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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aaj baney navrang chhabileri .. dagmagaat pug angang
आज बने नवरंग छबीलेरी ।। डगमगात पग अंगअंग ढीलेरी ॥१॥ यावक पाग रंगी धों कैसे जैसें करी कहो पियतैसें ॥२॥ बोलत बचन होत अलसाने ॥ पीककपोल अधर लपटाने ॥३॥ कुमकुम हृदय भुजन छबि बंदन ॥ सूर स्थाम नागर मनरंजन ॥।४॥॥
Mangla Darshan
NityaPad-141
Bibhaas
Radha pyaari thu atrang bharee .. merrie zaan millie mohan sou anchal
राधा प्यारी तु अतरंग भरी ॥ मेरी जान मिली मोहन सो अंचल पीक परी ॥१॥ छुटी लट टुटी नकबेसर मोतिनकी दुलरी ॥ हो जानत जोलो फोज मदनकी जीत लई सगरी ।।२॥| अरुन अधर मुख सघ्वास निकासत गलीत ललीत कवरी ॥ सूरदास प्रभु नगधरके संग सुरत समुद्र तरी ॥३॥
Mangla Darshan
NityaPad-141
Bhairav
Jaanat houn jaise gunan bharey hoe ... kahuko duraav karat nandanandan
जानत हों जैसे गुनन भरे हो ॥। काहुको दुराव करत नंदनंदन जहीं जाऊं तहीं कान्ह ढरे हो ॥ १॥ रैन उनींदे नेन अरुन छबि आलस बस सब अंग परे हो ॥। चंदन तिलक लग्यो कहुं बदन स्थाम सुभग तन नख उघरे हो ।।२॥ सब बिध चोर चतुर चिन्तामनि वृजजुबतिन के मन जो हरे हो ॥। ऐते ऊपर कोहे सूर प्रभु सोंह करन को होत खरे हो ॥।३॥
Mangla Darshan
NityaPad-141
bilawal
Ladli suhag dekh laleetaan deek phuli .| badan kii balaiya
लाडली सुहाग देख ललीताँ दीक फुली ।| बदन की बलैया लेत तन मन सुध भूली ॥॥ अरुन ऊदे अरुन बदन कुंज सदन मदन केल सिथल झेल आलस बसनि कसी रस फुली ॥१॥ पिक छाप जुग कपोल घुमत लोचन बिलोल गलत राग अधर मधुर अद्भुत छब छाजे ॥ दरक कंचुकी ऊतंग गल अंग राग रंग मरगजी ओर कुंद माल देखत रति लाजे ॥। २॥। प्रीतम गरें लाय लटक चलत ललीत गत बिलास मंदहास छब प्रकास दसन दुत बिराजें ॥ दासि जन हरख निरख जनम सुफल लेख लेख ठाड़ी कर जोर जोर मुख तमोल काजें | ३॥
Mangla Darshan
NityaPad-141
Bilawal
Bhorahi dagamgat jeet manmath chaley ..
भोरही डगमगत जीत मन्मथ चले ॥ सकल रजनी जगे नेक नहीं पल लगे अरूण आलस वलित नयन लागत भले ॥| १॥॥ कितव नागरनटचिन्ह प्रकटित करत वसन आभूषण सुरतरण दलमले ॥ चतुर्भुज दास प्रभुगिरिधरन छबि बाढी अधर काजर कुंकुम अंगअंग रले ॥२॥।
Khandita
NityaPad-142
Bhairav
Bhorbhaye aayeho lalan neeki batatiyan .. yavakke angcheenen
भोरभये आयेहो ललन नीकी बततियां ।। यावकके अंगचीनें नीलपट प्यारी दीने नयनम आलस भरे जागे सबरतियां ॥|१॥ छूटी ग्रीव बनदाम नखक्षत अभिराम केसें अब तुरतस्थाम डगमगी गतियां॥ केसोदास प्रभु नंदसुवन काहे लजात भलेजू सावरे गात जानी सब घतियां ॥।३॥
Khandita
NityaPad-142
Bhairav
Bhor nikunj bhavanate bhamini | aavtahai latkat gajgamini .. 1..
भोर निकुंज भवनते भामिनी | आवतहै लटकत गजगामिनी ॥ १॥ अलक सुकंध सगमगी छूटी ।। निशके उनीदे नयना बीरबहूटी | २॥ पलटत रशन वसनमणि भूषण ॥ शोभा अंग अंग प्रति दूषण ॥३॥ गुणनिधान वृषभान दुलारी॥ दासगोपाल लालजूकी प्यारी ॥४॥॥
Khandita
NityaPad-142
Bhairav
Praatkaal pyarelal aavani bunny |
प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी | उरसोहे मरगजीमाल डगमगी सुदेशवालचरण कंज मदनजीत करतगामिनी ॥।१॥। प्रियाप्रेम अंधराग सगमगी सुरंग पाग गलित वरुहा तुलसीचूर अलकन सनी ॥ कृष्णदासप्रभु गिरिधर सुरत कंठपत्र लिख्यो करजलेखनी पुनपुन राधिका गुनी ।१२॥
Khandita
NityaPad-142
Bhairav
Shobhit subhag latpati paag bheene rasik triya anurag... kunkum
शोभित सुभग लटपटी पाग भीने रसिक त्रिया अनुराग॥। कुंकुम अलक तिलक सेंदूर छबि घूमत आवत और निश जाग ॥१॥ कछुक जुंभात और माल मरगजी पीक कपोल अधर मिस दाग ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधर नीके जानत आलसवश सबअंग विभाग ॥२॥
Khandita
NityaPad-142
Bhairav
Arujharahe muktahal nirvaarat sohat ghoogharwaare vaar ..
अरुझरहे मुक्ताहल निरवारत सोहत घूघरवारे वार ॥ रति मानी संग नंदनंदनके छूटेबंद कंचुकी टूटे हार ।।१॥ निशिके जागे दोऊ नयना ढरकरहेचलत जोबन भार ॥ सूरस्याम संग सुख देखत रीझे वारंबार ॥। २॥
Khandita
NityaPad-142
Bhairav
Dagmagaat aaye natnagar .. kachhut joombhaat alsaat bhor bhaye
डगमगात आये नटनागर ॥ कछुत जूंभात अलसात भोर भये अरूण नयन घूमत निश जागर ॥१॥ रसिक गोपाल सुरत रणको यश सकल चिन्ह लिखलिये उरकागर ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधर कुंज गढ रति पति जीत्यो रतिपति सुखसागर ॥२॥
Khandita
NityaPad-143
Bhairav
Bhor tamchor boley dijeju darsanan .. aaturvhe uthh dhaaye dagmagaat
भोर तमचोर बोले दीजेजु दरसनां ॥ आतुरव्हे उठ धाये डगमगात चरण आये आलसमें नयनबेन अटपटे रसनां ॥॥९॥ एक संध्याजु कहि सिधारे बचन जियमें विचारे सकुचकें मंद प्रकटत दशनां ॥। च॒तुर्भुजप्रभु गिरिधरन सिधारो तहां जहां रतिरंग कियें पलट आये वसनां ॥२॥
Khandita
NityaPad-143
Bhairav

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