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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Bhor bhaye navkunj sadan tein aavat laal govardhan dhaari .. | भोर भये नवकुंज सदन तें आवत लाल गोवर्धन धारी ॥
लटपट ी पाग मरगजी माला शिथिल अंग डगमगी गतिन्यारी ॥१॥ बिन गुन
माल बिराजत उरपर नखक्षत द्विजचंद अनुहारी || छीतस्वामी जब चितये मोतन
तब हों निरख गई बलिहारी ॥२॥ | Khandita | NityaPad-147 | Devgandhar |
Baney laal rung bharey neeke rahey tum rajani aaj nenn tou arun bhaye | बने लाल रंग भरे नीके रहे तुम रजनी आज नेंन तो अरुण भये
बैन तुतरात भले जु भले राजाधिराज ॥। १॥। कौन की उपरैनी लाये अपनी तो छांड
आये सकुचत नाहीन डारी सब लाज ॥२॥ कल्याण के प्रभु गिरधरन राज रहो
केधों कहो कछु हमसों काज ।। ३॥॥ | Khandita | NityaPad-147 | Bibhaas |
Chala leey albeli dekhat sout saheli | sub niss jaagi aur | चल ले अलबेली देखत सोत सहेली | सब निस जागी और
रस पागी पीक कपोलन लागी प्रगटी प्रीत नवेली ॥॥१॥ कंचुकी ठोर ठोर दरकी
गई छूटे बारन अतुलसें जगमगात अधर चटपटी हेंली। 'तानसेन' प्रभुके रस
पागी या ही ते गर्व गहेली ॥२॥। | Khandita | NityaPad-147 | Bibhaas |
Maaee aaju laal latpataat aae anuraage. | माई आजु लाल लटपटात आए अनुरागे।
सोभित भूखन अंग अंग आलस भरे रैन उनीदे जागे ॥१॥
लटपटी सिर पेच पाग छूटे बंदन बागे।
सूरस्याम' रसिकराय रस बस कीने सुभाय जागे जहाँ सोई तिया बडभागे ॥२॥। | Khandita | NityaPad-147 | Bilawal |
Tihaare poojiye piya paay .. | तिहारे पूजिये पिय पाय ॥
केसीकेसी उपजत तुमपें कहत बनाय बनाय | १॥
आतुरभये नीलपट ओढें वसन पीत पलटाय ॥
रूचिर कपोल पीक कहां पागे अरु यश्ञ॒पत्र लिखाय ॥२॥
गिरिधरलाल जहां निस जागे तन सुख जियकी जाय ॥
कुमनदासप्रभु जांनि ये बतिया अब तुम कोन पत्याय ॥ ३॥। | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
Aaj aroon aroon dorre drigan lalke laagat hain atibhale.. | आज अरून अरून डोरे दृगन लालके लागत हैं अतिभले॥
बंदन भरे पगन अलि मानों कुंजदलन पर चले ॥ १॥| लालकी पगियामें न समात
कुटिल अलक आलस झलमले ॥ नंददासप्रभु पोहोपन मध्य मानों मधुप गुंज
सोबत ते कलमल्ने ॥२॥ | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
Mohan ghoomat ratnare nayan sakuchat kachhu kahat bayne saine heen | मोहन घूमत रतनारे नयन सकुचत कछू कहत बेन सेन हीं
सेन उत्तर देत नंदके दुलारे ॥ भूषण वसन अटपटे सीस पाग लटपटी रतिरण लई
झटपटी सुभग स्यथाम प्यारे ॥ १॥ सुवश कियो कुंजसदन मोर आये जीत मदन
पलट परे बसन अजहुं न संवारे ॥ चतुर्भुज प्रभु गिरिवरधर दर्पन ले देखिये जू
सेंदुरको तिलक भाल अधरन मिस कारें २॥ | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
Payehoju zaan laal tum payehoju zaan .. tumason cone | पायेहोजु जान लाल तुम पायेहोजु जान ॥ तुमसों कोन
बलैया बोले निपट कपटकी खान ॥।१॥ औरनसो तुम हसत खेलतहों हमसे रहत
मुखतान॥ सूरदासप्रभु अपनी गरज को हियतपरमसुजान ।। २॥। | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
Tesoi syaam naam teso tunn keeyo syathaam bhalikini syaam | तेसोई स्याम नाम तेसो तन कीयो स्यथाम भलीकीनी स्याम
आज मेरे ग्रेहे आये हो जु॥ अमी लगत हुते अरुनअधर दोऊ: आछे निके लागे
लाल: कजरा रंगाये होजु ॥१॥ तेसोई नीलपट तेसोई पीतपट चटक दुर कुंदन
वे आये होजु ॥ नंददास प्रभु तनमन भले स्थाम धन हे बाम जीन निके कर पाये
होजु॥२॥ | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
Pyaareeke mahal tein uthchale bhor . sakhivund avalok | प्यारीके महल तें उठचले भोर । सखिवुंद अवलोक
अग्रस्थित ढकत नीलकंचुकी पीतपट छोर ।।१॥ राधाचरित्र विलोक परस्पर
ते जुहास इतउत मुखमोर ॥ गोविंदप्रभु लेचले दगादे नागरनवल सभाचित
चोर ॥२॥। | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
Aaj dekhiyat nena aalas bharey ragamage .. rainpalkanpari | आज देखियत नेना आलस भरे रगमगे ॥ रेनपलकनपरी
सुरत इंनजेकरी भोर आये लाल धरत पग उगमगे ॥ १॥। तनओरे भांत कछुब कही
न जात लसत अद्भुत क्रांत अंग अंग जग मगे | चत्रभुज प्रभु गिरिधर न आये
भलीकरी पलट लाए बसन सोधे मील सग बगे ॥२॥। | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
Aaj aur chhavi nandkishore .. mill ris ruchir lochan bhaye | आज और छवि नंदकिशोर ।। मिल रिस रुचिर लोचन भये
अंतर चितबत चित्त तुम्हारी ओर ॥ ९॥ प्रकटत पीठ बलय करकंकण देखियत
हार हिये विन डोर।। सोहत बसन नील अरू राते अधरन अंजन नय न तंबोर ॥। २॥।
नखसिखलों शुंगार अटपटो पायेमानों पलाने चोर ।। फूले फिरत दिखावत
ओरन निडर भये देह सन अकोर ॥३॥ देखत बने कहत न बनि आवबे सोभा
सींधु बिना कहुूं ठोर ॥| अचरज क्यों न होय इन बातन सूर गहन देखयो बिन
भोर ॥।४॥ | Khandita | NityaPad-148 | Bilawal |
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