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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Praat samein shree vallabhasutake vadan kamal koo darshan keeje ..
प्रात समें श्री वललभसुतके वदन कमल को दर्शन कीजे ॥ तीन-लोक-बंदित पुरुषोत्तम उपमाहि पटतर दीजे ।।१॥ श्रीवल्लभकुल उदित चंद्रमा यह छबि नयन चकोर पीजे ॥ नंददास श्री वललभसुत पर तनमनधन न्योछावर कीजे ॥२॥।
Gokulnathji
NityaPad-008
Bibhaas
Praatasmein srimukh dekhanko sevakjan thaade singhdwar . jaya
प्रातसमें श्रीमुख देखनको सेवकजन ठाडे सिंघद्वार । जय जय जय श्रीवल्लभनंदन दरशन दीजे परमउदार ॥ १॥ सौभगसीमा सुंदरता शोभा मेघगंभीर गिरा मृदु धार ॥ निरखत नयनन मोह्यो मनन्‍्मथ श्रवणन सुनत वचन अपार ॥२॥ नयनमंगल श्रवणन मंगल यश पुरुषोत्तमलीला अवतार ॥ जन भगवान पिय कुंजविहारी अगणितमहिमा अगम अपार ॥। ३॥
Gokulnathji
NityaPad-008
Bibhaas
Praat samein srivallabh suta koo uthtahin rasna leejiye naam ..
प्रात समें श्रीवललभ सुत को उठतहिं रसना लीजिये नाम ॥ आनंदकारी प्रभु मंगलकारी अशुभहरण जनपूरणकाम ॥| १॥ याहि लोक परलोक के बंधु को कहि सके तिहारे गुण ग्राम ॥। नंददास प्रभु रसिक शिरोमणि राज करो श्री गोकुलसुखधाम ॥२॥।
Gokulnathji
NityaPad-008
Bibhaas
Visad sujas srivallabh sutkau, praatah uthat nita anudin gaauun.
विसद सुजस श्रीवल्लभ सुतकौ, प्रातः उठत नित अनुदिन गाऊं। कलिमल-हरन चरन चित धरिके, उपजै परम सुख दुःख बिसराऊं ॥ भक्ति भाव अरू, भक्तनि कौ रस, जानें मान तिनहिं को ध्याऊं। छीत-स्वामी' गिरिधारीजू के सुमिरत, अष्ट सिद्धि, नव निधि को पाऊं॥
Gokulnathji
NityaPad-008
Bibhaas
Merey kulkalmash sabahi naase dekh prabhaat prabhakarkanya ...
मेरे कुलकलमष सबही नासे देख प्रभात प्रभाकरकन्या ॥। वे देखो पाप जात जिततितते ज्यौं मृगराज देख मृगसन्‍्या ॥१॥ पोषत दे पयपान पुत्रलों हे जगजननी धन्य सुधन्या ॥ दियो चाहे गदाधरहुकों चरनकमलनिजभक्ति अनन्या ॥२॥ '
Shree Yamunaji
NityaPad-009
Bibhaas
Douu coole khambh tarang seedhi sriyamuna jagat baikunthanishreni ..
दोऊ कूल खंभ तरंग सीढी श्रीयमुना जगत बैकुंठनिश्रेनी ॥ अति अनुकूल कलोलनके भर लियें जात हरिके चरणन सुखदेनी ॥१।। जन्मजन्मके पाप दूरकर काटत कर्मधर्मधारपैनी । छीत-स्वामि गिरिधरजूकी प्यारी सांवरेअंग कमलदलनैनी ।।२॥॥
Shree Yamunaji
NityaPad-009
Bibhaas
Deen zaan mohi deeje yamuna .. nandkumar sadaa barr mango gopinki daasi mohi keeje ....|1....
दीन जान मोहि दीजे यमुना ॥ नंदकुमार सदा बर मांगो गोपिनकी दासी मोहि कीजे ।॥।|१॥॥ तुम तो परम उदार कृपानिधि चरण शरणसुखकारी ॥ तिहारे वश सदा लाडलीवर तब तट क्रीडत गिरिधारि ॥२॥ सब ब्रजजन विरहत संग मिल अद्भुतरासविलासी ॥ तुमारे पुलिन निकट कुंजनद्रम कोमल शशी सुबासी | ३॥। ज्यौं मंडलमें चंद बिराजत भरभर छिरकत नारी॥ श्रमजल हसत नहात अतिरसभर जलक्रीडा सुखकारी ॥।४॥ रानीजीके मंदिरमें नित उठ पाय लाग भुवनकाज सब कीजे | परमानंददास दासीव्हे नंदनंदन सुख दीजे ॥॥५॥।
Shree Yamunaji
NityaPad-009
Bibhaas
Atimanjul jalpravaah manohar sukh avagaahat vidit raajatati taraninandini ..
अतिमंजुल जलप्रवाह मनोहर सुख अवगाहत विदित राजतअति तरणिनंदिनी ॥ श्यामवरन झलक रूपलोललहरवर अनूप सेवितसंतत मनोजवायुमंदिनी ॥१॥ कुमुदकुंजजन विकास मंडित दिसदिस सुबवास कुंजत अलिहंसकोक मधुरछंदिनी ॥ प्रफुल्लित अरविंदपुंज कोकिलकलसारगुंज गावत अलिमंजुपुंज विविधवंदिनी ॥२॥ नारदशिवसनकथध्यास ध्यावत मुनि धरत आस चाहत पुलिनवास सकलदुःख निकंदिनी ॥ नाम लेत कटत पाप मुनिकिन्ननऋषिकलाप करत जाप परमानंद महाआनंदिनी ॥३॥
Shree Yamunaji
NityaPad-009
Ramkali
Prafullit bunn vividharang jhalkat yamunatanrag saurabh ghana aamodit atisuhavno ..
प्रफुल्लित बन विविधरंग झलकत यमुनातंरग सौरभ घन आमोदित अतिसुहावनो ॥ चिंतामणि कनकभूमि छबिअद्भुत लता झूमि सीतलमद अतिसुगंध मरुत आवनो ॥ १॥ सारसहंस शुकचकोर चित्रित नृत्यत सुमोर कलकपोत कोकिलाकल मधुर गावनो ॥ जुगल रसिकवर विहार परमानंदछबिअपार जयति चारुवृंदावन परम भावनो ॥। २॥॥
Shree Yamunaji
NityaPad-009
Ramkali
Sriyapunaji patit paavan karye ||
श्रीयपुनाजी पतित पावन कर्ये || प्रथमही जब दियो दरसन सकलपातक हर्‌ये ॥१॥ जलतरंगन परस कर पयपान सो मुख भर्‌ये ॥ नाम सुमरत गई दुरमति कृष्णजस विस्तर्‌ये ॥ २॥ गोपकन्या कियो मजन लालगिरिधर बर॒यो ॥ सूर श्रीगोपाल सुमरत सकल कार्य सर्‌ये ॥। ३॥।
Shree Yamunaji
NityaPad-010
Ramkali
Yeh jamuna gopalahi bhaaven ..
यह जमुना गोपालहि भावें ॥ जमुना जम्तुना नाम उचारत धर्मराज ताकी न चलावबें ॥१॥ जे जमुनाको जान महातम वारंवार प्रणाम करे |॥। ते जमुना अवगाहनमज्जन चिंतित ताप तनकेजु हरे ॥२॥ पद्मपुराण कथा यह पावन धरनी प्रति वाराह कही ॥ तीर्थमहातम जान जगतगुरु सो परमानंददास लही ॥३॥
Shree Yamunaji
NityaPad-010
Ramkali
Yeh prasaad houn paaruun sreejmunaji ..
यह प्रसाद हों पारऊं श्रीजमुनाजी ॥ तुम्हारे निकट रहा निशवासर रामकुष्णगुन गाऊं।।१॥ मजन करूं विभलजलपावन चिंताकलेस बहाऊं ॥ तिहारी कृपातें भानुकी तनया हरिपद प्रीत बढाऊं ॥२॥ बिनती करोंयही बर मागों अधमन संग बिसराऊं ।॥। परमानंदप्रभु सबसुखदाता मदनगोपाल लडाऊं ॥३॥
Shree Yamunaji
NityaPad-010
Ramkali

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