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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Sutahi jimawat yashoda maiya ..
सुतहि जिमावत यशोदा मैया ॥ सानत कोर मधुर मृदु मीठो देमुख लेत बलैया ॥१॥ खेलनकों उठ उठ भाजत हें राखतहें बोहोरैया || आवो चिरैया आवो खुमरैया ग्वालिन लेत बलैया ॥२॥ तुम जेवों मिल संग लालके बहुविध ख्याल खिलैया ॥ श्रीविइलगिरिधर माताकी प्रीति कही नहिं जैया ॥ ३॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-076
Dhanshree
Jembat nand kaanad aeka thhoren ..
जेंबत नंद कानड एक ठोरें ॥ कछुक खात लपटात तुहूं कर बालकेलि रसभोरें ॥१॥ बरा वदनमें मेल्यो जबही मिर्च दशन टक टोरें ॥ तीक्षणलगे नयनभर आये खीजत बाहिर दोरें ॥२॥ फूक कपोलन देत रोहिणीलिये लगाय अंकोरें॥ सूरस्यामको मधुरे कोरदे कीने तात निहोरें ॥३॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-076
Dhanshree
Jenwat kaanh nandjuki kaniyaan.
जेंवत कान्ह नंदजूकी कनियां। कछुक खात कछू धरणि गिरावत छबि निरखत नंदरनियां ॥१॥| बरी बरा बेसन बहुभांतन व्यंजन विविधअगनियां ॥ आपन खात नंदमुख लावत यह सुख कहत न बनियां | २। आपुन खात खवबावत ग्वालन करमाखन दक्ि दुनियां ॥ सदमाखनमिश्रीमिश्रितकर मुख नावत छबिघनियां ॥ ३॥ जोसुख महरि यशोदा विलसत सो नहिंतीन भवनियां। भोजनकर अचवन जबकीनो मागतसूर जुठनिया ॥।४॥।
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-077
Dhanshree
Yeh tou bhaagya purush merimai ..
यह तो भाग्य पुरुष मेरीमाई ॥ मोहनकों गोदी में लीयें जेंबतहेव्रज़राई ॥१॥ चुचकारत पोछत अंबुज मुख उर आनंद न समाई ।। लपटेकरलपटात थोंद पर दुध लार लपटाई ॥२॥ चिबुक केश जब गहेत किलकके तबयशुमति मुसकाई || मागत सिखरण देरी मैया बेला भरके लाई ॥ ३॥ अंग अंगप्रतिअमितमाधुरी शोभा सहज निकाई ॥ परमानंद नारदमुनि तरसत घर बैठेनिधिपाई ।॥।४॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-077
Dhanshree
Jembat nand kaanh balbhaiya .. kankathar shuttrus bahuvyanjan
जेंबत नंद कान्ह बलभैया ॥ कनकथार षटरस बहुव्यंजन माखन दूध मिठैया ॥१॥ उठ भाजत सुतकेलिचावलख प्रफुल्लित यशुमति मैया ॥ ब्रजाधीशप्रभु सुख ब्रजजनको दृगनसुधा वरखैया ।॥।२॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-077
Dhanshree
Jembat nandgopal khijawat ..
जेंबत नंदगोपाल खिजावत ।। पहर पन्हैया बाबाजूकी निफ्ट निकट डरपावत ॥।१॥ ब्रजरानी बरजत गोपाले हरे हरे ढिंग आवत ॥! परमानंददासको ठाकुर पूत बावाको भावत ॥।२॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-077
Dhanshree
Bhojan kartahen gopal .. shuttrus dharey banaay yashoda saaje
भोजन करतहें गोपाल ॥ षटरस धरे बनाय यशोदा साजे कंचनथाल।॥। १॥ करत वियार निंहारत सुतमुख चंचलनयनविशाल ॥ जो भावेसो लेहो मेरे मोहन माधुरी मधुररसाल ।।२॥ जो सुख्र सनकादिक को दुर्लभ दुरदेखत ब्रजबाल ॥ परमानंददासको ठाकुर चिर जीयो नंदलाल ॥।३॥।
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-077
Dhanshree
Kyori tuun dwaare bollie aaya .... tero boll sunat mero mohan
क्योरी तूं द्वारे बोली आय ।॥। तेरो बोल सुनत मेरो मोहन भोजन कछू न खाय ॥१॥ दोर चले भींतरते बाहिर उखदूयो होतो पाय ॥ श्रीविद्ठलनंदरानी खीजत तेरोकछु न सुभाय ॥। २॥॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-078
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Lalco meethi kheer joe bhaave .. bella bhar bhar lawat yashoda
लालको मीठी खीर जो भावे ॥ बेला भर भर लावत यशोदा बूरो अधिक मिलाव ॥|१॥| कनिया लियें बशोदा ठाढी रुचिकर कोर बनावे | ग्वालबाल वन चरनके आगें झूठे हाथ दिखावे ॥२॥ ब्रजरानी जो चहूंधा चितवत्त तनमन मोद बढावे ॥ परमानंददासको ठाकुर हसहस कंठ लगावे ।।३॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-078
Dhanshree
Pandey bhog lagavan naan paaven ... karkar paak vahee arpatahen taba
पांडे भोग लगावन न पावें ॥। करकर पाक वही अर्पतहें तब तब तूं छुहि आवें।॥। १॥ में श्रद्धाकर ब्राह्मण न्योत्यो तू जो गोपाल खिजावे।। वह अपने ठाकुरहें जिवावत तूं योंही छुड़ आबे ॥२॥ तू यह बात न जानेरी मैया मोहे कित दोष लगावें॥ परमान्द बह नयन मूंदकें मोहीकों जु बुलावें ॥। ३॥।
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-078
Aasawari
Hari bhojan karat vinodason..|
हरि भोजन करत विनोदसों॥| करकर कोर मुखारविंद में देंत यशोदा मोदसों ॥१॥ मधु मेवा पकवान मिठाई दूध दह्लो वृत ओदसो ॥ परमानंदप्रभु भोजन करतहे भोगलग्यो संखोदकसों ॥। २॥
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-078
Aasawari
Mohan jenvatahainri avjinjabotiwari .. singhporte phir
मोहन जेंवतहैंरी अवजिनजाबोतिवारी ॥ सिंघपोरते फिर फिर आवत वरजीहे सोवारी ॥१॥ रोहिणी आदि निकस भई ठाडी देदे आड मुखसारी ॥ तुम तरुणी जो बनमदमाती एसीएदेखन हारी ॥ २॥। गरजत लरजत प्रतिउत्तदे कोऊ बजाबत तारी ॥ कुंभनदासप्रभु गोवरधनधर अबही बैठेथारी ।। ३॥।
Ath Sheetkaal ke bhojan
NityaPad-078
Aasawari

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