कहुं अकेले पाए प्रीतम ले बेठी वे गोपी गोद सिखवत चोरी मिस आवोगेह ॥ सांमग्री धरि राखी छिनक पर भावे सो लीजिये यह तुमारी देह ॥ १॥ जनकोऊ ओर छिए यह बडो ताप दिए अकेले ही भोजन करो वरसावो मेह ॥ रसिक प्रीतम हम उराहने के मिस आवेंगी जसुमति के आगे तुम मन में मति दीजो छेह ॥२॥
Sheetkaal ( Shringaar ke )
NityaPad-074
Todi
Bhookho bhayo aaj mero baaro ..|
भूखो भयो आज मेरो बारो ॥| भोरही ग्वाल उराहनो लाई उठतहीं कियो पसारो ॥ १॥ पहिलेही रोहिणीसों कहिराख्यो तुर्तकरो जो नार॥ ग्वालबाल सब बोललये मिली बैठे नंदकुमार ॥ २। भोजन बेग लावो कछु मैया भूख लगी मोहि भारी ॥ आजु सवारे कछु न खायो सुनत हसी महेतारी ॥३॥। रोहिनी चितेरही यशुमति तनसिर धुनधुन पछितानी ॥ परोसों वेग बेर कित लावत भूखो सारंगपानी ॥।४॥ बहुव्यंजन बहुभांत रसोई षटरस किय प्रकार ॥। सूरस्याम हलधर दोऊ भैया और सखा सब ग्वार ॥५॥
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-074
Dhanshree
Bolat syaam yashoda maiya .
बोलत स्याम यशोदा मैया । अतिआनंद प्रेमरस उमगी हंसहंस लेत बलैया ॥१॥ उरअंचल श्रमजल पोंछत पुनपुन अपने हाथ ॥ भोजन करो लड़ेते मोहन सब ग्वालनके साथ ॥२॥ सुतमुखचंद विलोक सजलही इनहीं मित्र समाज ॥ परमानंदप्रभु परम मनोहर अतिविचित्र ब्रजराज ॥३॥।
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-075
Dhanshree
Neck gopalendijo tair ..
नेक गोपालेंदीजो टेर ॥ आज सवारे कियो न कलेऊ सुरत भई बडिवेर ॥१॥ ढूंढत फिरत यशोदामैया कहांकहांहो डोलत॥ यह कहि यो घर जाउ सांवरे बावानंद तोहि बोलत ॥२॥ इतनी बात सुनही आये प्रीतिजु मनमें जानी ॥ परमानंदस्वामी की जननी देखवदन मुसकानी ।। ३॥।
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-075
Dhanshree
Chalhu gopal bolat mehtari .. parosethar dharemag chitwat
चलहु गोपाल बोलत महतारी ॥ परोसेथार धरेमग चितवत नयनन आंसू डारी ॥१॥ विविध भांत पकवान मिठाई मेवा मिश्री ठानी ॥ रामदासप्रभु रसिक छबीलो ब्रजयुवतिन सुखदानी ॥२॥
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-075
Dhanshree
Bhojanko bolat mehtari | balsamet aao merey mohan baithe
भोजनको बोलत महतारी | बलसमेत आओ मेरे मोहन बैठे नंदपरोसी थारी ॥ १॥ खीर सिरात स्वाद नहिं आवे वेग ग्रास तुम लेहो मुरारी | हितवत चित्तनीकें कर जेंबो पाछें कीजे केलि विहारी ॥२॥ अहो अहो सुबल अहो श्रीदामा बैठो नेक करो मनुहारी ॥ परमानंददासकी जीवन मुख्यव्यंजन दे जाहुँ बलहारी ॥। ३॥।
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-075
Dhanshree
Premmagn bolat nandrani...
प्रेममग्न बोलत नंदरानी॥। अहो अहो सुबल अहो श्रीदामा ले आवहु किन टेर मृदुबानी ।|१॥ भोजनवार अबार जान जिय सुरतभई आतुर अकुलानी ॥ ढुंढत घर घर आंगन द्वारलों तनकी दशाहिरानी ॥। २॥ जननी प्रीति जान उठदोरे शोभितहें कच रज लपटानी ॥ परमानंद नंद नंदनको अखियां निरख सिरानी ॥। ३।।
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-075
Dhanshree
Yashumati thaar paros dharayathohe tuho bulaave chalo douu bhaiya ..
यशुमति थार परोस धरयथोहे तुहो बुलावे चलो दोऊ भैया ॥ बावानंदकी गोदबेठकें भोजनकरो हों लेहुं बलैया ।।१॥ पाछे करो केलि मनमोहन तुमको देहों बहुत मिठैया ॥ गोविंदप्रभु गिरिगाजधरन चले बैठी जहां यशोदामैया ॥२॥
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-076
Dhanshree
Batna gaee sthammanohar gaat ..
बत्न गई स्थाममनोहर गात ॥ तिहारो वदनसुधानिधि शीतल अचवत दृगन अघात ॥ १॥ पलक ओट जिन जाउ पियारे कहत यशोदामात ॥। छिन एक खेलन जात घोष में पल युग कल्प बिहात ॥ २॥ भोजन आन करो दोऊ भैया कुंवर लाडले तात ॥ परमानंद कहत नंदरानी प्रेम लपेटी बात ॥।३।।
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-076
Dhanshree
Jembat kaanh karat kilkari ..
जेंबत कान्ह करत किलकारी ॥ भर बुकटा मेलत मुखभीतर कर पकरत महतारी ।।१॥ फूक फूक दूध मुख लावत डारत बाहां उछारी तैसें ही चपल हरत सबको मन श्रीविद्डलगिरिधारी ॥२॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-076
Dhanshree
Nahaat nand sudhi karat sutanaki laavo boll kanhabalram ...
नहात नंद सुधि करत सुतनकी लावो बोल कान्हबलराम ॥। खेलत बडीवारक्यों लागी ब्रजभीतर काहुके धाम ॥ १॥ बैठे आय दोऊ मेरे संग विनभोजभयो निकाम ॥ यशुमति सुनत चली अतिआतुर ब्रज घरघर टेरत ले नाम ॥२॥ आज अवार भई कहुं खेलत बोललेहु हरिकों कोऊ वाम ॥ ढुंढफिरी नहिं पावत हरिकों अतिअकुलानी चितवत धाम ।।३॥| वार वार पछितातयशोदावासर बीतो भये युगयाम ।। सूरस्यथामकों कहूं न पावत बहुबालक देख्योइकठाम ॥॥४॥
Bhojan Bulayve ( Sheetkaal)
NityaPad-076
Dhanshree

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