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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Naval douu banehen margaje baage... naval kunjate chaley bhor uthh
नवल दोऊ बनेहें मरगजे बागे॥। नवल कुंजते चले भोर उठ पियपाछे धनआगे ॥१॥| छूटीलट टूटी मणिमाला अर्धघुंघट छबिलागे।। खंडित अधर पयोधर मंडित प्रफुल्लित गंड विराजत दागे।। २॥ नखशिख कुसुम विशिख की सेना रण छूटेमन पागे ॥ व्यास स्वामिनीको सुख सर्वस्व लूट्यो स्थाम सुभागे ॥३॥
Mangla Darshan
NityaPad-138
Devgandhar
Naval vrajrajko laal thaadho sakhee lalit sanket butt nikat
नवल ब्रजराजको लाल ठाढो सखी ललित संकेत बट निकट सोहे ॥ देखरी देख अनिमेष या वेषको मुकुटकी लटक त्रिभुवनजु मोहे ॥१॥ स्वेदकण झलक कछु झुकीसी रहेत पलक प्रेमकी ललक रसरास कीये || धन्य बडभाग वृषभान नृपनंदिनी राधिका अंसपर बाहु दीये २ मणिजटित भूमिपर नवलता रहीझूम कुंजछबि पुंज बरणी न जाई ॥ नंदनंदन चरण परसहित जान यह मुनिनके मनन मिल पांत लाई ॥३॥ परम अदभुत रूप सकल सुख भूप यह मदनमोहन विना कछुन भावे ॥ धन्य हरिभक्त जिनकी कृपा तें सदा कृष्ण गुण गदाधर मिश्र गावे ।।४॥
Mangla Darshan
NityaPad-138
Khat
Sakhiri or sunon aeka baat.... aaj krishna merey grih aaye uthat
सखीरी ओर सुनों एक बात।॥। आज कृष्ण मेरे गृह आये उठत प्रातही प्रात ॥ १8 लटपटीपाग अटपटी बातन आलस वंत जूंभात ॥ काहेकूँ तेरेनयन ऊनीदे मोहन गृहकों जात ॥। २॥ आगें नंदद्वारव्है ठाडे ताते गएन संकात |। मानो साहराजगृह ठाडे देदे बीच भुजगात ॥ ३॥ ऐसी भीति कहांहें मोहनमें पूछी मुसकात ॥ कहाकरों जो प्रकट जानियों सूरस्थामसकुचात ।।४॥।
Mangla Darshan
NityaPad-139
Devgandhar
Madbhare matabaare name kholo kyon naan palaken .. pyaari uthh gharaten aaee
मदभरे मतबारे नेम खोलो क्यों न पलकें ॥ प्यारी उठ घरतें आइ झारी लाइ भरके ।॥॥१॥ मुखतो सोहे पूरणचंद एसी आड़ बनके ॥ अधरनकी लाली लाइ लरन मोती लटके ।।२॥। चलत मृदुगयन्द चाल शीशफूल झलके ॥। सूरके सलोनें श्याम देखो नयन भरके ॥२॥
Mangla Darshan
NityaPad-139
Bhairav
Aaj nandlal navkunj raspunjate, latak aaye sakhee bhawan
आज नंदलाल नवकुंज रसपुंजते, लटक आये सखी भवन मेरे ॥ हों ज़ु गमार सुख सेज में फस रही गिरिधरन सेन दे मधुर टेरे ॥१॥। जब में निंद्रा तजी सकल सिंगार सजि द्वार कपाट खोल चलि सवेरे | मुरली को नाद सुनि भ्रवन तब उठी चलि ढिंग आय पाय परी नाथ केरे ॥ २॥ मानों मकरंद उर महल में ले चली हसि हसि प्रेमसों बदन हेरे ॥। कृष्णदास कर जोर विनति करे धन्य बड़भाग सखी आजतेरे ॥ ३॥
Mangla Darshan
NityaPad-139
Bhairav
Douu alsaane raajat praat .. srivrikhbhan nandani nand suta
दोऊ अलसाने राजत प्रात ॥ श्रीवृखभान नंदनी नंद सुत रसिक सलौने गात॥।९॥ नील पीत अम्बर लपटानो छिन छिन अधिक सुहात |। मानहु घन दामिन अपनी छबि होई एक बिकसात ॥। २॥ बिन मकरंद अरबिंद वृुन्द मिल अंग अंग बिकसात ॥ सुखसागर गिरिधरन छबीलो निरख अनंग लजात ॥ ३॥
Mangla Darshan
NityaPad-139
Bibhaas
Aho nandlal hoe aaj latpati paag... chhoote chihur maano matt
अहो नंदलाल हो आज लटपटी पाग॥। छूटे चिहुर मानो मत्त मधुपगन उनमद राजीव राग ॥ १॥॥ पीक कपोल बोल अति व्याकुल अधरन अंजन लागे॥ दूरत न खंजन लसें रस भरे उनमद जामिनी जागे ॥ २॥ चंदन कूच उपटत उर नवनखहार बन्यो बिन बाग॥ विद्यापति रति श्रीगोपाल संगता भामिन के भाग ॥३॥
Mangla Darshan
NityaPad-139
Bilawal
Aeka dinn aapune khirkako jaatari mill gayo saanvaro
एक दिन आपुने खिरकको जातरी मिल गयो साँवरो हो अकेली । देख मोहि मंद मुसकाय नेनन हस्यो किंधौरी है तू कनकबेली ॥१॥॥ अतिही जगमग रही चूनरी रंगभरी कंचुकी कुचन पर अति विराजे ॥ शरदके चन्दसों बदन झगमग रहो देख या रूपको कौन ब्राजे ॥२स॥ नासिका नथनि झलमल विराजे रहो ऐसो बड़ो मुक्ता ते कहाँजु पायो ॥ ऐसो न देख्यो सुन्‍्यो कहूँ ना या देसमें लगत ही लपट मन लटक आयो ॥|३॥ चाल गजराजकी लंक मृगराजकी चिबुककी छबि देख चित्त चुरायो ॥ बंक अवलोकनि बडी अँखियनमांझ कौनके ठगन अंजन बनायो ॥४॥ जानती नाहि मैं नाथ तुम कौन हो करत हो जान जाकी बडाईं ॥ या गामकी रीत रसरीत जानों नहीं भये दिन चार गौनें जु आई।॥५॥! या गामकी रीत रसरीत सब हों कहों नेक बैठो चलो कुंज छाँही ॥ जान गई बात मग जा चल्यो साँवरे कुंज तर हमें कछु काज नाहि ॥॥६॥ मुसक ठाडी भई धाय भुज गहि लई अधरन पान दे उर लगाई ॥ दई एक फूलकी माल पहेरायके कही जू मैं हाथ अपुने बनाई ॥७॥ ता दिनतें लाल उरमांझ जगमग रहो रैन दिन कछुहु नाहीं सुहावे ॥ सूर किसोर यह प्रेमरस छाँडिके अंब तज कौनको नींब भावे ॥॥८॥
Mangla Darshan
NityaPad-140
Bhairav
Praat samay navkunj dagaraten tanman phuli aavat raadhe .. maano
प्रात समय नवकुंज डगरतें तनमन फुली आवत राधे ॥ मानो मिले अंक भर माधो अंग अंग प्रगटत प्रेम अगाधे ॥१॥ नेनबेन मुसक्याय बदन छबि बिकसत पदम्‌ जु आधे ॥ चंचल चपल बंक अवलोकिन काम नचावत ततथै ताधे ॥।२॥ जिही रस मत फीरत मानो मधुकुर भ्रमत रेहेत दिन साथे ॥॥ सो रस दियो दास परमानंद सुनिकट आराधे ।। ३॥।
Mangla Darshan
NityaPad-140
Bhairav
Nenk chitev chaleri laalan sakhee leey jugaye chitchor.. kabaki
नेंक चितेव चलेरी लालन सखी ले जुगए चितचोर।। कबकि द्वारेठाडी चितवत पियको मुसकक्‍्यानी मुखमोर ।।९॥ हो दधि मथन करत जो भवन में उचक चले ब्रज़राज किशोर ॥ लटपटी पाग केस विलुलित सखी ना जानों कहांतें उठि आये मेरे भोर || २॥| सबनिश जागे पग धरत डगमगे खसिखसि परत पीत पट छोर ॥ गोविंद प्रभुकी लखिन जात एसी व चतुर नागरी कोर ॥३॥
Mangla Darshan
NityaPad-140
Aasawari
Esein cone dhorange hoe laal tunn chunri keeno .. kahoon peak kahun
एसें कोन धोरंगे हो लाल तन चुनरी कीनो ॥ कहूं पीक कहुं अंजनलीक जावक चावक दनो ॥१॥ कहुंचंदन कहूँ वदन लग्यो कहुं भुजभर गाढो अलिंगन दीनो ॥ धोंधीके प्रभु नवलनेह कहुं चापचटक रंगदीनो ॥२॥।
Mangla Darshan
NityaPad-141
bilawal
Kunjate aavat bunny vrishbhanandini cassie neeki laage maano
कुंजते आवत बनी वृषभाननंदिनी कैसी नीकी लागे मानो मकर चांदनी । अति अलसात जुंभात उनींदी ता पर भंवर गुंज फूली घन दामिनी॥१॥ प्रथम समागम भयो गिरिधरसों रतिपति जीत मुदित जागी जामिनी। 'क्ृष्णदास' संकेत विटप तरु भुज भरि भेटि मिलि गजगामिनी ॥ २॥
Mangla Darshan
NityaPad-141
Bibhaas

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