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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aaj gopal paahune aaye nirkhe nayan aghaayarin ..
आज गोपाल पाहुने आये निरखे नयन अघायरीं ॥ सुंदरवदन कमलकी शोभा मोमन रह्ोहे लुभायरी ॥१॥| के निरखूं के टहलकरूं एको नहिं बनत उपायरी ॥| जैसे लता पवन वश द्रमसूं छूटत फिर लपटायरी ॥॥२॥। मधुमेवा पकवान मिठाई व्यंजन बहुत बनायरी ॥ रागरंग में चतुर सूरप्रभु केसे. सुख उपजायरी ॥। ३॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-082
Dhanshree
Parosat pahuni tyo naari .. jenwat ramkrishna douu bhaiya
परोसत पाहुनी त्यो नारी ॥ जेंवत रामकृष्ण दोऊ भैया नंदबावाकी थारी ।। १॥| मोही मोहनकी मुख निरखत विकल भई अतिभारी ॥ भूपर भात कोरें भई ठाढी हसत सकल ब्रजनारी ॥२॥ के याहि आंच हियेंकी लागी नवजोवन सुकुमारी ॥ परमानंद यशोमति ग्वालिन सेनन बाहिर टारी ॥३॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-083
Saarang
Jenwat srivrishbhanandini kaanhakunvarki parchhaai .. jodd jodd
जेंवत श्रीवृषभाननंदिनी कान्हकुंवरकी परछाई ॥ जोड़ जोड़ व्यंजन भावत रुचिसों सोड़ सोइ सब ललिता लेआई ॥।१॥ हितसों जिमावत मोहन प्यारो मधुमेवा पकवान मिठाई।॥। अतिअनुराग बढ्योजु परस्पर द्वारकेश तहां बलबल जाई ॥२॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-083
Saarang
Gwalan karate core chhudawat.. jootho lait sabanke mukhate apane
ग्वालन करते कोर छुडावत॥ जूठो लेत सबनके मुखते अपने मुख लेनावत ॥।९॥ खटरसके पकवान धरे सब तामें रुचि नहिं आवत || हाहा करके मांग लेतहें कहत मोहि अतिभावत ॥। २॥। यह महिमा यह पन जानत जाहे आप बतावत ॥ सूरस्याम स्वपने नहिं दरसत मुनि जन ध्यान लगावत ॥ ३॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-083
Saarang
Kahat pyaari radhika aheer. aaj gopal paahune aaye parosi
कहत प्यारी राधिका अहीर। आज गोपाल पाहुने आये परोसि जिमाऊं खीर ॥१॥ बहुतप्रीति अंतरगतिमेरें पलक ओट दुःख पाऊं ॥ जानत जाउ संगगिरिधरके संग मिले गुणगाऊं ॥२॥ तिहारो कोऊ बविलगनमाने लरकाईकी बात ॥ परमानंदप्रभु भवनहमारे नित उठ आवो प्रात ॥३॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-083
Saarang
Douu mill jemat kanchan thaari | madhumeva pakwan mithaai parosatahe
दोऊ मिल जेमत कंचन थारी | मधुमेवा पकवान मिठाई परोसतहे ललितारी || १॥ भोजन करत छहो रससो मिल सुन वृषभान दुलारी ॥| अचवनको यमुनाजल सीतल कनक रत्न जरी झारी ॥२॥ अतिसुगंध कपूर लोग युत प्रीतिसो रुचिर सवारी ॥ हस मुसकाय दशन खंडित बीरी सूरदास बलहारी ।।३॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-083
Saarang
Bhojan keeje mohanlal .. bhaanti bhaanti key vinjan keene
भोजन कीजे मोहनलाल ॥ भांति भांति के विंजन कीने रसिक रसिली बाल || १॥ परोसत ही अधिक छवि उपजत बोलत बचन रसाल |। चितवन में तनमन धन दीनो मोहन मदनगोपाल ॥ २॥। अतिही सुख बिलसे बहु भांतिनसों भावे परम रसाल ॥ श्रीविद्ल गिरिधर मुख निरखत अखियां भई निहाल ॥।३॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-084
Aasawari
Jasoda pende pende dolle .. thah grihakaaj unein suta koo darr duhu
जसोदा पेंडे पेंडे डोल्ले ॥ थह गृहकाज उनें सुत को डर दुहु भांतिन मन तोले ॥१॥ अबहु कुंवर तुम भोजन कीजे जननी रोहिनी बोले ॥ परमानंद प्रभु वह फिर चितयो आनन्द हृदे कलोले ॥२॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-084
Dhanshree
Mill jemat ladili laal douu khata vinjan chaaru sabey sarse hathh
मिल जेंमत लाडिली लाल दोऊ खट विंजन चारु सबे सरसे हठ के मनमोहन हेरि रहे निज हाथ जिमायन को तरसे ॥ १।। करकंपत बीच हि छूटि परयो कबहूंक मास मुखलों पर से मनरसको रस जो उपज्यो सुख माधुरि कुंज सदादरसे ॥।२॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-084
Saarang
Leuu balaay ladile teree bhojanakon kitt karat awaar...
लेऊ बलाय लाडीले तेरी भोजनकों कित करत अवार॥। गाल लगाय कीयो मुख चुम्बन आतुरताई परोसी थार |। १॥। नंदबाबा समझावत मोहन करत बालकेलि सुखसार | गोविन्द प्रभु रसिक गिरिधर पिय व्रजसुखदाई नंदकुमार ।। २॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-084
Aasawari
Hari hii bulaavo bhojan karat... khelat vaar bhaee manmohan giri
हरि ही बुलावो भोजन करत।॥ खेलत वार भई मनमोहन गिरि गोवर्द्धनधरन ॥ १॥। बेठे नन्‍्द बाट चाहत हे ताती खीर सिराय ॥| बालक सकल संग ले आयो कहत जसोदा माय ॥३॥ आज दूध रंधन अधिकाई सुनहो कुंवर कन्हाई ॥ परमानन्द प्रभु बल समेत तुम बेग चलो उठ धाई ॥ ३
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-084
Dhanshree
Jenwat rangmahal giridhari .. saribran jugal kanakchoki dhari
जेंवत रंगमहल गिरिधारी ॥ सरिब्रन जुगल कनकचोकी धरि उपर कंचन थारी ॥ १॥| ललिता ललित परोसती रुचिसों दोऊ जन मन रुचिकारी । प्रीतत भरी सखी जल जमुना आन धरी जुग झारी ॥२॥ मंद मंद मृदु गावत सहचरी सुन्दर सब धुनि न्यारी ॥ चहुंदिस द्रमलता मन्दिर पर कूजत सुक पीक सारी ॥ ३॥ कर अचवन प्रभु नवल बिछावे बेठे ही रस भारी ॥ रच बीरी कर दे परमानन्द हरख जाय बलिहारी ॥।४॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-084
Saarang

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