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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Kabahi mahyo liye shir dole .. jhuthei itautt phir aavat | कबही मह्यो लिये शिर डोले ॥ झुठेई इतउत्त फिर आवत
यहां आय यह बोले ॥१॥ मुंहलों भरी मथनियां तेरी तोहि रटत भई सांझ ॥
जानतहों गोरसको लेंबों याही बाखर मांझ ।।२॥ डततो आय बात सुन मेरी कहे
बिलग जिन मांनें॥ तेरे घरमें तुठी सथानी और बेच नहिं जानें ॥४॥ भ्रमतहि
प्रमत भर मगई ग्वालिन बिकल भई बेहाल।॥। सूरदास प्रभु अंतरयामी आयमिले
ततकाल ॥।३॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-095 | Ramkali |
Lochan bhaye sthaamke chere .. etey parr sukh paavat kotik | लोचन भये स्थामके चेरे ॥ एते पर सुख पावत कोटिक
मोतन फेर नहेरे ।। ९॥ हाहा करत परत हरिचरण न ऐसे वश भये उनहीं उनको बदन
बविलोकत निशदिन मेरो कह्यो न सुनहीं ॥ २॥। ललितत्रिभंगी छबि पर अटके
फटके मोसो तोरी ॥ सूरदास हमपें रिस कीनी आपन स्यामसों जोरी ।॥। ३॥। | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-095 | Ramkali |
Aeka gaonkobas dheeraj kaiseke dharon .. lochan madhoop atak | एक गांवकोबास धीरज कैसेके धरों ।। लोचन मधूप अटक
नहीं मानतयद्यपि यत्न करों ॥१॥ बे यह मगनितप्रति आवतहैं हों लेदधि
निकरों। पुलकित रोमरोम गदगद स्वर आनंद उमंग भरों ॥२॥| पल अंतर
चलिजातकल्पभर विरहाअनल जरों ।| सूर सकुच कुलकान कहांलग आरज
पथ न डरो॥३॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-095 | Ramkali |
Sthaam nug zaan hriday churaayo... chaturbar nagri mahamanilakh | स्थाम नग जान हृदय चुरायो॥। चतुरबर नागरी महामणिलख
लियो प्रिय सखी संग ताहि न जनायो ॥ १॥। कृपण ज्यों धरत धन ऐसे दृढ कियो
बन जननी सुन बात हस कंठलायो ॥ गास दियो डार कहि कुबरि मेरी वावरी
सूरप्रभु नाम झूंठें उडायो ॥। ३॥। | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-095 | Ramkali |
Sakhee hojo gaee dadhi bechan vrajmein ulati aap vikaai ... | सखी होजो गई दधि बेचन ब्रजमें उलटी आप विकाई ॥।
विनग्रथ मोल लई नंदनंदन सर्वस्व लिखदे आईरी ॥१॥| एयामलवरण
कमलदललोचन पीतांबर कटि फेंटरी ॥ जबते आवत सांकरी खोरी भईहे
अचानक भेटरी ॥ २॥ कोनकीहें कोनकुलबधू मधुरमधुर हस बोलेरी | सकुच
रही मोहि उत्तर नहीं आबत वलकर घूंघट खोलेरी ॥|३॥ सास नणद उपचार
पचिहारी काहू मरम न पायोरी ॥ करगहि बैद ढंढोर रहे मोहि चिंतारोग
बतायोरी ॥४॥ जादिनतें में सुरतसंभारी गृह अंगना विष लागेरी।| चितवत
सोवत ओर जागत यह ध्यान मेरे आगेरी ॥५॥ नीलमणि मुक्ताहल देहूंजो मोहि
श्याम मिलायेरी ॥ कहे माधो चिंता क्यों विसरे विन चिंतामणि पायेरी ।।३॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-096 | Ramkali |
Syaam rung range nayan .. dhoye chhutat naheen yeh kaise huun | स्याम रंग रंगे नयन ॥ धोये छुटत नहीं यह कैसे हुं
मिलेपघिलव्हेमेन ॥। १॥। येगीधे नहीं टरत वहांते मोसो लेन न देन ॥ सूरजप्रभुके
संगसंग डोलत नेंकहू परत न चेन ॥। ३॥। | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-096 | Ramkali |
Nayan bhaye bush mohanate .. jyon kurangbash hott naadke tarat | नयन भये बश मोहनते ॥ ज्यों कुरंगबश होत नादके टरत
नहीं ता भ्रृहनते ।।९१॥ ज्यों मधुकर वश कमलकोशके ज्यों चंदचकोर ॥ तेसेई
वश भये स्थामके गुडिया वश ज्यों डोर ॥२॥ ज्यों वश स्वातीबूंदन चातक ज्यों
वश जलके मीन ॥ सूरजप्रभुके वश भये एसे छिनछिन प्रतजु नबीन ॥। ३॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-096 | Ramkali |
Sajnimote nayan gaye abalon aas raheen aavanaki harike | सजनीमोते नयन गये अबलों आस रहीं आवनकी हरिके
अंगछये ॥१॥ जबते कमल बदन उनदरस्यों दिनदिन और भये ॥ मिले जाय
हरदी चूना ज्यों एकहि रंग रये॥ मोकों त्यज भये आपस्वारथी वे रसमत्त भये ||
सूरस्थामके रूपसमाने मानों बूंद तये ॥३॥। | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-096 | Ramkali |
Nayana maan apamaan sahyo .. atee akulaay millery varjat | नयना मान अपमान सह्यो ॥ अति अकुलाय मिलेरी वरजत
यहापि कोटिकह्ों ॥१॥ जाकी बान परी सखि्र जैसी वेही टेक रह्यो ॥ ज्यों
मरकट मूठी नहिं छांडत नलिनीसूआ गद्यो ॥२॥ जैसे नीर प्रवाह समुद्रहि मांझ
बह्यों सुबह्यो ॥ सूरदास इन तैसियकीन्हीं फिर मोतन न चहयो ।।३॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-096 | Ramkali |
Gwalini prakatto purananeh | dedhibhajan sirpar dharryori | ग्वालिनी प्रकट््ो पूरणनेह | देधिभाजन सिरपर धर्योरी
कहत गोपालहि लेह ॥ १॥ कोन सुने कासों कहूंरी काके सुरतसंकोच ।। काको
डर पथ अपथकोरी कोउत्तमको पोच ॥२॥ वाटघाट निजपुर गली जहां तहां
हरिनाम ॥ समझाये समझे नहीं वाहि सिखदेवि थक््योगाम ॥|३॥| दीपक जो
मंदिर वरे बाहिर लखे न कोय तृणपरसत प्रज्वलित भयो गुप्त कोन विधि होय ।।४॥
पान किये जैस वारणी मुख भलकन तनन संभार। पग डगमग जित तित धरेंविधुरी
अलक लिलार ।।५॥ सरिता निकट तडागके दीनोकूल विदार ॥ नाममिट्यो
सरिता भई को निवेरवेवार ॥६॥ लज्या तरल तरंगिणीगुरुजन गहरी धार | दोऊ
कुलकूल परमित नहीं ताहि तरत न लागी वार ।॥७॥ विधिभाजनओछल्यो रच्यो
लीलासिंधु अपार ॥ उलट मग्न तामें भयो कोन निकासनहार ॥|८।। चित
आकरष्यो नंदके मुरली मधुर बजाय ॥ जिहिलजा जगलाजयो सो लज्जा गई
लजाय ॥९॥ प्रेममग्न ग्वालिन भई सूरदासप्रभु संग ॥| नयन श्रवण मुख नासिका
ज्यो कंचुकी त्यजत भुजंग ।॥१०॥॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-097 | Ramkali |
Jopein chop millen kii hoy .. tou kyon rahyoparevin dekhe | जोपें चोप मिलन की होय ॥ तो क्यों रह्योपरेविन देखे
लाखकरो जिनकोय ॥।१॥ जोपें विरह परस्पर व्यापे तो कछु जिये बने | लोक
लाज कुलकी मर्यादा एको चित न गिने ॥२॥ कुंभनदास जाहि तन लगी ओर
नाकछू सुहाय ॥ गिरिधरलाल तोहि विनदेखे पलछिन कल्प विहाय ॥। ३॥ | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-097 | Ramkali |
Hailey hilagaki pahichaan |. jopein hilag hiyemein hoti tou kahaa | हेली हिलगकी पहिचान |। जोपें हिलग हियेमें होती तो कहा
करे कुलकान ॥। १॥ हिलग करी ज्यों पतंग दीपकसों तन सोप्योहै आन ॥| शंकत
नहीं जरत ज्वालामें सही प्राणकी हान ॥२॥ हिलग करी ज्यों चकोर चंदसों
पावक चुगतजु जान ॥ ऐसेंही कुरंग नाद मृदु मोहे हने पारधी वान ॥३॥
हिलगनहींसोव्धें सते त्यजमधुप कमल हित जान॥ ऐसी हिलग लालगिरिधरसों
सूरदास पहिचान ॥॥४॥। | Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein) | NityaPad-097 | Ramkali |
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