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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Taheen jaao jahaan raine hutey .. kaheko duraav karat manmohan
तहीं जाओ जहां रेन हुते ॥ काहेको दुराव करत मनमोहन मिटे न चिन्ह उर अंक जु ते।। ९॥ दशनन दाग नखरे खबनी वर काम कुटिल कुच वीच धुते ॥ विना सूत उरहार बन्यों वर परम चतुर हृदे लाय जुते ॥२॥ अंबर अलक अटपटे भूषण भामिनी भवन भाग भुकते ॥| सूरज दीन अधर मधु पीकें अंबुजनयन उनीदें हुते ॥ ३॥
Khandita
NityaPad-148
Bilawal
Saanche boll tihaare saanjhake .. rajani anat jaage nandanandan
सांचे बोल तिहारे सांझके ॥ रजनी अनत जागे नंदनंदन आये निपट सवारे ॥१॥ आतुरभये नीलपट ओढे पीरे वसन विसारे ॥। कुमनदासप्रभु गिरिधरन भलेजुभले वचन प्रतिपारे ॥ २॥।
Khandita
NityaPad-148
Bilawal
Aisee aisee baatan laalan que‍yon manmaanen .. urmein banaaybanaay
ऐसी ऐसी बातन लालन क्‍यों मनमानें ॥ उरमें बनायबनाय जासोंकहिये जो यह नहींजानें || १॥ रतिकेचिन्ह प्रकट देख्वियत सबके सेकदुराने ॥ कुमनदासप्रभु गोवरधनधर तुमहो भले सयाने ॥२॥।
Khandita
NityaPad-149
Bilawal
Latpati pagkepech savaaro .. kardarpan leey nirakhbaarnen
लटपटी पागकेपेच सवारो ॥ करदर्पन ले निरखबारनें सुंदरबदननिहारों ॥ १॥ रंगभीने मुसकात मनोहरनेहकहानिखारो ॥ सूरदासप्रभु सबसुखदाता चिततेनेंक न टारो ॥२॥
Khandita
NityaPad-149
Bilawal
Nayanaki chanchalata kahaan keene bheene rung que‍yon naan kaho shyam
नयनकी चंचलता कहां कीने भीने रंग क्‍यों न कहो श्याम हमसो कित दुरावत ॥ औरके बदन देखनकों नेम लीनो किधों पलकन मधि राखी प्यारी ताके भार भरे नये लेंले आवत ॥१॥ मधुपगुंज लुब्धरहे जेसमीप निसबसे संगलागे आवत रति कीरतिगावत ॥ सूरदासमदनमोहन गुप्तप्रीतिप्रकट भई मुख नहीं बनत बनावत ॥ २॥।
Khandita
NityaPad-149
Bilawal
Soh divaay boojhatahi mohansanchi kaho mosuun yeh baat .. chhooti
सोह दिवाय बूझतही मोहनसांची कहो मोसूं यह बात ॥ छूटी अलकबदन परराजत कछूईडत जुंभात ॥१॥ अंजन रेख अधरपर शोभित भूषण वसनसिधिल सबगात || उरज चिन्ह उरपरशोभा देखियत दूरकरो अब हियोपिराता।२॥ सुनसुन श्रवणन वचन हमारे झूठी कहत नतुमसों यहबात ॥ जाही केतुमरंगरगेहो जासो अंगअंग लपटात ॥३॥ कहिये कहाकहत नहिं आवत जैये तहांजहां जागेरात॥ सूरदासप्रभु निपट निलज तुम एतेपर ठाडे मुसकात ॥।४॥
Khandita
NityaPad-150
Todi
Aaye alsaane laljoye humm sarsaane anatajage hoe rangragke |..
आये अलसाने लालजोये हम सरसाने अनतजगे हो रंगरागके |॥ मेंतोजानी मेरें आये भोरकाहूऔर के रसके चखैया भ्रमर काहू बागके ॥९॥ जहीते जुआयेलाल तहींक्योंनजाओ जू जाहीके भाग जागेपरमसुहाग के ॥ तानसेनके प्रभु तुमबहुनायक वातेंतोबनाओ पैं संभारो पेचपाग के ॥२॥।
Khandita
NityaPad-150
Todi
Radha harike garvabhari .. sarbrayanko aagam jabjanyo baithirahi
राधा हरिके गर्वभरी ।। सरब्रयनको आगम जबजान्यो बैठीरही खरी॥१॥ उतब्रजनार संग जुरकें बिहसत करत परहास्य ।। चल्यो नजायदेखियेरी वा राधाकोआस्य ॥२॥ कैसो वदन शुंगार कौनविधि अंगदशाभई कैसी ॥। सूरस्याम निशरसवशकीये निधरक व्हेकें वैसी ॥।३॥।
Khandita
NityaPad-150
Bilawal
Janpayeho lalana valval vrajnupatikunwar ..
जानपायेहो ललना वलवल ब्रजनूपतिकुंवर ॥ जाकेविवशसबनिशजागेतबही अनुसर || १॥ अपनी प्यारीके रतिके चिन्हहमर्हिं दिखावन आये देते लोन दाथे पर॥ गोविंदप्रभु शामलतन तैसेई मनन जनमतहीते युवतिन प्राणहर ॥२॥
Khandita
NityaPad-150
Bilawal
Nand-nandan vrishabhaanu-dhulari kunj-bhawan tein chaley uthhi praat .
नंद-नंदन वृषभानु-ढुलारी कुंज-भवन तें चले उठि प्रात । अँसनि बाहु दिऐं जु परस्पर आलस बस अँग-अँग, जुंभात ॥ विलुलित मालमरगजी सारी गंडनि पीक नख-छत बनी सात | छीत-स्वामी' गिरिधर निसिबिलसे साति के चिन्ह लखि अति सकुचात |॥।
Khandita
NityaPad-151
Bibhaas
Bhalein tum aae merein praat. rajnisukh kahun anat kiau piya !
भलें तुम आए मेरें प्रात। रजनीसुख कहुँ अनत कियौ पिय ! जागे सारी रात ॥ झपि-झपि आवत नैन उनींदे कहा कहौं ? यह बात ज्यों जलरूह तकि किरन चंद की अति समित मुंदि जात ॥ कहुं चंदन, कहूँ बंदन लाग्यौ देखियतु सांवल गात। गंगा सरसुति मानों जमुना अँग ही मांझ लखात ॥। भली करी ब्रत वोल निवाहे, मेरे गुह परभात। छीत-स्वामी' गिरिधर सुनि बातें बदन मोरि सकुचात ॥।
Khandita
NityaPad-151
Devgandhar
Piya-sanga jaagi vrishabhaanu-dulari .
पिय-सँग जागी वृषभानु-दुलारी । अंग-अंग आलस जुँभात अति कुंज-सदन तें भवन सिधारी॥ मारग जात मिलि सखी औरें तब हीं सकुचि तन-दसा विसारी | ' छीत' स्वामिनी सों कहति भामिनी ! तोहिं मिले निसिगिरिवरधारी ॥
Khandita
NityaPad-151
Bilawa

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