top of page
Kirtan Title
Kirtan
Category
Book-Page#
Raag
Myrie saanvaro jabate drishti paruyo .. vesh kishore sthamghansundar
माईरी सांवरो जबते दृष्टि परुयो ॥ वेष किशोर स्थामघनसुंदर अंग अंग प्रेम भरद्ो ॥१॥ टेढी पाग लटकी रही वामभाग तापर पेच जराय जरदओो ॥ साजे बागे रस अनुरागे मनमथ मानहरद्यों ॥२॥ मोतन हेर हसे मनमोहन तबते सुधिबुद्धि सब विसरओ ॥ अ्रीविद्डलगिरिधरन छबीलो नयननमांझ अरदयो ॥।३॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-115
Adano
Naan‍yayari tuu alak luddy .. nisivasar giridharan lalke
न्‍्यायरी तू अलक लडी ॥ निसीवासर गिरिधरन लालके हृदयमेरहेत गडी ॥९॥| तोहीलों सुख जोलों समीपरहे एकनिमिष भावत नही छड़ी ॥ कुमनदास स्वामिनी राधाहे ब्रजयुब॒तिन माझ बडी ॥२॥
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-115
Adano
Mille piya sankari gully .. madanmohan piya haskar daari
मिले पिय सांकरी गली ॥ मदनमोहन पिय हसकर डारी मोतन चंपकली ।।१॥ वारिज वदन देख विधकित भई घुंघटमें न समात अली ॥॥ मोविंदप्रभुप्यारी जु परस्पर रहे रसमत्तरली ॥ २॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-116
Bihagaro
Mohan mukharvindpar manmath kotik varori maaee ... jaheen
मोहन मुखारविंदपर मनमथ कोटिक वारोरी माई ॥। जहीं जहीं अंगना दृष्ट परतहें तहीं तहीं रहत लुभाई ।१॥ अलक तिलक कुंडल कपोल छबि एक रसना मोपें वरणि न जाई ॥ गोविंद प्रभुकी सुंदर बानिक पर बलबल रसिक चूडामणि राई ॥ २॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-116
Bihagaro
Sakhee aaj kahaa kaho tava roopaki nikai .. nakhsikhso
सखी आज कहा कहो तव रूपकी निकाई ॥ नखसिखसो अंग अंग लालगिरिधरन हित रचिपचि बिरंचि अद्भुतबनाई ॥॥१।॥| चाल अतिमराल जंघ कदलीखंभ कटिसिंघ गौरतन सुभग सींबा | उरज श्रीफलपक्व अलककेकी छटा बचन पिक मोहन कपोत ग्रीवा ॥२॥ तरल युगलोचन नील नलिन श्रीमोचन चिबरुक स्थामलबिंदु चारू लसे ॥ श्रवण तार्टंक हाटक रत्नखचितसो मधुछबि शोभित कपोलवसे ॥|३॥ अधरबंधूक थ्ुतिकुंद दशनावली ललितवर नासिका तिल प्रसूनबने ॥ निरख मुखचंद्रमा रवि संभ्रम चितचलत ततक्षण छबिकोकनदबने ॥।४॥ सकल श्रीसिंधु यह कहा भग वरणिये कोटिमुख जीभ परमित न पावे ॥ दासकुमनस्वामिनीको सुयश अंतरंग सहचरी मुदित गावे ॥५॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-116
Kalyan
Dekh jiuun maaee nayan rangilo | leey chala sakhiri tere payalagon
देख जिऊं माई नयन रंगीलो | ले चल सखीरी तेरे पायलागों गोवरधनधर छेलछबीलो ।। १॥ नवरंग नव॒ल नवलगुण नागर नवलरूप नवभांत न बीलो ॥ रसमें रसिक रसिकनी भ्रोंहन रसमय वचनरसाल रसीलो ॥। २॥ सुंदर सुभग सुभगता सीमा सुभगसुदेश सुभाग्य सुशीलो ॥ कृष्णदास प्रभु रसिक मुकुटमणि सुभगचरित्र रिपुदलन हठीलो ॥। ३॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-116
Adano
Balbal balkunwari radhika nandasuban jaason ratimani .. tuun
बलबल बलकुंवरि राधिका नंदसुबन जासों रतिमानी ॥ तूं अतिचतुर वे चतुरशिरोमणि प्रीतिकरी केंसें रहतहें छानी ।।१॥॥ वे जोधरत तन कनक पीत पटसो तोसब तेरी गति ठानी ॥ तें पुन श्याम सहज वे शोभा अंबरमिष अपने उर आनी ॥२॥ पुलकरोम अबहींड्े आयो निरखरूप निजदेह सयानी ॥ सूर सुजान सखीके बूझें प्रेमप्रकाश भयो वे हसानी ॥। ३॥
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-116
Bihagaro
Vidhaata vidahuun nazani .. sunder vadan pankarbekun romrom
विधाता विदहूं नजानी ॥ सुंदर वदन पानकरबेकूं रोमरोम प्रति नयनन दीने करी यह बात अयानी ॥ १॥ श्रवणसकल वपु होतरी मेरे सुनत पिय मुख अमृत मधुरबानी ॥ अरी मेरे भुजाहोती कोटिकोटि तोहों भेटती गोविंदप्रभुसो तो उनतपत बुझानी ॥ २॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-116
Bihagaro
Lalki rupmadhuri nayannirakh neck sakhiho mansij manharan
लालकी रूपमाधुरी नयननिरख नेक सखीहो मनसिज मनहरन हससांवरों सुकुमार नखशिख अंग उमग सौभाग्य सीमानकीहो ॥|१॥| लटपटी सुरंग पाग ढरकरही वामभाग चंपकली कुटिल अलक बीच बीच रखी ॥ आइयत दृगअरुण दंपति लोलकुंडल मंडित कपोल अधर अरुण दंपतिकी छबि क्योंहूँ नजात लखी ॥।२॥ अद्भुत भुजदंड मूलपीन अंस सानुकूल कनक कपिश दुकूलन शिख दामिनी दरषी | उरपर मंदारहार मुक्ता लखरसुढार मत्तद्विरद गति त्रियनकी देह दशा करषी ॥।३॥ मुकुलितवय नव किशोर वचन रचन चितके चोर मधुरितु पियसाय नूतमंजरी चरखी |। नटबर हरिवंश गान न रागिनी कल्याण तान सदन देख स्व॒रन कल इतेपर मुरलीका वरखी ।।४॥।
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-117
Kalyan
Jai laal favyo udo fenta gorey bhaal parr bendi laal soneke sootabane
जै लाल फव्यो उदो फेंटा गोरे भाल पर बेंदी लाल सोनेके सूतबने कलंगीके झुकेहैं दाहिने अलक स्थामपर करत हाल ॥।१॥ सुमन बनी नथ फेर फेरत पानखात मुसकात बाल॥ दरशन लखरिझवार रसिकपिय चले गोरस भरे वलल्‍लभ रसिक रसाल ।२॥
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-117
Iman
Kaajar binn kaaree teree ankhiyaan phulel binn chikur chikane
काजर बिन कारी तेरी अंखियां फुलेल बिन चिकुर चिकने अधर राते बिन पान ॥ मंजन बिन जोत दसन आछे आभूषण बिन केसी नीकी लागे तू सुजान ॥ १॥ बिन सुगन्ध तो तन सुगन्‍्धमय कोककला पढे बिन रति की खान॥। प्रभु कल्याण गिरिधरन लाल के तूही जीवन प्राण ॥॥२॥
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-117
Nayakee
Main jaba dekheri gopallal mohani moorati nandlal tunn munn dhananochhavar curran koo leey gairi ..
मैं जब देखेरी गोपाललाल मोहनी मूरति नंदलाल तन मन धननोछावर करन को ले गईरी ।। सुन्दर स्थाम उजागर नागर बाकी छबी चित चितेरे ने लिख लई॥१॥ गर सोहे बन माल देख मोही ब्रज की बाल या छबीपें हो मगन भई ॥ सूरदास प्रभु कौन मंत्र पढ डायोरी मुरली में गावत धुनि नई नई ॥।२॥
Shayan Darshan Sheetkal
NityaPad-118
Adano

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page