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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Maaee ree ! nahin doss gopalai . mero munn atakyo uni
माई री ! नाहिन दोस गोपालै । मेरो मन अटक्यो उनि मूरति अंबुज-नैन बिसालै ॥ १॥| कौन-कौन कौ मनु न चुरायो वह मुसकनि वह गावनि। वह मुरली वह चालि मनोहर वह कल बेनु बजावनि।॥।२॥ अपनौ बिगारु कौन सो कहिए आपहि काज रति जोरी। परमानंद' स्वामी मनमोहन हों अजान मति भोरी ॥।३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-100
Aasawari
Kahiyo merey diljani sou ... birahaki agan bujhat naan bujhaai
कहियो मेरे दिलजानी सो ॥। बिरहकी अगन बुझत न बुझाई इन नैननके पानीसों ।। ९॥। रसकी बतियां आन मिलावो अबला दरद दिवानीसों |। रसिक प्रीत्तमसों मेरे मन लाग्यो सुरत खूब बरसानीसों ॥। २॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-100
Aasawari
Jaa dinn tein sunder badan nihaaradyo.
जा दिन तें सुंदर बदन निहारद्यो। ता दिन तें मधुकर-मन सो में बहुत करी निकस्यो न निकारयो । लोकलाज कुल-कानि जानि जिय, दुसह बिलोकि फिरौ करि छारयो। तात मात पति भ्रात भवन में, सबहिनी कौ कहिबौ सिर धारयो | होनों होड़ सु होड करम-बस, सजनी जिय कौ सोचु निबार॒यो । दासी भई दास परमानंद , भलौं पोच अपनों न बिचारओ ।।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-100
Aasawari
Jaa dinn preet sthamso keaney .. taadinaten merrie akhiyanmein
जा दिन प्रीत स्थामसो कीनी ॥ तादिनतें मेरी अखियनमें नेक हु नींद न लीनी ॥। ९।॥| चढच्यो रहत चित चाक सदाई यह विचार दिन जाय॥। मनमें रहत चाह मिलनकी और कछु न सुहाय ॥ २॥ परमानंद प्रेमकी बातें काहुसो नहिं कहिये ॥ जेसें व्यथा मूक बालककी अपने जीयमें सहीये ॥। ३॥॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-100
Aasawari
Kahaa karon merrie maaee ! nand-ladete manu chorchyo. sthaam sareer
कहा करों मेरी माई ! नंद-लडेते मनु चोरच्यो। स्थाम सरीर कमलदललोचन, चितवत चले कछुक मुख मोरचों ॥१॥ हों अपने आंगन ठाढी ही तबहि तें द्वार है निकसे आई, नेंकु दृष्टि दीनी उन ऊपर कर मुख मूँदि चले मुसिकाई ॥।२॥ तब तें मोहि घर की सुधि भूली जब तें मेरे नैननि लाई, “परमानंद' काम रति बाढी कबहिं मिलें कब देखों जाई ॥३॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-100
Dhanshree
Sakhi ! houn ataki ihi thaur. dekhi kamal-mukh syamasundar
सखि ! हों अटकी इहि ठौर। देखि कमल-मुख स्यामसुंदर कौ नैना उ भए भौर | घर ब्यौहार करत नहिं आवै स्रवन सुने कल गीत | अपनी ओर बचे हौं लीनी सुबल श्री दामा मीत। लोक वेद कौ मारगु छांडद्यो मातपिता की लाज | सबै अंग सुधि भई परमानंद भए राम के राज ॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-100
Aasawari
Sakhiritu janam sarovar jaay .. apane rasako taja chakwa
सख्ीरीतु जनम सरोवर जाय ॥ अपने रसको तज चकवा की बिछुर चलत दु:ख पाय ॥। १॥| सकुचीत कमल अकाल पायके अली ब्याकुल समुदाय ।। तेरे सेहेज आन कि यहे गत येहे अपराध कह काय ॥। २॥। यह अद्भुत ससि रच्यो बिधाता सहज समें ऊपचाय ॥ कुंभनदास प्रभु गिरिधर सागर देखत ऊमगत ताय ॥३॥
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NityaPad-101
Aasawari
Nainan nirakh hari kau roop |
नैनन निरख हरि कौ रूप | निकसि सकत नहीं लावनि- निधि तें मानों परूयो कोऊ कूप ॥१॥ छीत-स्वामी गिरिधरन विराजित नख- सिख रूप अनूप। बिनु देखें मोहिं कल न परत छिनु सुभग बदन छबि- जूप ॥ २॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-101
Aasawari
Laganako naam naan leeje sakhiri ..| laganako marag atee hii
लगनको नाम न लीजे सखीरी ॥| लगनको मारग अति ही कठिन हे पाय धरे तन छीजे ॥॥९॥| जो तू लगन लगायो चाहे शीसकी आस न कीजे ॥ परमानंदस्वामी के ऊपर बार वार तन दीजे ।। २॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-101
Aasawari
Srigokul rajkumarason mero munn laagi rahyo.
श्रीगोकुल राजकुमारसों मेरो मन लागि रह्यो। घूंघरवारे केस सांवरो अमल कमलदल नैना। जटित टिपारो लाल काछनी अरु पियरो उपरैना । कुंडल अलक झलक गंडन पर हंसि बोलत मृदु बैना | कमल फिरावत कर बनमाला नूपुर बजत नगैना ॥१॥| काल दुपैरा बिरियाँ ए सखी इन कदमनकी और | मोहन मंडली संग लीने हेली खेलत हैं चकडोर । हौं जु हुति सखियनमें ठाढी निरखी हँसे मुख मोर | सबकी दृष्टि बचाय आली मोपै डारी नंद किशोर ॥। २॥ आज भोर गई भवन नंदके मैं ज़ु कछुक मिस कीनो। सोय उठे राजत सिज्जा पै नंदलाल रंगभीनीौ। लटपटी पाग रसमसे नैना मोहि देख्त्र हंसि दीनो। पुनि अंगराय दिखाय बदन छबि चितवत चित हरि लीनो ॥ ३॥ जाकी गति मति रति लागी जासों ता बिन क्‍यों हून सर ही। जैसे मीन रहे जल बाहिर तलपि तलपि जिय मर ही । कोऊ निंदौ कोऊ वंदौ त्रासो एकौ जीय न धर ही । कहे भगवान हित रामराया प्रभु नेकु हियतें न टर ही ॥४॥
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-101
Saarang
Merrie akhiyan dekhyo giridhar bhaave. kahaa kaho toson suni
मेरी अखियन देख्यो गिरिधर भावे। कहा कहो तोसों सुनि सजनी ! उत ही को उठि धाबै ॥१॥ मोर-मुकुट काननि कुंडल लखि, तन गति सब विसरावै | बाजूबंद कंठमनि भूषन निरखि निरखि सचु पावै ॥२॥ छीत- स्वामी कटि छुद्रघंटिका नूपुर पद हिं सुहावै | इह छबि बसत सदा वि्वल-उर मो-मन मोद बढावै ॥३॥।
Hilag ( Sheet Kaal Rajbhog Darshant Mein)
NityaPad-101
Aasawari
Mohan mohani ghaali sirpar joee mohi rahat sadai .....
मोहन मोहनी घाली सिरपर जोई मोहि रहत सदाई ।॥॥ निशदिन सखीरी जोलों नहीं देखियत पिय व्रजराजकुंबर ॥१॥| यद्यपि धीरज धर रहत सखीरी तदपि मुरली ध्वनि सुनत प्राणहर । अबन रहो परें मिलूं गोविंदप्रभुसों रसिककुंवर बलबल स्थामसुंदर ॥।२॥
Sheet Kaal Bhog Samaye
NityaPad-102
Nat

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