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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aajabani vrishbhaankunvaridriti anchalvaarat trinatorat kahentabhaleju bhalein bhaama ..
आजबनी वृषभानकुंवरिदृती अंचलवारत तृणतोरत कहेंतभलेजु भलें भामा ॥ वदनजोति कंठपोति छोटी छोटी लरमोतिन की सादाशुंगारहार कुचविच अतिशोभितहें बोरसरीदामा ।। १॥ एकरसनां गुणअपार केसेंक वरणों विशद्‌की रति अंगअंग पियनमत अभिरामा ॥ गोविंदबल सरबी कहें रचिपचि विरंचि कीनी स्यामरमणको माई तूहीहे श्यामा ।।२॥
Maan
NityaPad-120
Kanharo
Harihonte haarihon laltihari pyaareeke paayan parpar .. rahee
हरिहोंते हारीहों लालतिहारी प्यारीके पायंन परपर ॥ रही सिरधरचरणन बडीबारभईं लीजिये मनाय रूठी मानत मानिह क्योंहूँ कर ॥।१॥ जेसेजेसें रातजात तेसेंतेसें सतरात मोसों नबतरात मानीहे में बांसूंहार | सुनतही बचन रसिकप्रीतम दूतीके आप उठ चले देखत बदन जात इतहीं ढार ॥२॥
Maan
NityaPad-120
Kanharo
Manini maan nihori ..
मानिनी मान निहोरी ॥ हों पठई तोहि लेन सांवरे चलरी गर्वकर थोरो ॥१॥ कुंजमहल ठाढे मनमोहन चितवत चंदचकोरो ॥ हरी दासके स्वामी श्यामा कुंजविहारी चलोरी होतहें बोरो ॥२॥
Maan
NityaPad-120
Kedaro
Chadhbadh widder gaee angauang manveli terein sabani ..
चढबढ विडर गई अंगऊअंग मानवेली तेरें सबानी ॥ हृदय आलवाल मध्य प्रकटभईरी आली प्रीतिपालीनीके कर छिन छिन रूसबो भयोपानी ॥१॥ कोनकोन अंगनते निरवारोरी आली अलक तिलक नयनन बेनन भ्रोहसों लपटानी ॥ नंददासप्रभु प्यारी दूती के वचनसुन छबीली राधे मंद मंद मुरमुसकानी ।२॥
Maan
NityaPad-120
Kanharo
Tuu mohi kitt lyrie yeh gully .. joe jiya darpatahin soibhai
तू मोहि कित लाईरी यह गली ॥ जो जिय डरपतहीं सोईभई आगें ठाडे मोहन अब कैसे जैवो मेरी माई ।१॥॥ रशन दशनधर करसुं करमीडत दूतीसों खीजत आनंद उर नसमाई ॥ गोविंदप्रभु की तेरी हिलमिल बातेंहो सबजानत भलीकीनी भले नगसों भेटकराई ।।२॥।
Maan
NityaPad-120
Nayaki
Laalan manaayo namanat ladili pyaari tihari atishay
लालन मनायो नमानत लाडिली प्यारी तिहारी अतिशय कोपभरी ॥ तुहारीसों अनेक यत्न छलबल सबकिये मानतो अब घटतनाहिन त्योंत्यों अतिरीस होतहैं खरी | १॥॥ सामदाम भेददंड एकोनहीं चितचुभत तापरहो पायपरी दंततृणधरी ॥ नाहिन कछू और उपाव आनबन्यो यह दाव गोविंदप्रभु आपुन चलिये तुम देखतही वाको मानछूट जेहें तिंहिंघरी ।॥२॥
Maan
NityaPad-121
Nayaki
Hoe toson abb kahaa kahon aliri konverki bulaavatahi
हो तोसों अब कहा कहों आलीरी कोनवेरकी बुलावतही मोहि। नवलनागर नवलकुंज कबके निस जागतहें प्रीतिकीतोवरही नकछू इतनी सकुच नाहिन तोहि ॥ १॥ कहा आयुस होतहै मोकों तुमतों सुहागके भर आवेश वसोई ॥ मोहि कहा तरोई प्राणप्रीतम सुखपावें सोईतो करोरीआली गोविंद प्रभु अपने कंठराखति पोहि ॥ २॥
Maan
NityaPad-121
Nayaki
Aapan chaliye laalan keejiye nalaaj || mossi jotum kotik
आपन चलिये लालन कीजिये नलाज || मोसी जोतुम कोटिक पठवो प्यारी नमानत आज ॥१॥ होंतो तिहारी आज्ञाकारी मोसों कहाकहेत महाराज ॥ नंददासप्रभु बडरे कहे गये आपकाज महाकाज ।। २॥।
Maan
NityaPad-121
Kedaro
Tum pahilen tou dekho aaya maniniki shobha laal paachhento
तुम पहिलें तो देखो आय मानिनीकी शोभा लाल पाछेंतो मनायलीजें प्यारेहो गोविंदा।। करपर धरकपोल रहीरी नयननमूद कमलविछाय मानों सोयो सूखचंदा ।। १॥ रिसभरी भ्रोंह तापर भ्रमर बेठे अरबरात इंदु तर आयो मकरंद अरविंदा ॥ नंददासप्रभु एसी काहेंकुं रुसैये बल जाको मुखदेखेते मिटत दुःखद्वंदा ॥ २॥
Maan
NityaPad-121
Udaano
Mangarh kyon huun natootat abalaake balko prataap .. aapan
मानगढ क्यों हूं नटूटत अबलाके बलको प्रताप ॥ आपन ढोवाचढ गिरिधरपिय अबलातू चिलाचांप मुक्तकटाक्ष घूंघटदरवाजो नहीं खूटत ॥१॥ विविध प्रणतहथ नालगोला बोलेंजू उछटपरत काम कोट नहीं फूटत ॥ गोविंदप्रभु सामदाम भेद दंड कर घेरापरञ्यो चहूं दिशसंचित रुख्याई जलक्योंहूँ नहीं खूटत ॥। २॥॥
Maan
NityaPad-121
Kedaro
Rusanon nakar pyaari rusbo nivaar .. kabkihon thhaadi toso
रूसनों नकर प्यारी रूसबो निवार ॥ कबकीहों ठाडी तोसो अरज करतहों रेनरही घड़ी चार ॥|१॥ मेरो कह्यों तू मान सुहागिन अतिसुंदर सुकुमार ॥ गोविंदप्रभुसों हिलमिल भामिन तनमन जोबनवार ॥। २।।
Maan
NityaPad-121
Nayaki
Ladili namaneho laal aapahin paaundhaaro jaise hathatyaje
लाडिली नमानेहो लाल आपहीं पाऊंधारो जैसे हठत्यजे प्यारी सोई यतन विचारो ॥१॥ वातेंतो बनाय कही जेती मति मेरी ॥ एकहूं नमाने हो लाल ऐसी त्रिया तेरी ॥२॥॥ आपनी चोपके काजें सख्ीभेष कीनो ।। भूषण वसन साजें बीना करलीनो ॥। ३॥ उतते आवत देखी चक्रत निहारी ॥ कोन गाम वसतहो रूपकी उजियारी ॥।४॥ गामतोहें नंदगाम तहांकीहों प्यारी ॥ नामहै सांवलसखोी तेरे हितकारी ॥५॥| करसों करजोरें स्थामा निकट बैठाई॥ सप्तस्वरन साज मिल स्वल्प बजाई ।॥६॥ रीझ मोतीहार चारु उरले पहरावें ॥ ऐसेही हमारो . भट्दू सांवरो बजावें ॥७॥ जोईजोई इच्छा होय सोई माग लीजे ॥ ऐसी बातें सांवरेसो कबहुं मान न कीजे ॥८॥| मुखसो मुखजोरें स्थाम दरपन दिखावें॥। निरख छबीली छब्िप्रतिबिंब लजाबें॥ ९॥॥ छल तोऊ घर आयो हस पीठ दीनी ॥। नंददास बलप्यारी आंकों भरलीनी ।।१०॥
Maan
NityaPad-122
Bihagaro

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