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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Laalan naahin neri kaahooke basake .. | लालन नाहिं नेरी काहूके बसके ॥
बावरी भईरी त्रिया उनसों मन उ रुझायो वेतो सदाई अपने रसके ॥१॥।
निरखपरख देख जियको भरम गयो कामिनीबुूंदनके मननकसके ॥
तदपि कछु मोहनी गोविंद प्रभुपें युवतीसभामेंबदत यशके ॥।२॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-102 | Nat |
Aaj banathan laalan ayeri tere maan curr nyochhaavar .. | आज बनठन लालन आयेरी तेरे मान कर न्योछावर ॥
यद्यपि बहुनायक कहूंनमन अरुझोरी तेरे गुणरूपमोहे ताते तोसोहैरी भांवर ॥ १॥
ऐसेरी लालनपर तन मन धन दीजे समझ सयानी पलछिन घटत विभावर ॥
दूतीके बचनसुन प्रेममग्न भई मिलीरी गोविंदप्रभुसो राखे बांधे सुहागदांवर ॥२॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-102 | Nat |
Hansat hansat laalan ayeri tere angana... | हँसत हँसत लालन आयेरी तेरे अंगना॥।
होंतो तेरो रूपदेख ठग रही मेरी आली जोकछु कहि आवे छबिदेख भई मगना ॥ १॥|
जियकी रिस गई अधिक रुचि वाढी मोहन मोहीरी भयोरी मनलगना ॥
करसों कर गहत्हदयसों लगाय लई मिलेरी गोविंदप्रभु सबसुख निशजगना ॥ २॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-102 | Nat |
Preetam preetiheete paiye .. | प्रीतम प्रीतिहीते पैये ।।
यद्यपि रूपगुण सील सुघरता इन बातन नरिजैये ॥१॥
सत कुल जन्म करम शुभलक्षणवेदपुराण पढेये ।|
गो विंद विनास्नेहसुआलो रसना कहाजु नचैये ॥२॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-102 | Nat |
Surang durang sohat pagkuranglal casenloyanalone .. | सुरंग दुरंग सोहत पागकुरंगलाल केसेंलोयनलोने ॥
कपोल विलोलनमें झलकेकल कुंडल कानन कोने ॥। १॥।
रंगरंगीलेके अंग सबें नवरंगरंगेऐसे पाछें भये न आगें होने ॥
नंददास सखी मेरी कहां बचले कामके आये टटाबक टोने ॥२॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-102 | Nat |
Raadhe tere nayankendhombat paare.. | राधे तेरे नयनकेंधोंबट पारे।।
अखियन डोरे चटक रहे हे घूंमत जो मतवारे ॥१॥
अंजन दे पियको मनरंजत खंजन मीनमृग हारे ॥
सूरदासप्रभु के मिलवेकों नाचत ज्यों नटवारे ॥ २॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-103 | Nat |
Raadhe doo dathchisut kyon naduraave .. | राधे दू दथ्चिसुत क्यों नदुरावे ॥
सुन सुंदरवृषभाननंदिनी काहेको मन तरसावे ॥ १॥
सारंग दुःखी होत सारंग बिन तोहि दया नहीं आवे ॥
जलसुत दुःखी दुःखीवे मधुकर द्वयपंछी दुःखपावें ॥ २॥
सारंगरिपुकी नेंक ओट कर जो सारंग सचुपावें ॥
सूरदास सारंग के धोखें सारंगकुलहिं लजावें ॥ ३॥। | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-103 | Nat |
Pyaari tere loyan lonein.. | प्यारी तेरे लोयन लोनें॥
रसके आलवाल रंगीले बिशाल ऐसे पाछें भये न आगें होनें ॥ १॥॥
रूपके रिझ्ञोने जब मुसक चलत कोने कामके हेरी टटाबक टोनें ॥
नंददास नंदनंदनके नयनतें नेक नाहिं नेहोने ॥२।। | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-103 | Nat |
Mohan nayananhunte nahin tarat .. | मोहन नयननहुंते नहिं टरत ॥
विनदेखे तालावेलीसी लागत देखत मनजो हरत ॥१॥
अशनवसन सेननकी सुध आवे अब कछू नकरत ॥
गोविंद ब ल इम कहत पियारी तृसिखदेरीकेसेक आवबे भरत ॥। २॥। | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-103 | Nat |
Chala angaduraaye sanga merein ... | चल अंगदुराये संग मेरें ॥।
मुखही मौन धर अधर ओटदे दशन दामिनी चमकत तेरें॥।१॥
त्यज नूपुर कटि क्षुद्रघंटिका श्रवण सुनत खगमृग हेरें॥।
चतुर्भुजदास स्वामिनी शृंगार सोंज निपटनिकट गिरिधर पियनरें ॥२॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-103 | Nat |
Jhoothi meethi batiyaan lalan manuhar curran aaye .. | झूठी मीठी बतियां ललन मनुहार करन आये ॥
कहा कहिये तेरे हृदयकी सुंदरताई जैसे तन श्याम तेसेई हो मन तातें ब्रजयुवतिन मनभाये ॥ १॥॥
कित सकुचत पिय खरे नीके लागत प्राणपियाके रंगछाये ॥|
धन्यधन्यहो ते त्रिया कोन सुकृत कीने ताते गोविंदप्रभु पिय पाये ॥२॥ | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-103 | Nat |
Roop dekh nayana palak laagen naheen .. | रूप देख नयना पलक लागें नहीं ॥
गोवरधनधरके अंग अंग पर दृष्टि परत चित रहत तहींतहीं ।। १॥।
कहारी कहों अंग अंगकी बानिक चितचोर्यो माग दही ॥
कुंभनदास प्रभुके मिलनकी सुंदर बात सखियनसो कही ।॥२॥। | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-103 | Nat |
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