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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Mangal aarti keeje bhor .. | मंगल आरती कीजे भोर ॥
मंगल जनम करम गुणमंगल मंगल यशोदा माखन चोर ॥ २॥
मंगल बेन मुकुट गुणमंगल मंगलरूप रमेमनमोर ।।
जनभगवान जगतमें मंगल मंगलराधा जुगलकिशोर ।२॥। | Mangala Aarti ( Ushna Kaal) | NityaPad-132 | Bilawal |
Praat samein giridharjuke sunnmmu nikibani mangal aarti ... | प्रात समें गिरिधरजूके सन््मु नीकीबनी मंगल आरती ॥।
कनकथाल दीपमाल बालन के करन में जगमग जगमग जोत होत चक्र सुकुमार
ती ॥१॥ झंझंझालर मधुर घंटा घननघनन बलैया कलैयाकी धुनि होत जब
चमरढारती ।। मुरारीदासप्रभुकी वदनकी छबि निरखत धन्यधन्य ये निकट
निहारती ॥२॥ | Mangala Aarti ( Ushna Kaal) | NityaPad-132 | Bibhaas |
Mangal aarti karman morr || bharam nissa beetee bhayo bhor .. 1.. | मंगल आरती करमन मोर || भरम निसा बीती भयो भोर ।। १॥
मंगल वाजत झालर ताल ॥ मंगल रूप उठे नंदलाल ॥|२॥
मंगल धूपदीप करजोर | मंगल सबविधि गावतहोर ।।३॥
मंगल उदयो मंगलरास ॥| मंगल बल परमानंददास ।।४।। | Mangala Aarti ( Ushna Kaal) | NityaPad-133 | Bilawal |
Nagri nandlal sanga rung bharirajen .. | नागरी नंदलाल संग रंग भरीराजें ॥
श्याम अंस बाहुदिये कुंबरि पुलक पुलकहिये मंदमंद हसन प्रिये कोटिमदन लाजें | १॥
तरूतमाल स्थामलाल लपटी अंग अंगवेलि निरख सखी छबि सुकेलि नुपूर कलवाजें ॥
दाम ोदर हित सुदेश शोभित सुंदर सुवेष नवलकुंज भ्रमरपुंज कोकिलकल गाजे ॥।२॥ | Mangla Darshan | NityaPad-133 | Bhairav |
Sumro natnagar varr sunder gopallal .. | सुमरो नटनागर वर सुंदर गोपाललाल ॥
सबदुख मिटलजेहें बे चिंतित लोचन विशाल ॥॥१॥
अलकन की झलकन लख पलकन गति भूलजात
भुवविलास मंदहास रदनबदन अति रसाल ॥
निंदित रवि कुंडल छबि गंडमुकुर झलमलात
पिच्छ गुच्छ कृत अवतंस इंदु मिल बिंदु भाल ॥२॥
अंग अंगजित अनंग माधुरी तरंगरंग
विमद मद गयंद होत देखत लटकीली चाल ॥।|
हसनलसन पीतवसन चारू हार वर शूंगार
तुलसी रचित कुसुम खचित पीन उर नवीनमाल ॥।३॥
ब्रजनरेश वंश दीप श्रीवुंदावनवरमहीप
श्रीवृषभानमानपात्र सहज दीनजन दयाल ॥
रसिक भूप रूपरासगुणनिधानजान राय
गदाधर प्रभुयुवती जनमुनि मनमानस मराल ॥४॥ | Mangla Darshan | NityaPad-133 | Bhairav |
Baanki bhaunh tedhhi pagpiyare anurag piyare pichhor madhya jhalkat | बांकी भौंह टेढी पागपियरे अनुराग पियरे पिछोर मध्य झलकत
तनियां ॥ निसके उनीदे नयन तोतरात मीठेबेन काजर की रेख माल छूटी
लरमनियां॥।१॥ यावक लग्यो ललाट सजकें सुरत नांट खोलूं कपाट तुम कुहकके
प्नियां ॥! मोहि त्यज रहोन््यारे सुनों गिरधारी प्यारे ताहीपे सिधारो क्योंन जाके
निशबनियां ॥२॥। सुन प्रियावचन रसिक धायलई उरलाय आनंदविनोद कीये
प्रेम मगनियां ।| गिरिधारीगोकुलेश रससों भीजे विशेष चतुरकों चित्त चोर॒यो
चतुर चिकनियां ॥३॥ | Mangla Darshan | NityaPad-133 | Bibhaas |
Vraj mangalki mangalarati .. | ब्रज मंगलकी मंगलआरती ॥
बहुबिध रत्नजटित कनकथार
भरे तामध्यजतरकपूरकी लेलेबारती ॥१॥
लेतबला करत न्योंछावर तनमनप्रान बारने वारती ॥
दास रसभरी यशोदा मगन भई अपआपनपो न संभारती ॥३॥ | Mangala Aarti ( Ushna Kaal) | NityaPad-133 | Bilawal |
Mangal aarti mill vaarati vrajnari mangalanidhi manlarupaki .. | मंगल आरती मिल वारती व्रजनारी मंगलनिधि मंलरूपकी ।।
बदनथार किरण नयन दीपजोति तामें पूरत नेह अनूपकी ॥
घंटा ताल मुदंग झालरी उपजत अवधर भूपकी ।॥
पियसुजान गिरिधरको वदनचंद देख मिटत धूपतें तपत मदन धूपकी ॥१॥ | Mangala Aarti ( Ushna Kaal) | NityaPad-133 | Bilawal |
Rasyamsindhuang chandanadigandh poojat patpeet madan lajawat | रस्यामसिंधुअंग चंदनादिगंध पूजत पटपीत मदन लजावत
सुभगतरंगमा || युवती सरिता अनंत मिलत शोभा समंत गुणसहित गरिष्ठभाव
भावसलिल संगमा | १॥ बदनकमल अलक मधुप नयन खंजरीट बीच अद्भुत
तिलकुसुमनाक भ्रोह भंगमा॥ श्रवणसुनत विमाहन चलकुंडल ताटंक गंडमंडित
मुसकान अधर रंगमा ॥२॥ नखसिख भूषण अमोल मनोहर मादक सुबोल
बैजयंती भूषित श्री उरज उतंगमा ॥ कृष्णदासप् रभु गिरिधर सुरत नाथ राधावर
विहरत नवकुंजमध्य थेईथेईथुंगमा ।। ३॥॥ | Mangla Darshan | NityaPad-134 | Bibhaas |
Shree vundavan navanikunj thaadhe uthbhor .. | श्री वुंदावन नवनिकुंज ठाढे उठभोर ॥
बाहें जोर बदन भोर हसत सुरत रतिसकुचत पुनकछु लजात नयन कोर ॥१॥
कबहुं करत वेणु नाद पायो सुधास्वाद पंछीजन प्रेममुदित बोलत चहू ओर ॥
रसिक प्रीतम छबि निहार प्रकट्यो रवि जियविचार बारबार उमग तहां नाचतहें मोर ॥२॥। | Mangla Darshan | NityaPad-134 | Bibhaas |
Praatasmein navkunjamahal mein sriradha or nand kishar .. dakshinkar | प्रातसमें नवकुंजमहल में श्रीराधा ओर नंद किशार ॥ दक्षिणकर
मुक्तास्थामाके त्यजत हंस ओर चुगत चकोर ॥१॥ तापर एक अधिक छबि
उपजत उपर भ्रमर करत घनघोर ॥ सूरदासप्रभु अति सकुचाने रवि शशि प्रकटत
एकहि ठोर ॥२॥ | Mangla Darshan | NityaPad-134 | Bibhaas |
Myrie sthamsundar bhorbhavan aagenvhai aave.. kabahu mukh mandahas | माईरी स्थामसुंदर भोरभवन आगेंव्है आवे।। कबहू मुख मंदहास
मेरे सखि सुखकी रासि कबहूं बेन कबहुं नयन सयनही जनावे ॥१॥ मेरी दधि
मथन वार उनकी उठनी सवार रई नेत माट समेत सकलहो विसरावें ॥ चतुर्भुज
प्रभु गिरिधर अंग अंग कोटि मदन म ूरति हसत चलत वनको सबहिनके चित्तही
चुरावे ॥२॥ | Mangla Darshan | NityaPad-135 | Bibhaas |
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