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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Podhemai lalan sez sukhakaari || | पोढेमाई ललन सेज सुखकारी ||
मणिगण खचित रंगमहल में संग श्रीराध ाप्यारी || १॥
सहचरी गानकरत मधुरेस्वर श्रवणसुनत सुरत हितकारी ॥।
तनमन मगन भये पियप्यारी निरखदास बलहारी ॥। २॥ | Paudhave | NityaPad-126 | Kedaro |
Chaampat charan mohanlal .. | चांपत चरण मोहनलाल ॥
पलका पोढी कुवरिराधे सुंदरी नवबाल |।१॥
कबहुं करगहि नयनमिलावत कबहु छुवावत भाल ॥
नंददासप्रभुछब्िनिहारत प्रीतके प्रतिपाल ।। २।। | Paudhave | NityaPad-126 | Bihaag |
Heim ritu sisir ritu atee sukhdai .. pyaari joo key fargul sohe | हेम ऋतु सिसिर ऋतु अति सुखदाई ॥ प्यारी जु के फरगुल सोहे
प्रीतम ओढी हे सरस कवाई ॥।१॥ रंगमहेल में परदा सोहाये धरी अंगीठी अति
सुखदाई ॥ बरत अंगार अंबर अति महकत सरस सुगन्ध रहो तहां छाई ।२॥
कबहुक मधुर सीत तन व्यापत बेठत अंगसों अंग मिलाई ॥ श्रीवललभपदरज
प्रतापतें दास रसिक तहां बल जाईं॥। ३।। | Paudhave | NityaPad-127 | Nayaki |
Neeki ritu laagat hain atee seet kii .. uns bhuja dey podhe piya | नीकी ऋतु लागत हैं अति सीत की ॥ अंस भुजा दे पोढे पिय
प्यारी बात करत रसरीत की ।॥। ९॥॥। बन गड्ड एक रजाई भीतर होत परस्पर जीतकी ।।
गदाधर प्रभु हेमनत मनावत चाह बढी नव प्रीत की ॥ २॥ | Paudhave | NityaPad-127 | Nayaki |
Jaag uthhe taba kunwar kanhai ... maiya kahangai moe dhingate sangsovat | जाग उठे तब कुंवर कन्हाई ॥। मैया कहांगई मो ढिंगते संगसोवत
जान्यो बलभाई ॥।१॥ जागे नंद यशोदा जागी बोललिये हरिपास।॥ सोवत झिझक
उठे काहेते दीपक कियो प्रकाश ।॥॥२॥ सपने कुदपर्यों यमुना दहमें काहूदियो
गिराय ॥ सूरस्यामसों कहत यशोदा जिनहो लाल डराय ।३॥ | Paudhave | NityaPad-127 | Bihaag |
Dekhat nandkanh atisovat .. bhookhebhaye aap bunn bheetar yeh | देखत नंदकान्ह अतिसोवत ॥ भूखेभये आप बन भीतर यह
कहि कहि मुख जोबत ।॥।|१॥ कह्यो नहीं मानत काहूको आप हठीले
दोऊ बीर ॥ वारबार तन पोछत करसों अतिहि प्रेमकी पीर ॥२॥ सेज
मंगाय लई तहां अपनी जहां स्थामबलराम ॥ सूरदासप्रभुके ढिंग सोईसंग
पोढी नंदवाम ॥। ३।। | Paudhave | NityaPad-127 | Bihaag |
Sakhiyan ruchiruchi sez banaai .. | सखियन रुचिरुचि सेज बनाई ॥
रंगमहलमें पेरेहें परदा धरी अंगीठी सुखदाई ॥१॥
सीतसमें ग्रीष्म ऋतुकीनी अतिसुंदर वरराईं ॥
श्रीविद्लगिरिधारी कृपानिधि पोढे ओढ रजाई ॥।२॥ | Paudhave | NityaPad-127 | Bihaag |
Sobat neend aaya gaee shyaamahin . mahari uthh podhaay duhanako | सोबत नींद आय गई श्यामहीं । महरि उठ पोढाय दुहनको
आपन लगी गृहकामही ।॥॥१॥ वबरजतहें घर के लोगनकों हरी ये लेले नामही ॥
गाढेबोल नपावत कोऊ डर मोहन बलराम ही॥ शिवसनकादिक अंत नहिपावत
ध्यावतहें हिनयामही ।। सूरदासप्रभु ब्रह्मसनातन सो सतोबत नंदधामहीं ॥। ३॥ | Paudhave | NityaPad-127 | |
Vilasat rangmahal rung laal .. rangras kii karat vatiyaan sanga | विलसत रंगमहल रंग लाल ॥ रंगरस की करत वतियां संग
पोढी बाल ॥१॥ खचीत परदा परे चहुँ दिस मुंदे झरोखा जाल ॥| जगमगात
पावक अंगीठीं गान तान रसाल ॥। २॥ नवल नारी नीहारी प्रीतम व्हे रही उरमाल ॥।
नंददास प्रभु युगल छबी उपर डारो सर्वस वार ॥ ३।। | Paudhave | NityaPad-127 | Nayaki |
Podhe pyaari radhika sanga shyam | kanak manimay jagamagaat | पोढे प्यारी राधिका संग श्याम | कनक मनिमय जगमगात
अति रंगमहल निज धाम ।। १॥ परे परदा सरस सुन्दर सहचरी ढिंग भाम ।। सुरत
केलि विलास विलसत राधिका भुज बाम ॥। २॥ किये रसबस प्रानपिय को लुंटी
सब निश काम ॥ जान्यो न हित हरिवंस बीतत जात बासर बाम ।। ३॥। | Paudhave | NityaPad-128 | Nayaki |
Podhe sthaam shyama sanga || rangmahal kii lalit tibari parada | पोढ़े स्थाम श्यामा संग || रंगमहल की ललित तीबारी परदा
परे सुरंग ॥ १ जगमगात पावक अंगीठी भरे रतिरसरंग ॥ नंददास दम्पति सुरत
सुख जीत्यो मनमथ अंग ॥ २।। | Paudhave | NityaPad-128 | Nayaki |
Podhe naval laal giridhari .. rangmahal mein rachit sukh sajya | पोढे नवल लाल गिरिधारी ॥ रंगमहल में रचित सुख सज्या
संग सोभित व्रखभान दुलारी ।|१॥ लाल जरी दही को बागो बन्यो अंग लाल
कुल्हे शोभित अति भारी ॥ सुधन चरण बनी अति गाढी झलमलात बीच बीच
जरतारी ॥।२॥ अतलस को लहेंगा प्यारी कटि कंचुकी झुंमक सारी ।। मधुरे सुर
गावत केदारो मीठी तान लेत सुखकारी ॥।|३॥ परदा परे मनोहर द्वारे दीपक
जोत सरस उजीयारी ॥ चतुर्भुजदास निरक दम्पति सुख तनमन धन कीनो
बलिहारी ।।४॥ | Paudhave | NityaPad-128 | Nayaki |
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