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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Paan khawawat curr curr beeri .. | पान खवावत कर कर बीरी ॥
एकटक व्हे मोहन मुख निरखत पलकन परत अधीर ी ॥ १॥॥
हसत निहारत वदन स्थामको तनकी सुधबिसरी ॥
रसिकप्रीतमके अंग संग मिल छतियां भई अतिसीरी ॥२॥ | Beeri | NityaPad-087 | Dhanshree |
Huzz achman keejiye kripanidhan | | हज अचमन कीजिये कृपानिधान |
यमुनोदक कंचन झारी भरलाई चंद्रावली सुजान ॥१॥
पनवारों भक्तनकोंदीजे नारद तुंबरगान ॥
जेंबत युगल उठे जो परस्पर गावत जनकल्यान ॥। २॥। | Bhog Saraye | NityaPad-087 | Dhanshree |
Sub bhaanti chhabili kanhaki .. | सब भांति छबीली कान्हकी ॥
नंदनंदनकी आवन छबीली मुख छबि बीरी सुपानकी ॥१॥
अलक छबीली तिलक छबीलो पाग छबीली सुबानकी ||
भ्रोह छबीली दृष्टि छबीली सेन छबीली सुमानकी ।॥।२॥।
चरनकमलकी चाल छबीली शोभा अंग सुठानकी ॥
परमानंदप्रभु बेन छबीलो
सुरत छबीली सुगान की ॥३॥ | Beeri | NityaPad-087 | Dhanshree |
Achavan karat ladili laal. | अचवन करत लाडिली लाल।
कंचन झारी गहत परस्पर श्री राधा गोपाल ॥|१॥
जलमुखलेत हसत हसावत देख सखीन की ओर |
राधा माधो खेलत रसभर श्रीभट करत विचार ॥२॥ | Bhog Saraye | NityaPad-087 | Dhanshree |
Aaroge giridharilal shayaane. | आरोगे गिरिधारीलाल शयाने।
बहुविद पाक मिठाई मेवा दूध दहि पकवाने॥
अचावावते हैं जशोदा मैया शीतल जल गोपाल अघाने।
परमानंद प्रभु भोजन कर बैठे तब बिरीलेहु रुचीमाने। | Bhog Saraye | NityaPad-087 | Dhanshree |
Bhojan curr mohan koo achwat leey raadhe kanchan kii jhaari. | भोजन कर मोहन को अचवत ले राधे कंचन की झारी।
यमुना जल भर के लाईं अपने कर तातो कर प्यारी ॥१॥
ठंडो जल ले आन समोयो अचवन करत हसतगिरिधारी ॥
धोंधी के प्रभु श्रीमुख्व पोछन अंचर मुसकत सकुमारी ॥२॥। | Bhog Saraye | NityaPad-087 | Dhanshree |
Baabaa aaj bhookh atee laagi. | बाबा आज भूख अति लागी।
भोजन भयो अघानो निकेतूर्पत होय रुची भारी ॥ १
अचवन कर यमुनोदक लिनो मुर ज्ञभांत पल लागी।
भोज अंत शीत लागे परमानंद दिजे मेरी आंगी | २।॥।
| Bhog Saraye | NityaPad-087 | Dhanshree |
Beeri khabawat sthaamahin pyaari .. paake paan peere sundartabharettego | बीरी खबावत स्थामहिं प्यारी ॥ पाके पान पीरे सुंदरताभरेततेगो
सरस संव ारी ॥॥९॥ काथा चूना लॉग इलायची कपूर सरस उज्वल सुपारी ॥।
जावत्री फल मृगमद सौर सबे सजलाई बहु रुचिकारी | २॥ खाय खवाय दोऊ
परस्पर रसभरे नयन कमल मनुहारी ॥ आनन उडुपति अधरबिंब फल रसना पर
बलहारी ॥३॥ उभय सिंघासन मिलके बैठे कामकेलि क्रीडत सुखकारी ॥।
इंद्रनीलमणि हारबन्योहे माधोप्रभु श्रीगोवरधनधारी ॥४॥ | Beeri | NityaPad-088 | Dhanshree |
Kihin miss yashomatihiken jaauun .. | किहिं मिस यशोमतिहीकें जाऊं ॥
सकलसुखनिधि- मुखअबलोकूं नयननतृषा बुझाऊं ॥। १॥॥
द्वारआरज सभाजुरीहे निकसवेनहिंपाऊं विनागयेपतिब्रतछुटे हसेगोकुलगाऊं ॥२॥
स्थाम गात सरोजआनन- मुदितलेलेनाऊं |
सूरहिलगनकठिनमनकी कहीकाहि सुनाऊं ॥।३॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-088 | Ramkali |
Tumakunteratahaiju kaanh .. gorisi bhorithore dinanaki | तुमकुंटेरतहैजू कान्ह ॥ गोरीसी भोरीथोरे दिननकी
कछुएकवेसउठान ॥१॥
छूटी अलकलालपट ओबंदढेंनागरीचतुरसुजान ॥
कहाकहूंमुखअंबुजशोभा मानों उग्यो भान ॥२॥
बंसीवटकी ओरगईहे
रसिकशीरोमणिजान। सूरदासप्रभुमिलवेकों आईभईनईपहेचान ।। ३॥। | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-088 | Ramkali |
Sakhiri mohi haridarshan kii chaay .. sambaresonpreeti | सखीरी मोहि हरिदरशन की चाय ॥ सांबरेसोंप्रीति
बाढीलाखलोगरिसाय ॥।१॥
स्यामसुंदरलोललोचन देख मन ललचाय |
सूरहरिके रंगराची सीसरहा केंजाय ॥।२।। | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-088 | Ramkali |
Beeri arogat giridharlal .. | बीरी अरोगत गिरिधरलाल ॥
अपने करसो देत राधिका मोहनमुखमें मधुर रसाल ।। १॥
ज्योंज्यों रुचि उपजावत उर अंतर त्योंत्यों परस्पर करत विहार।।
कबहु देत दशन खंडित कर कबहुं हसकर देत उगार ॥ २॥।
सहचरी सब मिल अंतरी न राखत हीये आनंद अपार ।।
जय जय कृष्ण जय श्री राधे यश गावत परमानंदसार ॥। ३॥। | Beeri | NityaPad-088 | Dhanshree |
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