top of page
Kirtan Title
Kirtan
Category
Book-Page#
Raag
Nandlalason maaee arujh rahyo munn mero kyon sur jaaoonri ...
नंदलालसों माई अरुझ रहयो मन मेरो क्यों सुर जाऊंरी ॥। श्रवण बेन रूप नयन मन मनसा नाहिंने चेन रोम रोमरही मूरति कितन गुरुजन दुर्जन धरे नाऊं ॥१॥ जंत्र मंत्र टोना टमना सो कछून कीनो हों उपाऊं ॥। खेम रसिक प्रभुपे अबकेसेंछूटन पाऊंकोनसो देव मनाऊं ॥।२॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-090
Ramkali
Sakhiman lagyo vahithor ..
सखीमन लाग्यो वहिठोर ॥ विव्हलभई सकलब्रजडोलत बातविसर गईओऔर ।॥।१॥। मारगजात अचानकदेखे अखियनकीनीदोर ॥। प्रफुल्लित कमलनिरखमुख हरिकोछबिर्सगीधेभोर ॥२॥ विरचनसक्यो कहाकरू यद्यपिबंघूबमषर सबखोर ॥ विद्यादासबिलोकविमोहीश्रीगोपालसिरमोर ॥ ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-091
Dhanshree
Ankhiyan aisee tevpari .. kahaakarovaarijamukhupar
अंखियन ऐसी टेवपरी ॥ कहाकरोवारिजमुखऊपर लागतज्योंभ्रमी ॥९१॥ हरखहरख प्रीतममुख निरखत रहतनएकघरी ॥ ज्योंज्योॉराखत यतनन करकर त्योत्योहोतखरी ।। २॥ गडकररही रूप जलनिधियमें प्रेमपीयूषभरी ॥। सूरदास शिरिधर नगपरसत लूटतनिधिसगरी ॥ ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-091
Dhanshree
Moll linenyanki saine .. shravansunat sudhibudhisabavisari
मोल लईइननयनकी सेन ॥ श्रवणसुनत सुधिबुधिसबविसरी लुब्धीमोहनबेन ॥ १॥ कमलनयन खिरकते आवन एक जोवातकहीहंसएन ।। परमानंदप्रभुनंददुलारे मेरीगायकही दुहिदेन ॥२॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-091
Dhanshree
Nayanamai atkeshaamalgaat .. nirakhnirakh saadar
नयनामाई अटकेशामलगात ॥ निरखनिरख सादर चकोरज्योंमुखशशि मुरमुसकात ॥१॥ कहांकरोबनीयह कहांते नेंकन इतउतजात ॥ भयेरहेनौका के खगज्यो विसरगई सबबात ॥शा। कटिपटपीतउरसुमननमालानिरखतनयन सिरात॥ कुंडलमकरकपोंलमिली छबि अंबुजकणजिमप्रात ॥ ३॥ सुभगभुजनमणिभूषण राजतपद अंबुंज सुखदात ॥ विद्यापति श्रीगोपाल विलोकत निमिषण अतिअनखात ॥॥४॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-091
Dhanshree
Meromai madhoso manmanyo .. apano tunn aur vadhotako
मेरोमाई माधोसो मनमान्यो ॥ अपनो तन और वाढोटाको एक मेककरसान्यो ॥१॥ लोकवेदकुलकानत्यजी मेन्योतिआपने आन्यो ।। एकनंदनंदन के कारण बैरसबनसो ठान्यो ।।२॥ अब क्‍यों भिन्न होयमेरी सजनी मिल्योदूधअरुपान्यो ॥ परमानंददासको ठाकुरहे पहिलोपहिचान्यो ॥ ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-091
Dhanshree
Mero munn bawaron bhayo .. larka
मेरो मन बावरों भयो ॥ लरका एकइहांहुतोठाढो ताहीकेसंगगयो ॥ १॥। जानोंनहीं कोनको ढोटाचित्रविचित्र ठयो॥ पीतांबरछबि निरख हरच्ोो मनपढकछु मोहिदयो ॥२॥ ग्वालनी एकपाहुनी आई ताकी यहगति कीनी ॥ परमानंदप्रभुहसतसेनदे प्रेमणाणिगहि लीनी ॥।३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-092
Dhanshree
Meromankanh harao .. gayojo sanganandandanke vahaante naheen
मेरोमनकान्ह हरओ ।। गयोजो संगनंदनंदनके वहांते नहीं टरओ ॥|१॥ कहाकहंजो बगदन आयो स्याम समुद्रपरयो ॥ अतिगंभीरबुद्धिको आलवपयप्रेमपीयूषभरञ्यो ॥ २॥ अबतो जियऐसीबनिआई भवनकाज बिसरयो | परमानंदभलेटांअटक्यो यह सबरहयोधरयो ।। ३॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-092
Dhanshree
Mein apano manhariso jore‌you .. harison jore sabnason torr‌you ...
में अपनो मनहरिसो जोर्‌यो ॥ हरिसों जोर सबनसों तोर्‌यो ॥। नांचनच्योत बघूंघट कैंसो लोकलाज डर पटकपिछोरदो ॥१॥ आगे पाछें सोचमिट्यो जियको बाटमाझ मटुकालेफोरणञो ॥ कहनो होय सोकहो सखीरीकहाभयो काहूनेमुखमोरञ्यो ९ नवललालगिरिधरन पियासंगप्रेमरंगमें यहतनबोरद्यो ॥ परमानंदप्रभु लोग हसनदे लोकवेदतिनुका ज्योंतोरद्यो ।। ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-092
Dhanshree
Jaadinate aangankhelatdekhyo sriyashodakoputari ..
जादिनते आंगनखेलतदेख्यो श्रीयशोदाकोपूतरी ॥ तबतेगृहसूं. नातोटूटयो जेसें काचो सूतरी ॥१॥ अतिबिशाल वारिजलोचनपरराजतकाजररेखरी ॥ रच्छादे मकरंदलेतमानों अलिगोलककेवेषरी ॥॥२॥ राजत द्वेद्रेद्धकी दतिया जगमगजगमग होतरी ॥ मनोमहातममंदिर में रूपरत्नकीजोतरी ॥३॥। श्रवण उत्कंठारहित सदाईजबबोलततुतरायरी ॥ मानोकुमुदिनी कामनापूजी पूरणचंदहिंपायरी ॥४॥ परमानंददेखसुंदरतनआनंदउरनसमायरी ॥| चले प्रवाहनयनमारगव्हे कापें रोक्यो जायरी ।।॥५॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-092
Dhanshree
Meromanhardyo duhuor ..
मेरोमनहरद्यो दुहुँओर ॥ सुंदरवदनमुकुटकीशोभाश्रवणनमुरलीघोर ॥|१॥ तबहों भाज भवनतेनिकसी हरिआये इहिओर ॥ मृदुमुसकायबंक अवलोकन सर्वस्वलीनोचोर ॥२॥ होंबहुतांसमझायरहीयेकछुवश नाहिनमोर ॥ रह्योडपचार दासपरमानंद बिन नागरनंदकिशोर ॥। ३॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-092
Dhanshree
Mento pritisyamsonkini | kounindon koubando abto yeh
मेंतो प्रीतिस्यामसोंकीनी | कोऊनिंदों कोऊबंदो अबतो यह धर दीनी ॥॥१॥ जोपतिक्रततो या ढोटासों इनेसमप्यों देह ॥ जोव्हभिचारतो नंदनंदनससों बाढ्यो अधिकसनेह ॥१॥ जोब्रतगगह्मा सो औरनभाथोमर्यादाकोभंग ।॥। परमानंदलालगिरिधरकोपायो मोटो संग ॥। ३॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-093
Dhanshree

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page