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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Tihaaro daras mohi bhaave sriyamunaji ..
तिहारो दरस मोहि भावे श्रीयमुनाजी ॥ श्रीगोकुलके निकट बहत हो लहरनकी छबि आवे ॥१॥ सुखदेनी दुःखहरनी श्रीजमुनाजी जे जनप्रात उठ न्हावे। मदनमोहनजुकी खरी हु पियारी पटरानी जु कहावे ॥। २॥। बृंदावनमेंरास रच्यो हे मोहन मुरली बजावें ॥ सूरदास प्रभु तिहारे मिलनकों वेद विमल जस गावें ॥३॥
Shree Yamunaji
NityaPad-010
Ramkali
Sreejmunaji adhamuddhaarani main jaani |
श्रीजमुनाजी अधमउद्धारनी मैं जानी | गोधनसंग श्यामघनसुंदर ललितत्रिभंगी दानी ॥१॥ गंगाचरन परसतें पावन हरसिरचिकुर समानी ॥। सात समुद्र भेद यमभागिनी हरि नखशिख लपटानी ॥ २॥| रासरसिकमणि नृत्यपरायण प्रेमपुंजठकुरानी ॥ आलिंगन चुंबन रस विलसत कृष्णपुलिनरजधानी ॥। ३॥ ग्रीष्मऋतु सुखदेत नाथ कुं संग राधिकारानी ॥ गोविंदप्रभुरवितनया प्यारी भक्तिमुक्तिकी खानी ॥।४॥
Shree Yamunaji
NityaPad-010
Ramkali
Srijmunajiki mahima mopein varani naan jaaee ..
श्रीजमुनाजीकी महिमा मोपें वरनी न जाई ॥ सूरसुता घनश्यामवरन प्रफुल्लित रूप निकाई।॥। १॥ श्रीहरि गोपवधू द्विज सब श्रीगोकुलके लरकाई ॥ ब्रजाधीश प्रभु आदि भक्तनकों सकलसिद्धि सुखदाई ॥।२॥
Shree Yamunaji
NityaPad-011
Ramkali
Tum summ or naan koee sreejmunaji ..|
तुम सम ओर न कोई श्रीजमुनाजी ॥| करो कृपा मोहि दीन जानकें निज ब्रजवासो होई ॥१॥ राखो चरण शरन तरणितनया जन्म आपदा खोई ।| यह संसार स्वारथकों सबविध सुत्बंधु सगो न कोई ॥।२॥। प्रेमभजनमेंकरत विध्नता संत संतापे सोई | ताको संग मोहि सपने न दीजे मांगत नयन भररोई ॥३॥ गरलपान डारत अमृतमें विषयारससों मोई | रसिक कहै दीन होयमांगू लहर समुद्र समोई ॥४॥।
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NityaPad-011
Ramkali
Tihaaro daras houn paauun sreejmunaji ..
तिहारो दरस हों पाऊं श्रीजमुनाजी ॥ श्रीगोवरधन श्रीवृंदावन ब्रजरज अंग लगाऊं ॥।१॥ दिन दसपांच रहों श्रीगोकुल ठकुरानीघाटहूं न्हाऊं ॥ दासन ऊपर करो कृपा संतनके संग आऊं ॥२॥
Shree Yamunaji
NityaPad-011
Ramkali
Jamunasi naheen koee dukkhaharani ..
जमुनासी नहीं कोई दुःखहरनी ॥ जाके स्नानते मिटत हे पाप होतहे आनंद सुख्रकी जु करनी ॥१॥ महिमा अगाध अपार इनके गुण बेदपुराण न बरणी ॥ कहत ब्रजपति तुम सबन को समुजाय छूटे यमडर जो आवे इनकी शरणी ॥२॥।
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NityaPad-011
Ramkali
Jamuna jamuna naam bhajo ..
जमुना जम्ुुना नाम भजो ॥ हरखत करो आराधन इनको ओरको पंथ तजो ॥१॥ देहें सकल पदारथ तुमकों इनके नाम रजो ॥ व्रजपति की अतिही पियारी ताते सकल सिंगार सजो ॥॥२॥।
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NityaPad-011
Ramkali
Nirakhat hii munn atee anand bhayo dekh prabhaat prabhakarkanya ...
निरखत ही मन अति आनंद भयो देख प्रभात प्रभाकरकन्या ॥। जलपरसत ही सकल अघ भाजे ज्यौं हरि देख हरणकी सनन्‍या ॥१॥ ओर जीवनकों औरनकी गति मेरी गति तो तुमहि अनन्या ॥ १॥ व्रजपति की तुम अतिहि पियारी तुम संगमतें जान्हवी धन्या।
Shree Yamunaji
NityaPad-011
Ramkali
Jagatamen bamunaji paramkripal | binati karat turat sunlini
जगतमें बमुनाजी परमकृपाल | बिनती करत तुरत सुनलीनी भये मोपें दयाल ।। १॥॥ जो कोऊ मज्जन करत निरंतर तातें डरपतहें यमकाल ।। ब्रजपतिकी अति प्यारी कालिंदी स्मरत होत निहाल ॥२॥।
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NityaPad-012
Ramkali
Jayati bhanutnaya charanyugal vandey..
जयति भानुतनया चरणयुगल वंदे॥ जयति ब्रजराजनंदप्रिये सर्वदा देत आनंद ज्यों शरदचंदे ॥१॥ जयति सकलसुखकारिणी कृष्णमनहारिणी श्रीगोकुल निकट बहत मंदे ॥। जाके तट निकट हरि रासमंडलरच्यो तहां नृत्यत ताता थेई थंदे ।२।। जयति कलिंदगिरिनंदिनी देत आनंदिनी भक्तके हरत सब दुःख दंदे ॥ चित्तमें ध्यान धर मुदित ब्रजपति कहें जयति यमुने जयति नंदनंदे ॥३॥।
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NityaPad-012
Ramkali
Namo taranitanaya parampuneet jagpavani krishnamanbhavani
नमो तरणितनया परमपुनीत जगपावनी कृष्णमनभावनी रुचिरनामा )| अखिलसुखदायिनी सबसिद्धिहेतु श्रीराधिकारमणरतिकरण शयामा॥। १॥ विमलजल सुमन काननमोदयुत पुलिन अतिरम्य प्रियव्रजकिशोरा ।।
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NityaPad-012
Ramkali
Sreejmunaji tihaaro pulin mohi bhaaven ..
श्रीजमुनाजी तिहारो पुलिन मोहि भावें ॥ सुरब्रह्मादिक ध्यान धरतहें सो सुपने नहिं पावें॥९॥ बिच बिच कुंजसदन अतिसुंदर श्यामाश्याम सुहावें ॥ चहूंदिस सकलफूल अति फूले गुहि गुहि कंठ धरावें | २॥ कुसुमनके बीजना जो संवारे सखियन बांह दुरावें । सूरदास प्रभु सबसुखसागरदिनदिन सोभा पावें ॥३॥
Shree Yamunaji
NityaPad-012
Ramkali

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