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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Kaise curry keejai veda kahyo . harimukh nirakhat vidhi-nishadhakau
कैसे करि कीजै वेद कह्यो । हरिमुख निरखत विधि-निषधकौ नाहिन ठोर रह्यो ॥ १॥ दुःखको मूल सनेह सखीरी सो उर पैठि रह्मो। परमानंद प्रभु केलिसमुद्रमें परद्योसु ले निबह्नो ॥२॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-098
Saarang
Nayanan aisee baan purry.. bindekhe giridharanlalmukh yugbhar
नयनन ऐसी बान परी॥ बिनदेखे गिरिधरनलालमुख युगभर जात घरी ॥१॥ मारग जात उलटतन चितयोमोतनदृष्टि भरी ॥ तबहींते लागीचटपटी इकटक कुलमरयाद टरी ॥२॥ चतुर्भुजदास छुडावनको हठ में बिधि बहुत करी ॥ तब सर्वस्व हरमन हरिलीनो देहदशा विसरी ।।३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-098
Aasawari
Chalari sakhee nandgam jaay vasiye khrik khelat vrajchandson
चलरी सखी नंदगाम जाय वसिये ख्िरक खेलत ब्रजचंदसों हसिये।।१॥ बसे बेठन सबे सुखमाई।। एककठिन दुःख दूरकन्हाई।। २॥ माखनचोरे दुरखुर देखूं॥ जीवन जन्म सुफल कर लेखूं॥। ३॥ जलचर लोचन छिनछिन प्यासा ॥ कठिनप्रीति परमानंददासा ।।४॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-098
Aasawari
Jabaten preeti sthaam soun keaney | taa dinn tein merey inn mainani nenk hoo
जबतें प्रीति स्थाम सों कीनी | ता दिन तें मेरे इन मैननि नेंक हु नींद न लीनी ॥| ९॥ सदा रहत चित चाक चढद्यो सों और कछु न सुहाय। मन में रहे उपाय मिलनको इहै विचारत जाय ॥ ३॥ परमानंद पीर प्रेमकी काहु सों नहीं कहिये। जैसे बिथा मूक बालककी अपने तन मन सहिये ।।॥३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-098
Saarang
Krishnanam jabaten shravanasunyori aalee bhooli bhawan houn tou
कृष्णनाम जबतें श्रवणसुन्योरी आली भूली भवन हों तो बावरी भईरी॥ भरभर आवें नयनचितहूं नपरे चेन मुखहूं नआवेबेन तनकीदशा कछू औरें भईरी ॥ १॥ जेतेक नेमधर्म कीनेरी में बहुविध अंगअंग भई हूंतो श्रवण मईरी॥ नंददासजाके श्रवणसुने यह गति माधुरीमूरति केंधों कैसी दईरी ॥२॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-098
Aasawari
Madan mohan saun preeti curry main kahaa bhayo joe kouu mukh moyi .
मदन मोहन सौं प्रीति करी मैं कहा भयो जो कोऊ मुख मोयी । इह ब्रततें हों कबहु न टरिहौं जानि सबनिसों नातो तोर्यों ॥ १॥॥ सास रिसाऊ मात गृह ब्रासौं हों पतिसों मानहुँ घट फोर्यो | कुंभनदास गिरिधरसों मिलिहौ आरज - पथ हौं सबनिसों छोयों ॥॥२॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-098
Saarang
Preeti curry kaahu sukh naan laho. preeti patang curry deepkason
प्रीति करि काहु सुख न लह्ो। प्रीति पतंग करी दीपकसों आपुन आप दह्ों ॥१॥ अलिसुत प्रीति करी जलसुतसों सम्पुट मांझ गह्मो । सारंग प्रीति करी सारंग सो सन्‍्मुख बान सहो ॥२।।| हमहु प्रीति करी माधोंसों जात कछु न कद्मो। उधो सुर प्रभु बिनु देखे नैननि नीर बह्ो ।। ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-098
Aasawari
Chitako chor abb joe paau .. dwaar kapaat banaay jatan curr
चितको चोर अब जो पाउ ॥ द्वार कपाट बनाय जतन कर नीके मांखन दूध चखाऊं ॥१॥ जेसे निसंक धसत मंदिर में तिहें ओसर जो अचानक आउं ॥ गहि अपने कर सुदृढ मनोहर बहोत दिननकी रूचि उपजाऊं ॥ २॥ ले राखों कुचबीच निरंतर प्रति दिननको ताप बुझाऊं।॥। परमानंद नंदनंदनको घर घर ते परिभ्रमन मिटाउं ॥ ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-099
Aasawari
Yaa sanwareso mein preeti lagaai .. kull kalankaten naanhi darongi
या सांवरेसो में प्रीति लगाई ॥ कुल कलंकतें नांही डरोंगी अबतो करों अपने मनभाई ।। १॥। बीच बजार पुकार करूं में चाहे करो तुम कोटि बुराई ॥॥ लाज मर्यादा मिली ओरन को मृदु मुसकान मेर बट आंई ॥ २॥ बिन देखे मनमोहन को मुख मोही लगन त्रिभुवन दुःखदाई ॥ नारायन तिनको सब फीको जिन चाखी यह रूप मिठाई ॥। ३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-099
Dhnashree
Abb houn kahaa karori maaee .. sunder sthaam kamaldal lochan
अब हों कहा करोरी माई ॥ सुन्दर स्थाम कमलदल लोचन मेरो मन लियो हे चुराई ॥१॥ लोग कुट्धम्ब सबन मिलके मोहे बारबार समुझाई ॥। तोऊ मोहे उन बिन नाहिन परत रहाई ॥२॥ अबलों कठिन हिलगके कारन लोकलाज बिसराई ॥ कुंभनदास प्रभु सैलधरनपिय मुसक ठगोरी लाई ॥३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-099
Aasawari
Mohi lai inn nainanki saine .. sravan sunat sudhbudh bisari sub
मोही लै इन नैननकी सैन ॥ स्रवन सुनत सुधबुध बिसरी सब हौं लुबधी मोहन मुख बैन ॥। १॥| सुंदर बदन घूंघट पट कीनौ चलरी सखी प्रीतम सुख दैन। अंगअंग प्रति सहज माधुरी तेरी सौंह चित रहत न चैन ॥। २॥ कर गहि कमल खरिकके मारग उनसों बात कही कछु मैंन । परमानंद प्रभु सौंह बबाकी मेरी या गांई कही दुृहि दैन ॥३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-099
Dhnashree
Shyamason neh kabahu naan keeje || munn shyam tunn shyam shyamahi
श्यामसों नेह कबहू न कीजे || मन श्याम तन श्याम श्यामही सलोने टेढी प्रीत करे तन छीजे ॥१॥ श्याम पाग सिर छबिसों सांवरेकी आली सर्वस् अपनो दीजे ॥। चतुर्भुज प्रभु गिरिधर सों हिलमिल अधरसुधारस पीजे ॥२॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-099
Aasawari

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