top of page
Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
|---|---|---|---|---|
Bhojan karat piya aru pyaari . | भोजन करत पिय अरु प्यारी ।
रंग महल में धरी अंगीठी परदा परे सुखक ारी ॥।१॥।
दोउ परस्पर लेत देत हे बहुविध कर मनुहारी।
रसिक प्रीतम प्रभु की यह लीला डारत तन मन बारि ॥ २॥ | Ath Sheetkaal ke bhojan | NityaPad-080 | Lalit |
Bhojankarat naval peeya pyaari ... | भोजनकरत नवल पीय प्यारी ॥।
नवल मेहेल नवरंग सिंघासन बेठे नवरंग नवल बिहारी ॥१॥
नवल थार नव खट रस बीजन परोसत नवल सखी ललीतारी ॥
अरस परस भ्रकुटी चितवन पर हीत हरीबंस जाय बलहारी ॥।२॥ | Ath Sheetkaal ke bhojan | NityaPad-081 | Nat |
Aaj hamaare jevo mohan soee kii jey nand raniju .. kahaa bhawan mein durr | आज हमारे जेवो मोहन सोई कि जे नंद रानिजु ॥ कहा भवन में दुर
जो रहे हो धर्यो दध ओदन पा निजु ॥१॥ बड़ी बेर की ऊठी बहु बेटी कोऊ भोरी
कोऊ स्यानि जु ॥ बो विध बिजन खाटे ऊर मिठे ले आई मन मानिजु ॥२॥ कहेत
रोहनि जसोधा आगें प्रेम लपेटी बानिजु ॥ सेनन में सब समुझ समुझके मनही
मन मुसक्यानिजु ॥३॥ बल दाऊ को टेर लेत हें केहे केहेः मधुरी बानिजु ॥
कुंभनदास प्रभु भोजन मेहेमां निग मन जात बखानिजु ॥४॥ | Ath Sheetkaal ke bhojan | NityaPad-081 | Nat |
Yashoda aeka boll joe paauun ..| | यशोदा एक बोल जो पाऊं ॥|
रामकृष्ण दोऊ तुम्हारे सुतको सखनसहित जिमाऊं ॥।१॥
जो तुम नंदर ायजीसो सकुचो तो हो उन्हे सुनाऊं ॥
जोपें आज्ञा देहो कृपाकर भोजन ठाट बनाऊं ॥। २॥।
जब बाके घर गये स्थाम घन अपनो भवन बतायो॥
परमानंद प्रेम भर उमगी घर बैठें पहुंचायो ।।३॥ | Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal) | NityaPad-081 | Dhanshree |
Raniju aeka bachan mohi deeje .. | रानीजू एक बचन मोहि दीजे ॥
पठवो सदन हमारे सुतकों कह्मो मान मेरो लीजे॥॥१॥
तब कछु नीकी सोंज बनावत तब घर जिय अकुलात॥।
अटक रहत तुम्हारे सुतपर इन बिन लियो नजात ।२॥।
निशदिन खेलो मेरे आंगन दर
नयननिरख सिराऊं॥ चतुर्भुज प्रभु गिरिधरन छेलको हंसहंस कंठ लगाऊं ॥। ३॥ | Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal) | NityaPad-081 | Dhanshree |
Laadali or laal jenwat douu .. | लाड़ली ओर लाल जेंवत दोऊ ॥
रतन जटित चोकी धरी सनमुख तापर कंचन थार रहे लस ॥। १॥
मधु मेवा पकवान मिठाई पुरी दुध मलाई प्यारी
सेहेत हरी जेवन बेठे राधघदास बलजाई ॥॥ २॥ | Ath Sheetkaal ke bhojan | NityaPad-081 | Nat |
Jembat ramkrishna douu bhaiya janani jasonda jimaveri | vyanjan | जेंबत रामकृष्ण दोऊ भैया जननी जसोंदा जीमावेरी | व्यंजन
मीठे खाटे खारे स्वाद अधिक उपजावेरी ॥१॥ करत व्यार चहुं ओर सहचरी मधुर
बचन मुख भाखेरी ॥ परमानंद प्रभुमाता हितसों अधिक परम रस चाखेरी ॥२॥ | Ath Sheetkaal ke bhojan | NityaPad-081 | Dhanshree |
Gopavadhu apani sonjh banaai .. runakjhunak tyontyon dhing aavat | गोपवधू अपनी सोंझ बनाई ।। रुनकझुनक त्योंत्यों ढिंग आवत
नूपुर शब्द सुहाई ॥१॥॥ कोऊ ठाढी श्रीमुखचितवत आनंद उर नसमाई ॥
व्यंजन परीठे खाटे खारे जेंबत हरि नअघाई ।।२॥ कोऊ कहत अवके कब मिलहो देओ
संकेत बताई ॥ प्रभुकल्याण ब्रजजनको जीवन गिरिधर सब सुखदाई ।।३॥। | Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal) | NityaPad-082 | Saarang |
Parosat gopi ghoonghatmaaren.. kanak latasi sundarsima aaeehen jyon | परोसत गोपी घूंघटमारें।। कनक लतासी सुंदरसीमा आईहें ज्यों
नारें ॥१॥| झनक मन आंगनमें डोलत लावण्य मोर सवारें॥ नंदराय नंदरानीते
दुरलालेंभलें निहारें॥ २॥ घरकी सोझ मिलाय थार में आगें ले जब धारें।। परम
मिलनियां मोहनजूकी हांसी मिष हुंकारें ।३॥| रुचिर काछिनी जटित कोधनी
जूरावांह उधारें॥ परमानंद अवलोकन कारण भीर बहुत सिंघद्वारे ॥४॥। | Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal) | NityaPad-082 | Todi |
Jembat douu rangbhare | chyaar bhantke vyanjan aaney khatras | जेंबत दोऊ रंगभरे | च्यार भांतके व्यंजन आने खटरस
रुचिर्करे | १॥ गोपीजनके म ंडल राजत लोकवेद विसरें।। सकलमनोरथ पूरक
नंदनंदन प्रतिप्रति रूपधरें॥। ९ वासरकेलि मुदित गिरिधारी सुखविलसत सगरें।॥
लालदास प्रभु यह विधि क्रीडत भोजन अखिल करें ॥ ३॥ | Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal) | NityaPad-082 | Todi |
Chitra saraahat chitwat murmur gopi bahut sayani ..| tuck jhakmein | चित्र सराहत चितवत मुरमुर गोपी बहुत सयानी ॥| टक झकमें
झुक वदन निहारत अलक संवारत पलक नमारत जान गई नंदरानी ॥ १॥ परगये
परदा ललिततिवारी कंचनथधार जब आनी ॥ नंददास प्रभु भोजनघरमें उरपर
करधरयो बे उतते मुसकानी ।। २॥। | Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal) | NityaPad-082 | Todi |
Kachhu bhulgaihon parosat firlai musakaai .. jhoothe miskar | कछु भूलगईहों परोसत फिरलाई मुसकाई ॥ झूठे मिसकर
आयो चाहत सोतो सांची भईहो लालरी झरहेत केंहभाई ॥१॥ जो भूलीसो
लाई अधिक छबि अरसाय आउऊें बनाई ॥ वूंदाबनचंद सुखदेवेको चतुराईहो
जनाई ॥२॥ | Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal) | NityaPad-082 | Aasawari |
bottom of page
