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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Purohit aayo nrip key dwaare. jagsumati atee anand mudit munn
पुरोहित आयो नृप के द्वारे। जगसुमति अति आनंद मुदित मन आसन पै बैठारे।। पिता-सदन कुल- प्रोहित मानति दोऊ कर चरन पखारे। तेल लगाइ दंतधावन करि नहाड़ बसन तन धारे ॥ कर्यो पाक प्रोहित अपनी रुचि विंजन विविध नियारे। करि सामग्री भोग समरप्यो बात करत हरि बारे ॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-085
Aasawari
Gwalini firi key vechi dahyo ..
ग्वालिनी फिरि के वेचि दह्यो ॥ तेरो बोल सुनत मोरी मोहन हाथ ही कोर रह्यो ज्यों ज्यों उर अंचल सो ढांपत त्यों त्यों मरम लह्ों ॥ परमानंददासको ठाकुर अचराधाय गद्ो ॥ २॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-085
Aasawari
Piyahi jimawat maval kishori ... rahein sikhiran rahent pukhdet
पियही जिमावत मवल किशोरी ॥। रहें सिखीरन रहेंत पुखदेत मधुर जब चिते हसत मुखमोरी ।। १॥। छिन छिन प्रीति प्रबल प्रीतम उर प्रीया प्रेम झलकोरी ॥ यह सुख सदा सखी विलसत परमानंददास बलहोरी ।। २॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-085
Dhanshree
Harikon terat haye nandrani .. bahut verbhai kahunkhelat kahaan raho
हरिकों टेरत हे नंदरानी ॥ बहुत वेरभई कहुंखेलत कहां रहो सारंग पानी ॥१॥ सुनत ही टेरि दोरितव आए कबके निकसे लाल ॥ जेंमत नहीं नंद तुम ही विनु वेगि चलो गोपाल ॥।२॥ स्थामहिल्याई महेरिं जसोदा तुरत ही पाव पखारे ॥ सूरदास प्रभु संग नंदके बेठे दें दोऊ बारे ॥ ३॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-085
Dhanshree
Ranijsodajinen khole baitho sunder vrajanon naath ray..
राणीजसोदाजीनें खोले बैठो सुंदर व्रजनों नाथ रे।। भोजन- करताएं ने डीठोजेनो जूठोहाथरे ॥१॥ वालेमरिभूषण सघला एंठाकीधा अंगेबलगोभातरे ॥ रमवाने कारणे उठता जननीऐभीडीबाथरे ॥२॥। मरकलडाते मुखनां जोतां गोपी जन नो साथ रे।। रसिकराय आनंदे गाये गोविंदना गुन गाथरे ॥ ३॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-085
Aasawari
Jehon dulhe laal dulhaiya .. bahu vidhi saak sudhaare binjan or
जेहों दुल्हे लाल दुल्हैया ॥ बहु विधि साक सुधारे बिंजन ओर बनायो घैया ॥|१॥| कंचन थार कंचन की चोकी परोसत मोद बढैया ।। ठाडी पवन करत्त रोहिनी लेत बारने मैया ।| २॥ करि अचबन मुख बीरी दीनी आनन्द उर न समैया।। लाल लाडिली की छबी ऊपर परमानन्द बल जैया ॥।३॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-085
Jetashree
Bhojan bhalee bhaant hari keeno ..
भोजन भली भांत हरि कीनो ॥ खट रस व्यंजन मठा सलोना मांगमांग हरि लीनो ॥ १॥ हसत लसत परोसत नंदरानी बालकेलि रस भीनो ॥। परमानंद उबरद्यो पनवारो टेर सुबलको दीनो ॥२॥
Bhog Saraye
NityaPad-086
Dhanshree
Bhojankar uthhe douu bhaiya ..
भोजनकर उठे दोऊ भैया ॥ हस्त पखार सुद्ध अचमन कर बीरी लेहु कन्हैया ॥१॥ मातयशोदा करत आरती पुनपुन लेत बलैया ॥ परमानंददासको ठाकुर ब्रजजन केलि करैया ॥२॥
Bhog Saraye
NityaPad-086
Dhanshree
Leuun vabalaay ladile teree bhojan koo kitt karat awaar garein
लेऊं वबलाय लाडिले तेरी भोजन को कित करत अवार गरें लगाय कीयो मुखं चुंबन अति आतुर व्हे परोसत थार।। १॥ नंदबाबा संग जेंबत मोहन करत वाल केलिसुखसागर गोविंद प्रभु गिरिराज धरन पिय ब्रज सुखदाई नंदकुमार ॥२॥
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-086
Dhanshree
Roochi soun jebat jugalkishore ..
रूचि सों जेबत जुगलकिशोर ॥ होसविनोदकरत हैं बहुविधि देत परस्पर कोर ॥ १॥ जो भावे सो लेत हैं दोऊ ललितादिक त्रनतोर ॥ सूरदास यह सोभा ऊपर देत हें प्रान अकोर ॥२॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-086
Dhanshree
Sunder varr bhojan karat dikhaae
सुंदर वर भोजन करत दिखाए विविध भांति देत सबन को ओरन को दहकाए॥| १॥ कोऊ हँसत कोऊ तारी बजाबत कोऊ उठत हँसिगाय मरानंदास देखत यहू लीला कोटि मदन मुरिझाय ॥।२॥।
Shree Vraj Bhaktan ke Bhojan (Sheetkal)
NityaPad-086
Dhanshree
Khambhaki ojhal thaadho subal praveen
खंभकी ओझल ठाढो सुबल प्रवीण सखा करमें जटितडबा वीरासों भरथो जेमतहेंरी मोहन ।। परदापरे तिवारी तीन्यो तामध्य झलकत अंग अंग रंग सोहन ॥ १॥ जाहीको देखत रानी ताहीको उठतझुक कोऊ नहीं पावत समयो जोहन ॥ नंददासप्रभु भोजनकर बैठे तब में दईरी सेन पान खाये आंवन कहयोरी गोहन ॥२॥।
Bhog Saraye
NityaPad-086
Todi

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