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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Chatkavari pawri pagan nagan jaree pahari nikse nandlal | चटकावरी पावरी पगन नगन जरी पहरि निकसे नंदलाल
पिया ॥ क टि तट चटकीलो रंगीलो छबीलो चपलाहूतें चपल काम रही सी
बिलोवत हिया ॥ १॥| जब उन मुसकाय चितयेरी मो तन निठुरन मुरझन झपकन
मन पलकन मनु पवन उलावे प्राण दिया ॥। नंददास प्रभु ता दिनतें मेरी गति हों
जानों के जाने मो जिया ॥२॥। | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-118 | Adano |
Llalan kahaan chaley chhip chhip key dharat pug baiyaan pucker moson kahoge baat ..| | ल्लालन कहां चले छिप छिप के धरत पग बैयां पकर मोसों कहोगे बात ॥|
ऐसी कौन त्रिय सोहागिन भागिन वाही के भुवन तुम रहोगे रात ॥१॥
ऐसी कोन मनमानी मेरी ओर देखो नाहीं काहे को सांची जुठी आय मिलाय सोहे मेरी खात ॥
चतुर बिहारी पिया तुम बहुनायक सांचे बोल करवे को आवोगे प्रात ॥२॥ | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-118 | Iman |
Sahaj uraj parr chhoot rahee lutt... kanak lataaten utar bhujangani | सहज उरज पर छूट रही लट।॥ कनक लतातें उतर भुजंगनि
अमृतपान मानो करति कनकघट॥ १॥
चितवति चार तोहे देखें त्रिक मोहे चिबुक बिन्दु बर अधर निकट ॥
चतुर्भुज प्रभु गिरिधरन रंगी रंग अतिबिचित्र गृहकुंज जमुनतट ॥२॥। | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-118 | Kalyan |
Pyaari tero mukhchanda summ karveko chandaa bahut tapayo.. | प्यारी तेरो मुखचंदा सम करवेको च ंदा बहुत तपयो।।
उडगनको ईस भयो पुनरोसधीस भयो ईससील लो गयो ॥। १॥।
सुधामय सरीर कियो बांटबांट सुरन दयो मरमरके फेर जियो तन धरकें नयो ॥
नंददासप्रभु प्यारी तदपि कछु न अर्थ सर्यों जाय समुद्र पर्यो बिधि बूडन न दयो ॥ २॥ | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-118 | Kalyan |
Saine dey bulaavo laal baithi hain jharokhe baal banathan key chhipari ... | सेन दे बुलावो लाल बैठी हैं झरोखे बाल बनठन के छिपरी ॥।
इत सिंघद्वार ठाडो ललन रसिकवर हाथन नौलासी लिये किये बिचित्र भेख अंग अंग रहे दीप री ॥१॥
रूप रिझवार ब्रजराज को कुंवर आली दृग अंकवार भर लिये पलकन झपरी ॥
दोऊ ओर प्रेम की झकोरन में नंददास प्रीत की ललित
गत चित चितेरेने लिख लई कठिन लिपरी ॥ । २॥॥ | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-118 | Adano |
Tereri badan kamalpar nandanandan chully murali nadkarat gunjar .. | तेरेरी बदन कमलपर नंदनंदन चली मुरली नादकरत गुंजार ॥
ललित त्रिभंगी तेरे रोमरोम रमरमे कर राखों उर हार ।| १॥
जा सुखकों सनकादिक इच्छत सो तेरे बसभए मुरार ॥
कल्यानके प्रभु कमलापति मिलवेको किनहुंन पायो पार ॥। २॥॥ | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-119 | Kanharo |
Radhejuko praan gobardhandhari .. | राधेजु को प्रान गोबरधनधारी ॥
तरुन तमाल ढिंग कनकलतासी हरिजुके प्रान राधिका प्यारी ॥१॥
मरकत मणि नंदलाल लाडिलों कंचन तन वृषभान दुलारी ॥
सूरदासप्रभु प्रीत निरंतर जोरी जुगलबने बनवारी ॥२॥ | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-119 | Bihaag |
Himritu sisirritu atee sukhdai .. | हिमऋतु सिसिरऋतु अति सुखदाई ॥
प्यारी जू के फरगुल सोहे प्रीतम ओढे सरस कवाई ।।१॥
पर गये परदा ललित तिवारी धरी अंगीठी अति सुखदाई ॥|
जरत अंगार घूम अंबर लो सरस सुगंध रहो तहां छाई ॥२॥
जब-जब मधुर सीत तन व्यापत बैठत अंग सो अंग मिलाई॥
श्री वल्लभ पद रज प्रताप ते रसिक सदा बलि जाई ॥। ३।। | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-119 | Kanharo |
Himkar sukhad saras rituai adbhut shobha barni naan jaaee ... | हिमकर सुखद सरस रितुआई अद्भुत शोभा बरनी न जाई ॥।
प्यारीजुके फरगुल सोहे प्रीतम ओढे सरस रजाई ॥१॥।
परेहें परदा ललित तिबारी धरी अंगीठी सुखदाई ॥
बरत अंगार धुप अंबरलों सरस सुगंध रहां तहांछाई ॥२।। | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-119 | Bihaag |
Aeye sir soney key sutan sohat paag pechan upar nug lagey .. | ए सिर सोने के सुतन सोहत पाग पेचन उपर नग लगे ॥
रतनारे ढरारे से लोचन मुरत मेन जग े ॥ १॥।
मुखकी मंजुलताई कापें बरनि न जाई चंचलता हसदूर भगे ॥
नंददास नंदरानी छबिनिरखत बार पिबत जल जिन काहुकी दृष्टि लगे॥१॥ | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-119 | Kanharo |
Baso merey nainan mein douu chand .. gaur burren vrishbhan nandini sthaam | बसो मेरे नैनन में दोऊ चंद ॥ गौर बरन वृषभान नंदिनी स्थाम
वरन नंद नंद॥१॥ कुंज निकुंज में बिहरत दोऊ अति सुख आनन्द कंद॥ रसिक
प्रीतम पिया रस में माते परो प्रेम के फंद ॥।२॥। | Shayan Darshan Sheetkal | NityaPad-119 | Bihaag |
Arrie tuu kaahe anmani bolatnaahin bulaayen .. avaloto tuu | अरी तू काहे अनमनी बोलतनाहिं बुलायें ॥ अवलोतो तू
हसत खेलतही कहाभयों मोहिं आये ॥१॥ नयन नीचेंकियें चितवन रुखदियें
तिरक्िभ्रुंह चढायें ॥ रसिक-प्रीतमपिय कबके ठाडे विनवत है परपायें ।।२॥ | Maan | NityaPad-120 | Kanharo |
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