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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Kaahekun tum pyaare sakhee bhesh keeno .. bhushanavasansajen | काहेकूं तुम प्यारे सखी भेष कीनो ॥ भूषणवसनसाजें
वी नाकरलीनो ॥१॥ मोतिन मांग गुही तुम कैसेहों प्यारे ।। हम नहिं जाने पहचाने
कोनके दुलारे ॥ ३॥ रूँंसवेको नेम नित्य प्यारी तुम लीनो ॥ ताहीके कारण हम
सखी भेषकीनो ।। ३॥ सबसखी दुरदुर देखी कुंजनकी गलियाँ ॥ नंददास प्रभुप्यारे
मानलीनी रलियां ॥४॥ | Maan | NityaPad-122 | Bihagaro |
Uttar naan deit mohani maun dhara baithi piyavachan sunat nekhu naan | उत्तर न देत मोहनी मौन धर बैठी पियवचन सुनत नेकहु न
मटकी ॥ तूं कब चलेंगी आली रजनी गईरी सब शशिवाहन धरनी
धुकलटकी ॥१॥ घरेंरी पाणिकपोलन में करेंकलोल भुव नखलिखत तेरे कहा
जात घटकी ॥ मुग्धवधु रीस काहेको करत हठ परम भामती तू नागरनटकी ।।२॥
धुवसमान फिर आयेरी सप्तरिषि अबही वारहे ंतमचोररटकी ॥ मानदासबल
राधिका कुंवरी चल नीकी शोभा लागे तेरे नीलांबर पटकी ॥।३॥। | Maan | NityaPad-122 | Kedaro |
Maanan deit aliri munn tero manveko karat .. piyaki | मानन देत आलीरी मन तेरो मानवेको करत ॥ पियकी
आरतदेख मेरेजिय दयाहोत तेरी दृष्टि देखदेख डरत ॥। १॥ मोसो कहत कहा मेरो
नदोष कछू निपट हठीली धायक्योंन अंकभरत ॥ नंददासप्रभु दूतीकें वचनसुन
ऐसे अंगढरचो जेसे आंचके लगेते राग ढरत ॥२॥। | Maan | NityaPad-122 | Kedaro |
Manawat haar pariri maaee .. tuu chataten mathot narathe houn hari laine | मनावत हार परीरी माई ॥ तू चटतें मटहोत नराथे हों हरि लेन
पटाई।॥। १॥ राजकुमार होयसो जाने के गुरुहोय पढाई ।। नंदनंदनको छांड महातम
अपनी राखबडाई ॥ २॥| ठोडीहाथचलीदेदूतती तिरछी भ्रोंह चढाई ।। परमानंदप्रभु
करोगगी दुल्हैया तो बावा की जाई ॥३॥ | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Bolat madangopal vinodi chalari nagri chhandadegju .. | बोलत मदनगोपाल विनोदी चलरी नागरी छांडदेगजू ॥
मेरे जानगिरिधरन मिलनकों फूलेफूले तेरे अंगजू ।|१॥
तब उर पर युगल नारंगफलरंग छबीले स्यामरंगजू।।
कृष्णदासप्रभू गिरिधर नवरंग भू चपलमन्मथ
मानभंगजू।।२॥ | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Aavat jaatahin tou haar pariri .. jyon jyon pyaaro vinatikar | आवत जातहीं तो हार परीरी ॥ ज्यों ज्यों प्यारो विनतीकर
प्रठवत त्यौंत्यौं तूं गढमान चढीरी ॥१॥। तिहारे बीच परेसोई बावरी हों
चौगानकीगेंद भईरी ॥ गोविंदप्रभुकों वेगमिल भामिनी सुभग यामिनी
जातवहीरी ॥२॥। | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Maan naan ghatanoali tero ghatju gaee sabren .. bolan laage | मान न घटनओओआली तेरो घटजु गई सबरेन ॥ बोलन लागे
तमचर ठोर-ठोरतू अजहूं मबोलीरी पिकबेन ।|९॥ कमलकली विकसी तूं न
नेक हसी कोन टेवपरी मृगशावक नयन | नंददास प्रभुको नेह देख हांसी आवत
वे बैठेहें रचिरचि सेन ॥। २॥ | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Aajshubhalagna tere millen koo giridharnagar gunin ganaayo ... | आजशुभलग्न तेरे मिलन को गिरिधरनागर गुनिन गनायो ॥।
प्रथमसमागमतें क्षित डरपत बडेभाग्य संचित फलपायो ।॥। १।।
नवनिकुंज मंडप सखी सुमति-विधाता सुहस्त बनायो।।
रसिकलाल तब संग प्रमुदित कृष्णदास मंगलयश गायो ॥२॥ | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Mohanrai maniri teree batiyaan .. madanmohan piya baithe | मोहनराय मानीरी तेरी बतियां ॥ मदनमोहन पिय बैठे
एकांतव्है दीनो सुहस्त जाय पतियां | ९॥ जबलग धीरजधररी सयानी दिनगत
याम जोलों होय अधरतिया॥ कुमनदासप्रभु दूती के वचनसुन परमसीतल भई
छतियां ॥२॥। | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Tuun chala mero raakh maan .. way tou tihaaro magjovtahen tuu tou nipat | तूं चल मेरो राख मान ॥ वे तो तिहारो मगजोवतहें तू तो निपट
अयान ॥|१॥ काहूकी कही सुन धरीये जियमें करीये अपने मनकों सयान॥। ऊठ
चल हिलमिल कहत गदाधर नेक न करेंरी तूं कोनकी कान ॥।२॥। | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Krishna chandra aavenge merey aajari maaee bahutdinanaki avadhi | कृष्ण चंद्र आवेंगे मेरे आजरी माई बहुतदिननकी अवधि
आज ॥ तनमन जोबन आनंदित वदनहास नयन सेनवेनमधुरथार मध्यकरकें
पहेलें मिलहोरी भेटसाज ॥। १॥ गृहगृहतें सखी बाल लेंहुरी अति प्रवीन वीनाकरधर
हरिसंग करहों रतिसुख समाज ॥ मकरंद नंद सुतकिशोर रिझ्ञबोंगी गानतान
आनआन आछेहूं कृष्ण रागरंग रिझायकें लेहोरी एक छत्रराज ॥२॥ | Maan | NityaPad-123 | Bihagaro |
Atihin nithuratriyamaanavati kyonhuun queyonhuun manai .. | अतिहीं निठुरत्रियमानवती क्योंहूँ क््योंहूँ मनाई ।।
आपने जानमें बहुतभांत करनीकी युक्ति बनाई ॥१॥
जे तुमकही कपटकी बातें अनेकयत्न करके दिखराई।।
रसिकप्रीतम आप चलियें मिलवें रसवशकीजें मोहिदीजें रीझ बधाई ।।२॥ | Maan | NityaPad-124 | Bihagaro |
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