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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Madanmohan piya bhayonbhor... prathidish nahin arun dekhiyat | मदनमोहन पिय भयोनभोर॥। प्राथीदिश नहिं अरुण देखियत
और सुनियत नहीं बन खगरोर ॥।१।| गृहीतकंठ परस्पर दंपति पिय
विषलेशकातरअतिजोर ॥ गोविंदप्रभु पिय रसिक शिरोमणि प्यारी के वचन
लीनो चित चोर ॥२॥। | Khandita | NityaPad-145 | Bibhaas |
Tuu aaj dekhari dekh manmohan yeye balbir raajen | madanmohan | तू आज देखरी देख मनमोहन ये बलबीर राजें | मदनमोहन
पिय मनमंदिरतें बैठे बनिकस आये छाजें ॥१।। लटपटी पाग मरगजी माला
लपटात मधुप मधु काजें ॥ गोविंदप्रभुकेजु शिधिल अरूण दूग देखियत कोटि
मदन लाजें ॥२॥ | Khandita | NityaPad-145 | Bibhaas |
Jahinjahin nayana lagat tahintahin tasokhgat angang madhuri | जहिंजहिं नयना लगत तहिंतहिं तासोखगत अंगअंग माधुरी
वरनिनजाई ॥ सुंदर भाल कपोल मोहन मधुरे बोल नासिका देखत मन रह्ोहै
लुभाई ॥१॥ हसत लालन मुख दशन लुनाई यह छबि कहा कहूं देख धोरीहों
आईं॥ गोविंदप्रभुकी सुंदर बानिक पर बलबलबल जाई ॥२॥। | Khandita | NityaPad-145 | Bibhaas |
Nisake uneede mohan nayan rasamasye .. kaheko lajaat kendho | निसके उनीदे मोहन नयन रसमस्ये ॥ काहेको लजात केंधो
कहो लालन कहा बस्ये ॥१९॥| डगत चलत आलस जुंभातहो देखियत वसन
खस्ये ॥ कुंमनदासप्रभु गिरिधर तुम भुजबंधन कर उरहिलाए कस्ये ॥ २॥ | Khandita | NityaPad-146 | Bibhaas |
Saanware bhaleho ratinagar .. avake duraay kyondurtahe preetiju bhaee | सांवरे भलेहो रतिनागर ॥ अवके दुराय क्योंदुरतहे प्रीतिजु भई
उजागर।॥।१॥| अधर काजर नयन रगमगे रची कपोलन पीक ।। उरनख रेख प्रकट
देखियतहैं परी मदनकी लीक ॥|२॥ पलटपरे पट तिलक गयो मिट जहांतहां
कंकण गाढे ॥ परमानंदस्वामी मधुकर गति भली आपनी चाढे ॥।३॥ | Khandita | NityaPad-146 | Bibhaas |
Esein cone dhou range hoe laal tunn choonari keeno ? kahoon peak kahuun | एसें कोन धो रंगे हो लाल तन चूनरी कीनो ? कहूं पीक कहूँ
अंजनलीक जावक चावक दीनो ॥१॥ कहूं चंदन कहुं बंदन लग्यो कहूँ भुजभर
गाढो अलिंगन दीनो ॥ धोंधी के प्रभु नवलनेह कहुँ चापचटक रंग दीनो ॥२॥ | Khandita | NityaPad-146 | Devgandhar |
Kamalanayan syathamasundar nishake jageho aalas bharey.. karnakh | कमलनयन स्यथामसुंदर निशके जागेहो आलस भरे।। करनख
उर राजत मानों अर्धशशि धरे | १॥ लटपटी सिर पाग खिसत वदन तिलक टरे॥।
परगजी उर कुसुममाल भूषण अंगर्भंग परे ॥ २॥। सुरत रंग उमग रहे रोम पुलक
होत खरे ॥ परमानंद रसिकराय जाहीके भाग्य ताहीके ढरे ॥३॥ | Khandita | NityaPad-146 | Bibhaas |
Aroon uneede aaeho rasamse nisike chinh piya kahaan duraaye .. | अरूण उनीदे आएहो रसमसे निसिके चिन्ह पिय कहां दुराये ॥
नखक्षत प्राणप्यारीके मोहन कांति न छिपत छिपाये ॥१॥ कुंकुम रंजित उर
बनमाला विलुलित सुरत्र मधुर जनाये ॥ गिरिधर नवकेलिकला रस प्रमुदित
कृष्णदास अलि गाये ॥२॥ | Khandita | NityaPad-146 | Bibhaas |
Kachhu kaheen naan jaay teree unaki vikat baat .. aana aana | कछु कहीं न जाय तेरी उनकी विकट बात ॥ आन आन
प्रकृत केसे बनि आवें जो तू डार डार तो हों पात पात ॥ १॥ अब कहा कहत सो
कहों प्रीतमसों छांड देहों इत उतकी पांच सात ॥ अब तो एतेपर गोविंदप्रभु पिय
सुमुख मनाय लेहों बातन बातन भयो प्रात ॥२॥॥ | Khandita | NityaPad-146 | Ramkali |
Itani baar tum kahaan rahey .. sagari raine path chaahat nayandahe .. 1.. | इतनी बार तुम कहां रहे ॥ सगरी रेन पथ चाहत नयनदहे ।। १॥
कुंमनदासप्रभु भये ताहीके वशजिनहि गहे ॥
गिरिधर पिय भले बोल निवाहे संध्याजु कहे ।।२॥। | Khandita | NityaPad-146 | Bibhaas |
Laalan ayeri anat ratimani bhaleju aaye merey geh alsaane | लालन आयेरी अनत रतिमानी भलेजु आये मेरे गेह अलसाने
नेन बने तुतरात ॥ अधरन अंजन पीक लीक सोहे काहेको लजात जूठे सोहें
खात ॥|१॥ पाग बनावत पेचन आवत तापें तिरछे नेन चलावत उमंग
अंग न समात ॥ नंददास प्रभु प्यारी जियमें बसतहें, भूले नाम वाहीको निकस
जात ॥२॥ | Khandita | NityaPad-147 | Todi |
Ghoomat ratnare naine sakal niss jaage. latpati sudesh paag, | घूमत रतनारे नेन सकल निस जागे। लटपटी सुदेश पाग,
अलकन झलकन बीच पीखछाप युगकपोल अधरनमिस दागे ॥|१॥ बिनगुन
उरमाल बनी बिचबिच नख रेख ठनी पललटि परे पीत बसन कंकन सो दागे।
तिलक बन्यो बदन बनमाल लगी चंदनसो डगमगात चरन धरत रेन सुख
लागे॥।२॥ वचन रचन कियो सांझ तुम आये भोर मांझ बलबल या बदनकमल
शोभित अनुरागे । जाय वसो वाहि धाम बिलसे जहां चारो जाम गोदविंदप्रभु
बलिहारी करजोर मांगे ॥३॥ | Khandita | NityaPad-147 | Bilawal |
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