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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Mohan neck sunavahu gori.. banate aavat kunwarkanhaiya pahopmal | मोहन नेक सुनावहू गोरी।। बनते आवत कुंवरकन्हैया प होपमाल
ले दोरी ॥१॥ नंद लाडले मुरत्ती बजाई परगई प्रीति ठगोरी || परमानंद प्रभु सुवन
नंदके दुहदई धूरम धोरी ।॥।२॥। | Aavni | NityaPad-106 | Gori |
Kanakkundal kapolmandit gaurajachhurat sukesh .| madgaj chaal | कनककुंडल कपोलमंडित गौरजछुरत सुकेश ।| मदगज चाल
चलत सुरनर मुनि लाडिले ब्रज कुंवर नरेश ।॥९॥ नयन चकोर किये ब्रजवासी
पीवत बदन राकेश ॥ अतिप्रफुल्लित मुख कमल सबनके
गोपकुलनलिनदिनेश ।।२॥ अतिमदतरण विघूर्णित लोचन अतिविकसत कृपा
आवेश॥ चलत मधुर वरषत गोविंदप्रभु ब्रज द्वारेंद्वारें प्रवेश ॥। ३।। | Aavni | NityaPad-106 | Gori |
Aao merey govindagokulke chandaa. bhaee buddy vaar khelat | आओ मेरे गोविंदगोकुलके चंदा। भई बडी वार खेलत
यमुनातट बदन दिखाय देउ आनंदा ॥ १॥॥ गाय आवनकी भईहे विरियां दिनमणि
किरण होत अतिमंदा ॥ आये मेरे तातमात छतियां लाग गोविंदप्रभु ब्रजजन
सुखकंदा॥।२॥ | Aavni | NityaPad-106 | Gori |
Maiya yaate bhaee aber.. aavat bhaaj gaee aeka gaiya jaay dhasi bunn | मैया याते भई अबेर।। आवत भाज गई एक गैया जाय धसी बन
फेर ॥१॥ दोर ग्वाल सब वाके पाछे पकरनकी कर आस || चढकदंब पीतांबर
फेरच्यो आय गई मोपास ॥। २॥। में चुचक ार पीठ कर फेर्यो लहडे लई लगाय |।
बतिया सुनत रसिकप्रीतमकी मनफूली यशुमति माय ।।३॥। | Aavni | NityaPad-106 | Gori |
Chandrama natwari maanon saanjhasmein banate vraj aavat nritya karann .. | चंद्रमा नटवारी मानों सांझसमें बनते व्रज आवत नृत्य करण ॥
उड्डगण मानों पहोप अंजुली अंबर अरुण वरण॥ १॥ नंदीमुख सनमुख व्हे वामदेव
मनावेन विध्नहरण ॥ नंददास प्रभु गोपिनके हित बंसी धरी गिरिधरण ॥२॥। | Aavni | NityaPad-106 | Gori |
Barajun koti ghoonghataki oat.. tou naan rahat nayan niyaare nicus | बरजूं कोटि घूंघटकी ओट॥ तोउ न रहत नयन नियारे निकस
करतहें चोट ॥१॥ पाछें फिर देखें कोऊ ठाढे सुंदरवर एक ढोट।। परमानंदस्वामी
रतिनायक लगी प्रीतकी चोट ॥। २।॥। | Aavni | NityaPad-106 | Gori |
Banate aavat gawat gori .. haath lakutia gayanpache dhota | बनते आवत गावत गोरी ॥ हाथ लकुटिया गायनपाछे ढोटा
यशुमतिकोरी ॥१॥ मुरलीअधरधरें नंदनंदन मानों लगी ठगोरी || याहीते
कुलकानहरीहे ओढे पीतपिछोरी ॥२॥। ब्रजवधू अटन चढ देखत रूप निरख भई
बोरी ॥ नंददास जिन हरिम्ुख निरख्यो तिनको भाग्य बडोरी ॥। ३॥॥ | Aavni | NityaPad-107 | Gori |
Chala sakhee chala aho vraj penth lageehe tahaan bikaat hariprem .. | चल सखी चल अहो ब्रज पेंठ लगीहे तहां बिकात हरिप्रेम ॥
सुठसोंघो प्राणनके पलटें उलट धरो यह नमे ॥१।। आनभांत पायबो दुर्लभ कोटिक
खर्चो हेम ॥ रामदासप्रभु रत्मनअमोलक सखी पाइयतहें एम ।२॥ | Aavni | NityaPad-107 | Gori |
Kamalmukh shobhit sunder venu ..| mohan taal bajawat gawat | कमलमुख शोभित सुंदर वेनु ॥| मोहन ताल बजावत गावत
आवत चारे धेनु ॥ १॥। कुंचित केश सुदेश बदनपर जनु साज्यो अलिसेन ॥ सहि
नसकत मुरली मधुपीवत चाहत आपने एन ॥२॥ भृकुटी चारु चापकरलीने
भयो सहायकमेन ॥ सूरदासप्रभु अधरसुधा लग उपज्यो कठिनकुचेन ॥॥३॥। | Aavni | NityaPad-107 | Gori |
Cone russ gopin lino ghoont | madangopal nikat karpaaye | कोन रस गोपिन लीनो घूंट | मदनगोपाल निकट करपाये
प्रेमकामकी लूट ॥। १॥ निरख स्वरूप नंदनंदनको लोकलाज गई छूट ॥ परमानंद
वेदसागरकी मर्यादा गई टूट ।॥॥२॥ | Aavni | NityaPad-107 | Gori |
Aavat kalhaki saanjh dekhyori gaayan maanjh conco dhotari | आवत काल्हकी सांझ देख्योरी गायन मांझ कोनको ढोटारी
माई सीसमोर पख्ियां | अतसी कुसुम तन चंचल दीरघ नयन मानों रस परी
लरत युगअखियां ॥१॥ धातूको तिलकदियें गुंजनके हार हियें उपमानवनेदियें
जेतीतेतीनखियां।॥। राजत पीत पीछोरी मुरली बजावे गोरी देख भई बोरी एकटक
रही अखियां ॥२॥ चलत नसूधे मग डगमगत परत पग भामिनी भवन लांई हाथ
धरें करिब्रयां ॥ मानदासप्रभु चितचोर देखजिऊं ओरना उपावदाबव सुनो मेरी
सखियां ॥३॥ | Aavni | NityaPad-107 | Gori |
Harison aeka russ preeti rahiri ..| tanman praan samarpan keeno apano | हरिसों एक रस प्रीति रहीरी ॥| तनमन प्राण समर्पण कीनो अपनो
नेम ब्रत लेनि वहीरी ॥। १॥ प ्रथम भयो अनुराग दृष्टितें मानों रंकनिधि लूट लईरी ॥
कहत सुनत चित अनत न भटक्यो वेही हिलगजिय पेठ गईरी ॥२॥ मर्यादा
उललंघ सबनकी लोकवेद उपहास सहीरी ॥ परमानंददास गोपिनकी प्रेमकथा
शुक व्यास कहीरी ॥।३॥ | Aavni | NityaPad-107 | Gori |
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