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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Merey bultaae nahin boltari kaahekon bhulawat .. | मेरे बुल्ताए नाहिन बोलतरी काहेकों भुलावत ॥
हों पठई प् यारे तोहि बोलन उलटी नागरी आंख दिखावत ।।१॥
तेरे मन भावे नंदनंदन तू हरिके चितमन
बुद्धिभावत को जाने कामिनी कौतुककी मोसिनकुं बात नबोरावत ॥ ३॥|
धरतमुरलिका आपतें अधरकर तनमनभई मधुर कलगाबत ॥।
कृष्णदास स्वामीगिरिधरकी मोहनमूरति कुचबीच अरुझावत ॥३।। | Maan | NityaPad-124 | Bihagaro |
Kaho kense keeje hoe aise kaptin koo vishvaas .. ekanke | कहो केंसे कीजे हो ऐसे कपटिन को विश्वास ॥ एकनके
चित्तलेत चोरकें एकन लेत उसास ॥॥|१॥ जो कोऊ मान करत ताहि मनावत
चेरीव्हे रहें तासों होत उदास ॥ रसिक-प्रीतमकी जानी नपरे हांसी कीथों
उपहास ॥२॥ | Maan | NityaPad-124 | Bihagaro |
Chalchal mero kahyotunman naatar pachtehe karman... abahinto | चलचल मेरो कह्योतूंमान नातर पछतेहे करमान॥। अबहींतो
पिय पायपरतहें त्यज अभिमान पावेंगी अधिक सनमान ॥।१॥ बहुनायक
सुखदायक सोंकरि काहूको निवह्मोहे गुमान ॥ रसिक प्रीतमसो पियजो पैयेतो
सहिये कोटिक अपमान ।। २॥ | Maan | NityaPad-124 | Bihagaro |
Radha hari atithi tumhare .. | राधा हरि अतिथि तुम्हारे ॥
रतिपति अशनकाल गृहआए उठ आदरदे कहें हमारे ॥१॥
आसनआधी सेज सरक दे सुख पगरस पखारे ॥
अरघादिक आनंदअमृतले ललितलोल लोचनजल ढारे।। २॥
धूप सुवास स्वास सौरभ मुखविहसनिदरधरें दीपउज्यारे ।।
बचनरचन भ्रूमंग अवरअंग प्रेममधुररस परोसन न्यारे ॥३॥
उचितकेलि कटुतिक्त करजद्विज अमलऊरोजफल कठिन करारे ॥
मर्दनक्षार कषायकवचग्रह चुंबनादिसमर्पि संभारे ॥४॥
अधरसीधुउपदेशसिंचशुचि विधिपूरण मुखबास संवारे ॥
सूर सुकृत संतोषस्थामकों बहुत पुण्य यह व्रतप्रतिपारे ।५)। | Maan | NityaPad-125 | Bihagaro |
Doridori aavat mohi manawat damkharach kachhu molalairi .. | दोरीदोरी आवत मोहि मनावत दामखरच कछु मोललईरी ॥
अचरापसार के मोहि खिजावततहों तेरे बाबा की चेरी भईरी ॥ १॥॥
जारीजा सखी भवनआपने लखबातनकी एक कहीरी ॥
नंददास वे क्यों नहीं आवत उनके पायन कछु मेंहदी दईरी ॥॥२॥ | Maan | NityaPad-125 | Bihagaro |
Sikhwat ketee raati gaee. | सिखवत केती राति गई।
चंद्र उदे बर दीसनि लाग्यो तू नहिं और भई ॥
सुनि हो मुगध ! कह्ौ नहिं मानति जामी हृदे कई ।
परमानंद' प्रभु को नहि मिलती तौ प्रतिकूल दई ॥। | Maan | NityaPad-125 | Kalyan |
Aaj aalee acharaj suna merein preetam aae manaavan .. | आज आली अचरज सुन मेरें प्रीतम आए मनावन ॥
तूं जोनहिन दुहुनसमझावत रूसगए मनभावन ॥१॥
जांकी चरणरज ब्रह्मादिक सुरमुनि पशुपंछीगन पावन ।।
तबतें नबिसरत मोहि सखीरी रसिकराय मुखलावन ।।२॥ | Maan | NityaPad-125 | Bihagaro |
Sunat khisyani purry chala dooti preetam pein gaee haye lajaay .. | सुनत खिसयानी परी चल दूती प्रीतम पें गई हे लजाय ॥
बे तो नहि मानतकोटि जतन कीए हो पचिहारी बोहोत मनाय ॥१॥|
आपुहि मनाड़ लीजे मोसों एसी कही सुनो अब कहा कीजे लाल दूसरो उपाय ॥
नंददास प्रभु एसी सुनि आपहि पधारे तब पोढे अपनी प्यारी को उर लाय ॥।२॥ | Maan | NityaPad-125 | Bihaag |
Aaj mein dekhe aliri sou douu mill podhe baatein karat .. | आज में देखे आलीरी सो दोऊ मिल पोढे बातें करत ॥
वदननिहारत परस कपोलन हँसहँस आंको भरत ।॥।१॥
कबहुक रतिकी सुरत भईरी जीयमनो एक लाज धरत ।।
रसिकप्रीतम पियप्यारी परस्पर एकरसब्है विहरत ॥२॥। | Paudhave | NityaPad-126 | Kedaro |
Podhemai lalan sez sukhakaari .. | पोढेमाई ललन सेज सुखकारी ॥
र॒त्नजटित सारोटा बैठी चांपत चरण वृषभान दुलारी || १॥
चरणकमल कुच कलशनपर धरें अंग अंग पुलकित ब्रजनारी।।
कर कर बिरी खवावत पियकों मधुरवचन बोलत मनुहारी ॥। २॥।
कंठ लगाय भुजदें सिरहानें अधर पान मुखकरत पियारी ॥
रीझउगार देत गोविंदप्रभु सुरत तरंग रंगरह्मों भारी ॥ ३॥। | Paudhave | NityaPad-126 | Bihaag |
Subhag shabyapempodhe kunwar rasikavar rasamse angsang jaay raine | सुभग शब्यापेंपोढे कुंवर रसिकवर रसमसे अंगसंग जाय रेन
जागेहें ॥ शिथिल बसन बिचभूषण अलकछबि सोये मुखसुखसो लपट
उरलागेहें ॥१॥ झुकझक आवें नयन आलस झलक रहो लटपटी बात कहेत
अति अनुरागेहें। सूरदास नंदसुवन तुहयारो यश जानों प्राणपिया सुखहीमें रसपागे
हें॥२॥ | Paudhave | NityaPad-126 | Bihaag |
Manaavan ayeri manaavan jaanyo haye praneshwar prananke pyaare ... | मनावन आयेरी मनावन जान्यो हे प्राणेश्वर प्राणनके प्यारे ॥।
कोन कोन गुन रूप बरनों प्यारे तिहारे उनतन नयना न्यारे ॥१॥
मेरी सी मोसों ओरनकी ओरनसों एसे व रंग ढंग प्यारे तिहारे।।
नंददास प्रभु एक रस क्यों म रहो केसे के प्राण पत्थारे ॥। २।। | Maan | NityaPad-126 | Kanharo |
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