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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aage gaay paachhen gaay ita gaay uta gaay govind koo gaayan mein vasavoi bhaave .. | आगे गाय पाछें गाय इत गाय उत गाय गोविंद को गायन में वसवोई भावे ॥
गायन के संग धावे गायनमें सचुपावे गायन कीखुर रेणु अंग लपटावे ॥१॥
गायनसों क्रजछायो बैकुंठ विसरायो गायन के हेत कर गिरिलेउठावे
छीतस्वामी गिरिधारी विट्ठलेश वपुधारी ग्यारियाको भेख धरें गायनमें आवे ॥१॥ | Aavni | NityaPad-104 | Poorvi |
Hoto bhaee virah khilaano avadhi aas laagi sajniri .. | होतो भई विरह खिलानो अवधि आस लागी सजनीरी ।।
घरीघरी पलपल वरस वरस जात विनके दरस विन पलक लगें न पलकोना ॥। १॥
जोईजोई कहें रंगरटना देखो पंछी परवश रात जगोना ॥।
कही न जाय कछु सुंदरघनके प्रभुप्रीतकरीकेधोंटोना ॥२॥। | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-104 | Nat |
Kadambachadh kaanh bulawat gaiyaan .. | कदंबचढ कान्ह बुलावत गैयां ॥
मोहनमुरलीको शब्दसुनतही जहाँतहाँ ते उठ गैया ॥१॥॥
आवोआवो सखा संगके पाई है एकठैयां ॥।
गोविंद प्रभु बलदाऊसो कहनलगे अब घरकों बगदैयां ॥२॥ | Sandhya Aarti Gaye Bulayeve | NityaPad-104 | Poorvi |
Hamein vrajraj laadileson kaaj .. | हमें ब्रजराज लाडिलेसों काज ॥
यश अपयशको हमें काहा डर कहिनों होय सो कहिलेउ आज ॥। १॥
केधों काहू कृपाकरीधो न करीजो सन्मुख ब्रजनृप युवराज ॥
गोदिंदप्रभुकी कृपा चाहिये जोहें सकलघोष सिरताज ॥ २।। | Sheet Kaal Bhog Samaye | NityaPad-104 | Nat |
Terho tair kardab chadh doorjaatahen gaiyaan .. | टेरहो टेर कर्दब चढ दूरजातहें गैयां ॥
तुह्यारी टेर सुनत बगदेंगीपाछे पीजे घैयाँ ॥॥१॥
झटकत रई पतूखी फारत दयावत नंददुहैयां ॥
हमतें बहुत तिहारे गोधन हसत कहाहो भैया ॥ २॥
आज हमारी घिरतन-घेरी उतहीकों जातहें धैया ॥
रामदासप्रभुपर हँकत आंई हेरी देत कन्हैया ।। ३।। | Sandhya Aarti Gaye Bulayeve | NityaPad-104 | Poorvi |
Govind girichadh terat gaay .. | गोविंद गिरिचढ टेरत गाय ।।
गांग बुलाई धौमर धौरी टेरत वेणु बजाय ॥ १॥
श्रवण नादसुन मुख तुणधर सब चितई सीस उठाय ॥
प्रेम विवशव्हेहूंकमार चहुंदिशते उलटी धाय ॥।२॥।
च॒तुर्भुजप्रभु पटपीत लियें कर आनंद उर न समाय ॥
पोछत रेणु धेनुके मुखतें गिरि गोवर्धनराय ॥। ३॥॥ | Sandhya Aarti Gaye Bulayeve | NityaPad-104 | Poorvi |
Dharein baanki paag baanki chandrika vaanke viharilal.. | धरें बांकी पाग बांकी चंद्रिका वांके विहारीलाल॥
वांकी चाल चलत वांकी गति वांके बचन रसाल ॥। १॥
वांको तिलक वांकी भृगुरेखा वांकी पहिरे गुंजमाल ॥
गोबवरधन अपने कर धरकें वांके भ येहें गोपाल ॥२॥
वांकीखोर सांकरी वांकी हमसूधीहे गिरिधरलाल ॥
नंददास सूधेकिन बोलोहेंवरसानेकी ग्वाल ॥ ३॥ | Aavni | NityaPad-105 | Poorvi |
Moso queyon naan bolere nandke laal tero kahaa liye jaat .. | मोसो क्यों न बोलेरे नंदके लाल तेरो कहा लिये जात ॥
छांडदेअंचलहोतहेगहरुजानतहो ऐसी बाल ॥१॥
बनते आवत कमल फिराबत तापरगावत तान रसाल ॥
धोंधीके प्रभु हाथ दूर राखो टूटेगी मोतिन माल ॥। २॥। | Aavni | NityaPad-105 | Poorvi |
Dharey teddy paag tedhhi chandvika tedhe tribhangilal.. | धरे टेडी पाग टेढी चंद्विका टेढे त्रिभंगीलाल॥
कुंडलकिरण मानोंकोटि रवि उदय होत उर राजत वनमाल ॥। १॥
सांवरे बदन पीतांबर ओढे बजावतमुरली मधुर रसाल ॥
नंददास बनते ब्रज आवत संगलिये व्रजबाल ॥।२॥। | Aavni | NityaPad-105 | Poorvi |
Aavaben maaee vrajalalana dukhmochan .. godhansang | आवबें माई ब्रजललना दुःखमोचन ॥ गोधनसंग
क्वाणितकरमुरली शरद कमलदल लोचन॥। १॥। कटितट लालकाछिनी काछें
ओढें पीत पिछोरी ॥| आपन हसत हसावत ग्वालन राग अलापत गोरी ।।२॥।
तुलसीके पत्र पहुपकी मालागुहि ग्वालन पहिरावें ॥। बालगोपाल नंदजूकेढोटा
प्रधुरिसी वेणु बजावें ॥३॥ बरषत कुसुम देवमुनिहरषत मोही ब्रजकीनारी ॥।
कृष्णदासप्रभु रसिकमुकुटमणि लाल गोवर्धनधारी ॥।४॥ | Aavni | NityaPad-105 | Gori |
Gauraj raajat saanwal anga .. dekh sakhee banaten vraj aavat govindagodhan sanga .. 1... | गौरज राजत सांवल अंग ॥ देख सखी बनतें ब्रज आवत गोविंदगोधन संग ॥ १॥।
अंबुज बदन नयन युगखंजन क्रीडत अपने रंग ॥
कुंचित केशसुदेश मानों अलि शोभित ये संग प्रसंग ॥२॥|
कबहुंक वेणु बजावत कर धरनानातान तरंग ॥
चतुर्भुज प्रभु गिरिधरनागर पर बारो कोटि अनंग ॥।३॥ | Aavni | NityaPad-105 | Gori |
Haaken hatak hatak gaay thathak thathak rahee gokulki gully sub sankari... | हाकें हटक हटक गाय ठठक ठठक रही गोकुलकी गली सब सांकरी।॥
जारी अटारी झरोखन मोखन झांकत दुरदुर ठोरठोरते परत कांकरी ॥१॥
चंपकली कुंदकली वरषत रसभरी तामें पुन देखियत लिखेहें आंकरी ॥
नंददासप्रभु जहीं जहीं द्वारें ठाठे होत तहीं तहीं
बचन मांगत लटक लटक जात काहूसों हांकरी काहूसें नाकरी ॥।२॥ | Aavni | NityaPad-105 | Poorvi |
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