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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Pyaare avadhi turry .. jihin darr darpat soee bhaeehen nazano drishti
प्यारे अवधि टरी ॥ जिहिं डर डरपत सोई भईहें नाजानो दृष्टि कोन करी ॥। १।। एक निमिष मोपें रहो नपरेरी आलीरी उडक्यो नजात गगन चढ़िरे ॥। सूरदासप्रभु वे बहुनायक विरहअग्निमें जात जरी ॥२॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-110
Nayaki
Mero piya rasiyari sunari sakhee tero dosh naheen .. naval lalco
मेरो पिय रसियारी सुनरी सखी तेरो दोष नहीं ॥ नवल लालको सब कोउचाहत कोन कोन के मन बसियारी ॥। १॥॥ एकनसों नयना जोरे एकनसो भ्रोंह मरोरें एकनसों मुख हसियारी ॥ कृष्णजीवन लछीराम के प्रभुमाई संग डोलत पूरण शशियारी ॥ २॥
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NityaPad-110
Nayaki
Baaron mean khanjan aaleeke doogan parr bhramar munn .. atihasi loney
बारों मीन खंजन आलीके दूगन पर भ्रमर मन ।। अतिहसि लोने लोने अतिही सुढार ढारे अति कजरारे भारे विनही अंजन ।।१॥ श्वेत असित कटाक्षन तारे उपमाको मृगही कुंजन ॥ परमानंदप्रभु रसवश करलीने प्यारीजूके मनके रंजन ॥२॥।
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NityaPad-110
Nayaki
Chaley anat dhokhe aaye merenso tou sakuch rahehi banegi ..
चले अनत धोखे आये मेरेंसो तो सकुच रहेही बनेगी ॥ तिहारे मिलेकी फूलपीर आवबे वांकी मोहि अवधि आस तारे भोरलो गनेगी ॥। १॥। तुम बहुनायक सबसुखदायक दोऊधाकों सोचकिये प्रीततो तनेगी ।। जाहीको सुहाग भाग ताहीको लहनो जगन्नाथप्रभु प्यारे रसमेंसनेगी ॥॥२।।
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NityaPad-110
Nayaki
Yeh munn lagyori mero sundarasyam aheer sou ||
यह मन लाग्योरी मेरो सुंदरस्याम अहीर सो || निश बासर मोहि कल नपरतहें कैसे राखो मन धीरसों ॥ १ घाटवाट मोहि रोकत टोकत ग्वालबाल संग भीरसों ॥ कृष्णजीवन लछीराम के प्रभु मोहि यों सुध जाय शरीरसों ॥२॥।
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NityaPad-110
Nayaki
Pyaare avadhivadi ghar aavan kii ..
प्यारे अवधिवदी घर आवन की ॥ जिहिजिहि जानी तिहि रति मानी टेव परीरी मोहि खिजावनकी ।। १॥| बहुत गई अब थोरीसी रही यारे विरहनी विरह जगावनकी ॥ सूरदासप्रभुसो जाय कहियो आपही रीझे और रिझावन की ॥२॥
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NityaPad-110
Nayaki
Mileki phool nayanahi kahey deit tere ..
मिलेकी फूल नयनाही कहे देत तेरे ॥ श्याम सुंदर मुखचुंबनपरसे नाचत मुदित अनेरे ॥ १॥। नंदनंदनपें गयो चाहत है मारग श्रवणनघेरे । कुंभनदास गिरिधरन मिलनकू करत चिन्ह दशफेरे ॥१॥।
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NityaPad-110
Nayaki
Adhar madhur mukharit mohanvans ... chalat driganchal chapal karat
अधर मधुर मुखरित मोहनवंस ॥। चलत दृगंचल चपल करत अतिबिलुलित पारिजात अवतंस ॥१॥ मानों गजराज कलभ अतिमद गलित आवत लटकत भुजधेरें प्रिया सखा अंस ॥ गोविंदप्रभुको जु श्रीदामा प्रभूति सब जयजय करत प्रसंस ॥२।।
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NityaPad-111
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Sakhiho alkan beach champakali gangani .. jagamagaat heera
सखीहो अलकन बीच चंपकली गनगनी ।। जगमगात हीरा लाल कुल्हे पर पाग चोकरी अति बनी ॥ १॥| सुभग नयन तरुण मदमाते मुसकाते आनअन।॥। गोविंदफप्रभु ब्रजराजकुंवर धन्य धन्यहो धन्य धन्य ॥२॥
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NityaPad-111
Nayaki
Aaj baney sakhee nandkumar .. vambhag vrishbhan nandini
आज बने सखी नंदकुमार ॥ वामभाग वृषभान नंदिनी ललितादिक गावे सिंघद्वार ॥९॥ कंचनधार लियेजु कमलकर मुक्ताफल फूलनके हार ॥ रोरीको सिर तिलक विराजत करत आरती हरख अपार ॥२॥ यह जोरी अबिचल श्रीवूंदावन देत असीस सकल ब्रजनार ॥ कुंजमहलमें राजत दोऊ परमानंददास बलहार ॥। ३॥
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NityaPad-111
Kanharo
Aavari bawri oojari paagmein melaken baandhyo manjulchota ...
आवरी बावरी ऊजरी पागमें मेलकें बांध्यो मंजुलचोटा ॥। चंचललोचन चारु मनोहर अबही गहि आन्योहै खंजन जोटा ।।१॥| देखत रूपठगोरीसी लागत नयनन सेन निमेषकी ओटा || नंददास रतिराज कोटिवारों आज बन्यों ब्रजराजको ढोटा ।।२॥
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NityaPad-111
Kanharo
Pyaari kamalvadan tero yaaheete dharey heen rahat hein kamal curr ...
प्यारी कमलवदन तेरो याहीते धरे हीं रहत हें कमल कर ॥। वरहीचंद देख कछु अनुसारयाहीते धरेयही रहतहें माथें पर १॥ दशनजोत अनुसार याहीतें धरत कंठ मोतिन लर || कंचन वरण तेरो याहीतें प्यारी याहीते धरे रहत पीतांबर ॥ २॥ तुब स्वर कंठ मिलत कछुयाहीते धरत बंसी अधर | गोविंदबल इम कहत प्यारी सो इनवातन नेक नरह्यो जात वीतत बासर ॥ २॥।
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