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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
God liye bal mohan dou odh rajaai bethi nanan‍darani .. parada
गोद लिये बल मोहन दोउ ओढ रजाई बेठी ननन्‍्दरानी ।। परदा डरे द्वार द्वारन प्रति रोहिनी धरी अंगीठी आनि ॥|१॥ मुख देखन गृह-गृह तें आई ब्रज ललना गावत मृदु वाणी ॥ द्वारकेस हरि हलधर मैया भैया बदन रहे लपटाई ॥२॥
Paudhave
NityaPad-130
Bihaag
Podhe hari rangmahal piya pyaari .
पोढे हरि रंगमहल पिय प्यारी । सुंदर रची हे सेज ता ऊपर तकिया धरे हे सवारी ।| १॥॥ जगमग होत अंगीठी पावक गोखन धरे हे दीप सुधारी । मधुर सुर गावत कोकिल कल कृष्णदास बलिहारी ॥। २॥।
Paudhave
NityaPad-130
Bihaag
Podhe rangmahal vrajnath .. rung raski karat batiyaan radhika leey
पोढे रंगमहल ब्रजनाथ ॥ रंग रसकी करत बतियां राधिका ले साथ ॥१॥ दोउ ओढ रजाई क्रीडत ग्रीवा भुजभर बाथ॥ परमानंदप्रभु कामआतुर मदन कियो सनाथ ।।२॥
Paudhave
NityaPad-130
Kedaro
Merey ladileho laal azhoon neendkaro palnaan naan sohayato godale suvaaun ..|shru.
मेरे लाडिलेहो लाल अजहून नींदकरो पलनाँ न सोहायतो गोदले सुवाऊं ॥|श्रु। आर छांडो गीत गाऊं हालरो हुलराउ ग्वालनके मुखकी कहानी सुनाउं ॥ १ कोनधों भवन आये काहूकी नजर लगी भोर ऋषिराज रक्षा बंधाउं ॥ मेरे व्रजईइश तुम एसी बुझो न रीस भोरहों कुंवर कान्ह झगुलीसिवाउं ॥२॥
Paudhave
NityaPad-130
Bihaag
Mangal maadho naam uchchaar..
मंगल माधो नाम उच्चार।। मंगल बदन कमल कर मंगल मंगल जनकी सदा संभार ।।१॥ देखत मंगल पूजत मंगल गावत मंगल चरित उदार ॥ मंगल श्रवण कथा रस मंगल मंगल तनु वसुदेव कुमार ॥२॥ गोकुल मंगल मधुवन मंगल मंगल रूचि वृंदावनचंद ॥ मंगल करत गोवर्धनधारी मंगल वेष यशोदानंद ॥।३॥ मंगल थेनु रेणुभू मंगल मंगल मधुर बजावत बेन ॥ मंगलगोपवधू परिरंभण मंगल कालिंदी पय्फेन ॥४॥ मंगल चरणकमल मुनिवंदित मंगल कीरति जगत निवास ॥ अनुदिन मंगल ध्यान धरत मुनि मंगलमति परमानंददास ॥५॥।
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-131
Bhairav
Mangal mangalam‌ vraj bhuvi mangalam‌ ..
मंगल मंगलम्‌ ब्रज भुवि मंगलम्‌ ॥ मंगलमिह श्रीनंदयशोदा नाम स्वकीर्तनमे तदरूचिरोत्संग सुलालित पालित रूपम्‌ ॥१॥ श्री श्रीकृष्ण इति श्रुति सारं नाम स्वार्तजनाशयतापापहमिति मंगलरावम्‌ ॥ व्रजसुंदरी वयस्यसुरभीवृंद मृगीगणनिरूपमभावा:मंगल सिंधु चयायम्‌ ॥२॥ मंगलमीषत्स्मितयु तमी क्षण भाषणमुन्नतनासापुटगत मुक्ताफलचलनम्‌ | कोमलचलदंगुलिदल संगत वेणुनिनाद विमोहित बूंदावन भुवि जाता ॥३॥। मंगलमखिलं गोपीशितुरति मंधथरगति विभ्रममोहितरासस्थितगानम्‌ ॥ त्वं जय सततं गोबर्धनधर पालय निजदासान्‌ ॥।४॥
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-131
Bhairav
Mangal aarti gopalki maaee ..
मंगल आरती गोपालकी माई ॥ नित्यप्रति मंगल होत निरख मुख चितवन नयन विशालकी ॥१॥ मंगल रूप स्याम सुंदरको मंगल भुकुटी सुभालकी ॥ चतुर्भुजप्रभु सदा मंगलनिधिबानिक गिरिधरलालकी ॥।२॥
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-131
Bhairav
Mangal roop yashodanand ..
मंगल रूप यशोदानंद ॥ मंगल मुकुट कानन में कुंडल मंगल तिलक विराजत चंद ॥१॥ मंगल भूषण सब अंग सोहत मंगल मूरति आनंद कंद।। मंगल लकुट कांखमें चांपे मंगल मुरलि बजावत मंद ॥२॥| मंगल चाल मनोहर मंगल दरशन होत मिटे दुखद्वूंद ॥ मंगल ब्रजपति नाम सबनको मंगलयश गावत श्रुतिछंद ।३॥
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-131
Bhairav
Ratnajatit kanakthal madhyasohen deepmal agaraadi chandanso
रत्नजटित कनकथाल मध्यसोहें दीपमाल अगरादि चंदनसो अतिसुगंध मिलाई ॥ घनन घनन घंटा घोर झनन झनन झालर झकोर ततथेई बोलेब्रजकी नारि सुहाई ॥|९॥ तननतनन तानमान रागरंग स्वरबंधान गोपी सब गावतहैं मंगल बधाई ॥ चतुर्भुन गिरिधरनलाल आरती बनी रसाल तनमनधन वारत है यशोमति नंदराई ॥॥२९॥।
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-132
Bibhaas
Mangalkaran harran munn aarati baarat mangal aarti baalaa ..
मंगलकरण हरण मन आरति बारत मंगल आरती बाला ॥ रजनीरसजागेअनुरागे प्रातअलसात शिधिल वसन और मरगजीमाला ॥। १॥ बैठे कुंजमहल सिंघासन श्रीवृषभानकुंवरि नंदलाला ॥ ब्रजजनमुदित ओटब्हे निरखतनिमिष न लागत लताद्रमजाला ॥।२॥
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-132
Bibhaas
Bhor bhaye dekho shrigiridharko kamalmukh .. mangal aarti karo
भोर भये देखो श्रीगिरिधरको कमलमुख ॥ मंगल आरती करो प्रातही नयन निरखत होत परम सुख ॥। १॥। लोचयन विशाल छबि संचि हृदयमें धरो कृपा अवलोकवेकोचारू भृकुटीरूख ॥ चतूर्भूजप्रभु गिरिधर आनंदनिधि दूर कर हो सबरेनको विरहदुख ।। २॥।
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-132
Bhairav
Sababidh mangal nandkolal .. kamalanayan baljaay yashoda
सबबिध मंगल नंदकोलाल ॥ कमलनयन बलजाय यशोदा न्हात खिजो जिन मेरे बाल ।। १॥| मंगल गावत मंगल मूरति मंगल लीला ललित गोपाल ॥ मंगल व्रजबासिनके घरघर नाचत गावत दे करताल ॥२॥ मंगल बृंदावन के रंजन मंगल मुरली शब्द रसाल॥ मंगल यश गावे परमानंद सखामंडली मध्य गोपाल ।। ३।।
Mangala Aarti ( Ushna Kaal)
NityaPad-132
Bhairav

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