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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Manharlegaye nandkumar .. barakadrishtipapicharananatan dekhan naan
मनहरलेगये नंदकुमार ॥ बारकदृष्टिपपीचरणनतन देखन न पायोबदनसुचार ॥ १॥ होंअपनेघरसुच्सो बैठी पोवतही मोतिनके हार ॥ कांकर डार द्वारव्हेनिकसेबिसरगयोतन करतशुंगार ॥ २॥ कहारीकरों क्योंमिलहें गिरिधर किहिमिस हों वशोदाघरजाऊं ॥ परमानंदप्रभुठगीरी अचानक मदनगोपालभावतोनाऊं ॥।३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-093
Dhanshree
Menromangovindsonmartanyot naan jiyabhaave ..
मेंरोमनगोविंदसोंमान्योतातेंऔर न जियभावे ॥ जागतसोवतयहउत्कंठा कोऊ ब्रजनाथमिलाबे ॥१॥ बाढीप्रीति आनउर अंतरचरणकमलचितदीनो | कृष्णविरहगोकुलकीगोपी घरही में बनकीनो ॥ २॥ छांड अहारबिहार सुखदेह औरनचाहत काऊ ॥ परमानंद वसतहैंघरमेंजेंसे रहत बटाऊ ॥। ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-093
Dhanshree
Honandlalbina naan rahuun..| mansawacha aur karmana hitaki
होनंदलालबिना न रहूं॥| मनसावाचा और कर्मणा हितकी तोसोंकहूं ॥ १॥| जोकछु कहोसोईसिर ऊपरसोहोंसबेसहूं ॥ सदासमीप रहूं गिरिधर के सुंदर वदनचहूं॥। ३।। यहतनअर्पणहरिकोंकीनो वहसुखकहालहूं।। परमानंदमदनमोहनके चरणसरोजगरहूं | ३।।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-093
Dhanshree
Lagan inanayananki vaaki .. dekhenhinduhkh vinedekhenhindu:khapirhot
लगन इननयननकी वाकी ॥ देखेंहींदुःख विनेदेखेंहींदु:खपीरहोत दुहुधाकी ॥९॥ टारी न टरतजाय बिनदेखेजिहीफबतहेंसाकी ॥ रसिकराय प्रीतममनअटक्यों कहूं लगत नहींटांकी ॥२॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-093
Dhanshree
Curran dey loganakon upahaas || mankramvachan nandanandanako nimish
करन दे लोगनकों उपहास || मनक्रमवचन नंदनंदनको निमिष नछांडोपास ॥१॥ सबकुटुंबकेलोक चिकनिया मेरेजानेघास ॥| अबतोजिय एसीबनि आई क्योंमानोलखत्रास ॥१। अबक्योरह्ोंपरें सुन सजनीएकगामकोवास ॥ ये बाते नीकी जानतहें जन परमानंददास ।।३॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-093
Dhanshree
Maaihon giridharankegunagaaun.. merento vrat yeh nishdin aur
माईहों गिरिधरनकेगुणगाऊं॥ मेरेंतो व्रत यह निशदिन और नरूचि उपजाऊं।॥१॥ खेलन आंगन आउ लाडिलें नेकहु दरशन पाऊं।। कुंभनदास हिलगके कारन लालच लागिरहाऊं ॥३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-094
Ramkali
Sakhiri lobhi merenyan .. bindekhenchatpati laagat dekhat
सखीरी लोभी मेरेनयन ॥ बिनदेखेंचटपटी लागत देखत उपजेचेन ॥१॥ मोरमुकुटकाछेंपीतांबरसुंदरताके एन ।। अंगअंगछबिकही नपरतहै निरखथकित भयोगमेन ॥। २॥ मुरली एसी लागत श्रवणन चितवत खगमृगधेन ।। परमानंदप्रेमीके ठाकुर वे देखठाढे एन ॥।३।।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-094
Ramkali
Manmrigvedhyomohanayanbas .. goodhbhaavaki
मनमृगवेध्योमोहननयनबानसो ॥ गूढ्भावकी सैनअचानकतकि तान्यों भूकुटी कमानसो |।१॥ प्रथम नादबल घेरनिकटले मुरलीस्वरसप्तकबंधानसो ॥ पाछें बंक चितैमृूदुहसके घातकरीउलटी सुठानसों ॥२॥ चतुर्भुजदास पीर यह तनकीमिट तनऔषधआनसों ॥ व्हेहिंसुखतबहीउरअंतर आलिंगनगिरिधरसुजानसों ।। ३।।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-094
Ramkali
Kartaho sabey sayanibat ..| joe low dekhein nahin
करतहो सबे सयानीबात ॥| जो लो देखें नाहिन सुंदरकमलनयन मुसकात ।। १॥ सब चतुराई बिसर जातहै खानपानकी तात ।। विनदेखें छिन कल न परतहे पलभर कल्पविहात ॥। ३।। सुन भामिनिकें वचन प्रनोहर मनमें अतिसकुचात ।। चतर्भुजप्रभु गिरिधरनलाल संग सदा बसों दिन रात ॥ ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-094
Ramkali
Thadheri khirak maaee konkokishore .. saanvarevaran manharan
ठाढेरी खिरक माई कोनकोकिशोर ॥ सांवरेवरण मनहरण बंसीधरण कामकरन कैसी मति जोर ।।१॥ पवन परसजात चपलहोत देख पियरे पटको चटकीलो छोर।॥। सुभगर्सांवरी छोटीघटाते निकसि आई बे छबीलीकटाकों जैसोछबीलो और ॥२। पूछतपाहुनीग्वार हाहाहोमेरी आलीकहानाउं को हैचितबितचोर ॥ नंददासजहिं चाहि चकचोंध्रीआय जाय भूल्योरी भवनगमनभूल्यो रजनीभोर ॥ ३॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-094
Ramkali
Bhaee munn madhoki avser .. maun dharey mukh chitavabat thaadhi yaa
भई मन माधोकी अवसेर ।। मौन धरे मुख चितवबत ठाढी या बन आवबे फेर ॥१॥ तब अकुलाय चली उठवनको बोले सुनत न टेर ॥ विरहाविवश चहूंधा भ्रमतिहीं स्थाम कहा कियो झेर ॥।॥२।॥ आबो बेग मिलो नंदनंदन दासन करो निवेर | सूरस्याम अंक भरल्नीनी दूर कियोदु:ख ढेर ॥। ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-095
Ramkali
Manato harike haath bikaanyon .. nikasyo maan guman sahit
मनतो हरिके हाथ बिकान्यों ।। निकस्यो मान गुमान सहित बहमें यह होत न जान्यों ॥१॥ नयननसाट करी मिलनयनन उनहींसों रुचि मान्यों। बहुत यतन करहों पचिहारी फिर इतकों न फिरान्यों ॥२॥ सहज सुभायठगोरी परी सीस फिरत अरगानों ॥ सूरदास प्रभु रसवश भई गोपी बिसर . गयो तन ज्ञानों ॥ ३॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-095
Ramkali

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