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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Jahaan tahaan dhara parat dharaare mohan tere nayan .. jey nikharat tinake
जहां तहां ढर परत ढरारे मोहन तेरे नयन ॥ जे निखरत तिनके मन वशकर सोपतहे ले मेंन ॥१॥ छिनसन्मुख छिनहीं होत टेढे एके अवस्था कबहुं नऐंन ॥ रसिक प्रीतम ताकें विनदेखें छिन नहीं मनमें चेन ॥ २॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-113
Adano
Piya teree chitbanahin meey tona .. tanmandhan bisar‌you jabaheete
पिय तेरी चितबनहीं मे टोना ॥ तनमनधन बिसर्‌यो जबहीते देख्यो स्थामसलोना ।।१॥ ढिंगरहवेकू हो विकलमन भावत नाहिं नभोना ॥। लोग चवाव करत घरघर प्रतिधर रहिये जियमोंना ॥२॥ छूटगई लोकलाज सुतपतिकी ओर कहा अब होना ॥ रसिक प्रीतमकी बांनिक निरखत भूलगई गृहगोना ॥ ३॥
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-113
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Shyam salone gaatahen kahuko dhota.. aaihun dekh khirak mukh
श्याम सलोने गातहें काहूको ढोटा।। आईहूं देख खिरक मुख ठाढो मकछु कहेनकी बात ॥१॥ कमल फिरावत नयन नचावत मोतन मुरमुसकात ॥ छबिकेबल जगजीत गर्वभरद्योमेन मानों इतरात ॥ २।। नखसिख रूपअमनूपरूप छबि कविपे वरन्यो न जात ॥ नंददास चातक की चोंचपुट सबधन कैसे समात ॥। ३॥
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NityaPad-114
Adano
Kahaari kahon mohan mukhshobha kahaa karun sirparihai thagori
कहारी कहों मोहन मुखशोभा कहा करुं सिरपरीहै ठगोरी रूपदेख मेरो मन भयो लोभा ॥। १॥। अंग अंग लावण्यरूप छबि मानोंहो मदनद्गुम उपजी गोभा ॥ कृष्णदास गिरिधरन किये वश चपल कटाक्ष गढ़यो मन चोभा॥।२॥
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NityaPad-114
Adano
Ghoonghatke vagrot otarahi chotsharasana bhronh sayak drig ...
घूंघटके वगरोट ओटरहि चोटशरासन भ्रोंह सायक दृग ॥। वेध्योविदित चघपल प्लकन अलकनफणि नुृशंसवलि ढिग ॥ १॥| तेकरसायल नायक कानन सुन सुंदरी सुंदर सरको जग ॥ बचन प्रसंस असंभुज हरिधर करि करुणा ज्यूं आभूषणको नग ॥।२॥ चितचितयो फिर दसा अनोखी अधरमधुर सुधि भई जोहूं लग ॥| सूरदास संयोग येहि गति रतिविछुरेकी अकथ कथा खग ।।३॥
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NityaPad-114
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Tere lochan laachan mott .. prananathakon munn chitenchorat dey
तेरे लोचन लाचन मोट ॥ प्राणनाथकों मन चितेंचोरत दे घूंघटकी ओट ॥१॥ गिरिधर पियके नयन सन्मुख मिले करत रसघोट ॥ सुन कृष्णदास निरख बल इनकों न्याय लजत मनटोट ॥ २॥।
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Tere lochan lalach raasi .. piyake nayan madhup vashakeene bhronh
तेरे लोचन लालच रासी ॥ पियके नयन मधुप वशकीने भ्रोंह मेनकी पांसी ॥१॥ अब सखी तन देतन चितवन मिले करत उपहास ॥। कृष्णदासप्रभु गिरिधरमोहन रिझ्बत रूपविलास ॥।२॥
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Tere lochan lalach karat .. piyake nayanan sanmukh chitwat
तेरे लोचन लालच करत ॥ पियके नयनन सन्मुख चितवत धूले नेंक न टरत || ९॥ कवहुक सुमुख्त्रि तिरछे व्हैके नवरंगकों मनहरत ॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधरनागर सेनन दै दै लरत ॥।२॥
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-114
Adano
Taba mukh chand sahaj seetal jaamein yaabidhuten or bhaanti ..
तब मुख चंद सहज सीतल जामें याबिधुतें ओर भांति ॥ जाकों निशाराहु डर नाहि कलंक धर ओर नकछु दोष जाकी नित्यप्रति बढतीहें कांति ॥१॥ अलकनके मिष जाढिंग निसदिन रहतहें मधुपन की पांति॥| रसिक प्रीतमकों ताहीतें तो यह तज औरन सुहात ॥। २॥॥
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NityaPad-115
Adano
Sub brat bhang bhaye sakhi tabaten aeka hii brat nishchen curr leo |...
सब ब्रत भंग भए सखि तबतें एक हि ब्रत निश्चें कर लीयो |॥। खेलत खिरिक रसिक नंदनंदन आय अचानक दर्शन दियो ॥१९॥ लोकलाज कान कुलसीमा मानों सब संकल्पही कीयो।॥ मदनगोपाल मनोहर-मूरति नवरस सिंच सिरांनो हियो ॥२॥ व्यसन पर्‌यों संतत चितचाहत रूपसुधा लोचनभर पीयो ॥। चतुर्भजुप्रभु गिरिधनलाल छबि विनु देखें पल परत न जीयो ॥३॥॥
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NityaPad-115
Adano
Bhaave tohe hariki anand keli.. madangopal nikatkarpaaye
भावे तोहे हरिकी आनंद केलि॥ मदनगोपाल निकटकरपाए ज्यों भावें त्यों खेलि ॥९॥ कमलनयनकी भुजमनोहर अपुने कंठले मेलि ॥ प्रेमविवश ओर सावधानव्है छूटी अलक संकेलि ॥२॥ तरुण तमाल नंदके मंदन प्रिया कनककी बेली ॥ यह लपटानी दासपरमानंद मुक्ति पायनसी ठेली ॥।३॥।
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Tereri nava jovan key angarangse laagat param suhaaye.. jagmag
तेरेरी नव जोवन के अंगरंगसे लागत परम सुहाए।। जगमग जगमगहोत मनोमृदु कनक डंड पर ललित नग लगाए ॥१॥ तामें तू कुंवरि करउरजनकी प्रीति निरख यातें मोमन भोए ।। नंददासप्रभु प्यारीके अंतरठोर दे बाहिरनिकस आये ॥। २॥
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NityaPad-115
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