top of page
Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
|---|---|---|---|---|
Podhe laal sez surang .. adharamrit paavat piwawat pranpiya | पोढे लाल सेज सुरंग ॥ अधरामृत पावत पिवावत प्राणपिय ा
के संग ॥|९॥ जगमगात आगे अंगीठी परदा परे पचरंग ॥। रंगमहेल में फीरत दोउ
बढी प्रेम तरंग॥२॥ ओढ रजाई। (ओढे) दोउ पोढे लिपटाय अंगसो अंग॥ सुरत
रस विलसत जबही तब मनही उठत तरंग ॥। ३॥। | Paudhave | NityaPad-128 | Nayaki |
Podhe rahey kreedat rangrai .... rung mahal kii lalit tibari parada parey | पोढे रहे क्रीडत रंगराई ॥॥ रंग महल की ललित तिबारी परदा परे
सुखदाई ॥१॥ अरसपरस दोउ करत रंगरस पोढे ओढ रजाई ॥ जगमगात अंगीठी
हुतासन सोभा सहज निकाई ॥२॥ रीझ उगार लेत हँसी प्यारी आनन्द उर न
समाई ॥ जुग जुग राज करो पिय प्यारी सूरदास बल जाई ॥ ३ | Paudhave | NityaPad-128 | Nayaki |
Podhe rangmahal nandlal |. douu or dharee haye angeethi parada parey | पोढे रंगमहल नन्दलाल |। दोऊ ओर धरी हे अंगीठी परदा परे
रंग लाल ॥९॥ ललितादिक सखी चरन चांपत निरखत होत बेहाल ॥। रसिक
स्वामिनी लाय लई उर भरि लीनी अंक वारि ॥।२॥ | Paudhave | NityaPad-129 | Nayaki |
Rattan jatit palka parr podhe keli karat douu milat paraspar ... | रतन जटित पलका पर पोढे केलि करत दोऊ मिलत परस्पर ॥।
पर गये परदा ललित महल में जगमग होत अंगीठी ढींग धरि ॥१॥ रति रसकेल
बविलास हरिरस अधरामृत पीवत हे दृग भारि ।। मदनमोहन गिरधर क्रीडा विनोद
पुदित परस्पर भवर चहेल करि ॥२॥॥ | Paudhave | NityaPad-129 | Bihaag |
Arrie inn sore sanvaar odhai.. seeraten khasi payan tarr aaee seet | अरी इन सोर संवार ओढाई॥ सीरतें खसि पायन तर आई सीत
सत्तावन आई ॥|१॥ अतिसे श्रमित जानि प्यारीने दीनी सोर संवारि ॥| परमानन्द
प्रभु पर तनमन जोबन वार ॥२॥। | Paudhave | NityaPad-129 | Bihaag |
Aeye douu surat sez sukh soye .. karat paan makrand priya priya | ए दोऊ सुरत सेज सुख सोये ॥ करत पान मकरंद प्रिया प्रिय
अधर पानरस जोये ॥१॥ तनसों तनमन सो मन मिलवत नेंन पानरस भोहे ॥
कृष्णदास प्रभु सुखनिधि विलसत मदन मान सब खोए ॥ २॥ | Paudhave | NityaPad-129 | Bihaag |
Podhe maaee rangmahal girdhari .. sunder gaadi takiya sez rachee dharee | पोढे माई रंगमहल गिरधारी ॥ सुंदर गादी तकीया सेज रची धरी
अंगीठी सुखकारी ॥ १॥ कंठ लगाये भुज दे सिरहाने अधरामृत पीवत सुकुमारी ॥
बीन मधुरे सुर बजावत ललिता कृष्णदास बलिहारी ॥।२॥ | Paudhave | NityaPad-129 | Bihaag |
Podhi rahee piya sanga pyaari .. rangmahal mein dharee angeethi parada parey | पोढी रही पिय संग प्यारी ॥ रंगमहल में धरी अंगीठी परदा परे
सुखकारी ॥१॥ चित्र-विचित्र बनी चित्र सारी जगमगात अति भारी ॥ मुख
तंबोल ले खात खबावत अंक भरे गिरिधारी ॥ अति विचित्र गुनरूप आगरी ललिता
सरबी प्रचारी ॥ सूरदास प्रभु को अद्भुत सुख तनमन धन बलिहारी ॥ ३॥। | Paudhave | NityaPad-129 | Nayaki |
Podhe eyam raadhe sanga.. surang palang surang bichhona kasna kasey | पोढे एयाम राधे संग॥ सुरंग पलंग सुरंग बिछोना कसना कसे
सुरंग॥।१॥ सुरंग सरस रजाई नीकी ओढी हे दोउ अंग ॥ रहे हे लपटाय दोऊ मिल
रसिक निरखत ढंग ॥२॥ पोढे पिय दोउ सेज हरे ॥ प्रमुदित बान रस बरखत
आनन्द नेन भरे | ३॥ कनकबेली वृखभान नन्दिनी श्याम तमाल तरे || रतिपति
केलि करत रसिक पिय दसनन दिव्य झरे ।।४॥ | Paudhave | NityaPad-129 | Bihaag |
Podhe maaee preetam pyaari sanga .. rangmahal kii lalit thiwari | पोढे माई प्रीतम प्यारी संग ॥ रंगमहल की ललित ठिवारी
परदा परे हे सुरंग ॥ १॥॥ जगमगात पावक अंगीठी धरि रति रसरंग ।। नन्ददास प्रभु
प्यारी जीति हे मुदित अनंग ॥। २॥ | Paudhave | NityaPad-129 | Nayaki |
Podhe hari radhika key sanga .. | पोढे हरि राधिका के संग ॥
रंगमहलमें ललित तिबारी परदा परे सुरंग ॥१॥
झलमलात पावक अंगीठी रतन जटित बहोत रंग ॥
कुँभनदास प्रभु गोवर्धनधर मोहत कोटि अनंग ॥। २॥। | Paudhave | NityaPad-130 | Bihaag |
Podhe rangarmanirai .. | पोढे रंगरमनीराय ॥
रंगमहेल चित्र किये सुंदर जगमगात जुराय ॥।१॥
रत्नजटित की आगे अंगीठी परदा परे सुहाय ॥
बल जाऊं छबिली छबिपर कृष्णदास बलि जाय ॥।२॥ | Paudhave | NityaPad-130 | Bihaag |
bottom of page
